October 2, 2026
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  • चिलिंग सेंटरों से रात को लाया गया

हरियाणा में दूध के रेट बढ़ाने की मांग को लेकर (1 से 3 अक्टूबर तक) ‘दूध बंद’ के ऐलान के बाद किसानों ने वीटा प्लांट के बाहर पक्का मोर्चा लगाने का फैसला लिया है। दूसरे दिन आज शुक्रवार को भी किसान और पशुपालक प्लांट के बाहर धरने पर बैठेंगे। ये धरना सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा। इसे लेकर उन्होंने प्लांट अधिकारियों और डीसी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा है।

इसे देखते हुए वीटा प्लांट अधिकारियों ने दूध सप्लाई लाने और ले जाने वाली गाड़ियों का टाइल टेबल बदल दिया है। अब सुबह 10 बजे से पहले सप्लाई के गाड़ी भेजी जाएगी और शाम 4 बजे के बाद दूध लेकर आने वाली गाड़ियों की एंट्री होगी। कल वीरवार को भी आधे से ज्यादा दूध दिनभर चिलिंग सेंटरों पर रखना पड़ा, जो रात को गाड़ियों के जरिए प्लांट में लाया गया।

अब किसान और पशुपालकों को डेयरी एसोसिएशन ने भी समर्थन किया है और वे अब गांव-गांव में पशुपालकों से संपर्क कर उनसे सहयोग की अपील में जुटे हैं। मुनयादी के जरिए किसानों और पशुपालकों को शामिल किया जा रहा है। वीरवार शाम से कुछ गांव और पशुपालकों ने दूध कम रेट में बेचने का विरोध भी किया है। साथ ही दूध देने र लेने से मना कर दिया है। इसके चलते पुलिस प्रशासन भी अलर्ट है।

गांवों में लोग एकजुट होना शुरू

अब ग्रामीण स्तर पर भी कुछ लोग यानी पशुपालक एकजुट होना शुरू हो गए है। गांव में मंदिर-गुरुघर से मुनादी करवाई जा रही है। कुछ डेयरी समितियों ने भी दूध लेने और देने से 3 दिन के लिए समर्थन करते हुए बंद कर दिया है। बनगांव का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें समिति ने दूध बंद कर दिया है।

प्रदेश में दूध के एक ही रेट तय करने की मांग: किसान

किसानों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन को अपना ज्ञापन सौंपकर अवगत करा दिया है। वे अगले 2 दिन तक प्लांट के बाहर धरना लगाकर बैठेंगे। किसानों ने ये भी आरोप लगाया कि सिरसा वीटा के फैट के रेट अंबाला और बाकी प्लांट से कम है। इसके बावजूद मिल्क से बने प्रोडेक्टस और दूध उसी रेट में बिकते हैं। इनके रेट सभी प्लांट के बराबर है। किसानों ने प्रदेशभर में दूध के एक ही रेट तय करने की मांग की है।

सप्लाई सुचारू रहेगी: सीईओ

सिरसा वीटा प्लांट के सीईओ दिनेश मेहता का कहना है कि हमारी ओर से दूध की सप्लाई सुचारू रहेगी। वीरवार दोपहर को कुछ दिक्कत आई थी और गाड़ियां प्लांट नहीं पहुंच सकी। उनको चिलिंग सेंटरों पर भिजवा दिया गया था। वे गाड़ियों किसानों के धरने के बाद शाम से रात्रि तक मंगवाई गई।