June 25, 2026
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  • इस्तीफा दो के लगाए नारे, बोले-ये लड़ाई जारी रहेगी

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : चंडीगढ़ के सेक्टर-18 से यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो” के नारे लगाए जा रहे थे। पुलिस ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। यह कार्यक्रम 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के विरोध में आयोजित किया गया था। आज ही के दिन वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू किया गया था। भाजपा की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में इस संबंध में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

हमारी लड़ाई ऐसे ही जारी रहेगी

कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रदर्शन पुलिस ने रोका है। पता नहीं उन्हें क्या प्रॉब्लम है। इनके बच्चे परीक्षा नहीं देते। इनके परिवार से नीट का कोई एग्जाम नहीं देता। कांग्रेस पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी। हम ऐसे ही लड़ाई जारी रखेंगे। इस दौरान उन्होंने जोर-जोर से नारे लगाए।

नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर मंत्री का विरोध

यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता हाल ही में हुए नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का विरोध कर रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन यूथ कांग्रेस की ओर से पहले से तय किया गया था। सेक्टर-19 में युवा कार्यकर्ताओं को एकत्रित होने का आह्वान किया गया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहीं से हिरासत में ले लिया।

आपातकाल लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सोचा-समझा प्रहार

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस और तत्कालीन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सीधा व सोचा-समझा प्रहार था।

धर्मेंद्र प्रधान ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी के लिए इसलिए संघर्ष किया था कि किसी एक व्यक्ति या परिवार की सत्ता बचाने के लिए पूरे देश के लोकतंत्र को ही कुचल दिया जाए? उन्होंने कहा कि उस दौर में सत्ता बचाने के लिए तमाम लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया गया था, जिसका गवाह इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला भी है।

हजारों साल के संघर्ष की देन है लोकतंत्र

प्रधान ने याद दिलाया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था हजारों वर्षों की सभ्यता, संघर्ष और बलिदान की देन है। अंग्रेजों और अन्य आक्रांताओं से लड़कर जो आज़ादी मिली, उसे संविधान ने मजबूत किया। लेकिन आपातकाल के दौरान उसी पवित्र संविधान की आत्मा को चोट पहुंचाई गई।

आने वाली पीढ़ियों को सच बताना जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की एक प्रमुख महाशक्ति बनने की राह पर है और पूरी दुनिया की नजरें हम पर हैं। ऐसे समय में लोकतंत्र, संविधान और देश के हितों को सर्वोपरि रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपातकाल के काले इतिहास को याद रखना इसलिए जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र की असली कीमत और उसके महत्व को समझ सकें।