January 17, 2026
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  • गणतंत्र दिवस पर होंगे सम्मानित, कैंसर से पिता को खोया, फिर अपनाई प्राकृतिक खेती

रेवाड़ी जिले के गांव कंवाली के किसान यशपाल खोला तीन दिन तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मेहमान बनेंगे। देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मानित किए जाने वाले छह किसानों में यशपाल खोला का नाम भी शामिल है।

राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त पहल

यशपाल खोला का कार्य न केवल मिट्टी और कृषि भूमि के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला है, बल्कि इससे किसानों की आय में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा आमजन के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है। उनके प्रयासों को राष्ट्रीय निर्माण की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में देखा जा रहा है। जिसकी सराहना समाज, सरकार और प्रशासन द्वारा लगातार की जाती रही है।

राष्ट्रपति भवन की तरफ से यशपाल को भेजा गया निमंत्रण पत्र डाक कर्मियों और अधिकारियों ने सौंपा। निमंत्रण पत्र सौंपने वालों मे सहायक अधीक्षक डाकघर उपमंडल रेवाड़ी चरणजीत यादव, पोस्टमैन सोनू यादव, हनुमान, गोविंद (सहायक डाकपाल, डहिना उप डाकघर) तथा पोस्टमास्टर रामेहर शर्मा (कंवाली) शामिल रहे।

यशपाल ​​​​​​​बोले- मेरे लिए सम्मान की बात

यशपाल खोला ने कहा कि देश की प्रथम नागरिक से निमंत्रण मिलने मेरे लिए गर्व की बात है। तीन दिन राष्ट्रपति भवन में रहने का सम्मान और भी उत्साहवर्धक है। इससे न केवल मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी, बल्कि दूसरे किसान भी प्राकृतिक खेती की तरफ आने को उत्साहित होंगे।

यशपाल के परिवार में पत्नी अनीता के अलावा बेटी फलक राव, बेटा आरव और मां सुशीला देवी हैं। यशपाल ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती तो 2014 में ही शुरू कर दी थी। जब 2018 में कैंसर से पिता की मौत हुई तो उसके बाद पूरी तरह से प्राकृतिक खेती करने और दूसरे किसानों को प्रेरित करने का निर्णय ले लिया था।

यशपाल खोला अरावली किसान क्लब के प्रधान हैं। इसके साथ ही स्नातक एवं एचएयू से दो साल का डिप्लोमा किया और वे किसान रत्न अवार्डी हैं। वह न केवल प्राकृतिक तरीके से गेहूं और सब्जी और फल की पैदावार करते हैं, बल्कि उसकी मार्केटिंग भी करते हैं।
इसके लिए राष्ट्रपति भवन की ओर से उन्हें आधिकारिक निमंत्रण मिला है। यशपाल खोला 25 जनवरी को अपनी पत्नी अनीता कुमारी के साथ दिल्ली रवाना होंगे और 28 जनवरी को वापस लौटेंगे। यशपाल ने साल 2018 में पिता की कैंसर से हुई मौत के बाद पूरी तरह प्राकृतिक खेती को अपना लिया था। हालांकि, उन्होंने प्राकृतिक खेती की शुरुआत साल 2014 में ही कर दी थी।

जानकारी के अनुसार, इन किसानों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आईसीएआर दिल्ली तक खुद जाना होगा। इससे आगे राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाने और वहां रहने की पूरी व्यवस्था सरकार करेगी।

प्राकृतिक खेती में यशपाल ने निभाई अहम भूमिका

डीसी ने बताया कि यशपाल ने न केवल खुद प्राकृतिक खेती को अपनाया, बल्कि एक बड़े रकबे को प्राकृतिक खेती में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न कृषि संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर न केवल अपने खेतों, बल्कि अन्य किसानों के खेतों में भी प्राकृतिक उत्पादन को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया है।

यशपाल खोला ने प्राकृतिक उत्पादों की रिटेल मार्केटिंग का एक प्रभावी और प्रेरक मॉडल भी विकसित किया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और उपभोक्ताओं तक शुद्ध, सुरक्षित खाद्यान्न पहुंच रहा है। उनका यह मॉडल आज कई किसानों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहा है।