- लव-मैरिज से एतराज नहीं, मां-बाप की सहमति जरूरी
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : कुरुक्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला में शुक्रवार को तीन दिवसीय उत्तर भारत सर्वखाप महापंचायत चिंतन शिविर की शुरुआत हुई। पहले दिन हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से 50 से ज्यादा खाप पंचायतों के प्रतिनिधि पहुंचे। किसान संगठनों और अन्य सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा समाज में बढ़ती सामाजिक बुराइयों, युवाओं के भटकाव, नशे की समस्या, लिव-इन रिलेशनशिप, लव-मैरिज और एक गांव-एक गोत्र विवाह जैसे मुद्दों पर हुई। इस शिविर में इन विषयों पर समाज के सामने स्पष्ट राय रखने और सरकार को सुझाव देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
दो स्तर पर चल रही चर्चा- श्योकंद
अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला के प्रधान कृष्ण श्योकंद ने बताया कि यह केवल एक बैठक नहीं बल्कि समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चिंतन का मंच है। शिविर में दो स्तरों पर चर्चा हो रही है। पहला, समाज के अंदर बढ़ रही बुराइयों को कैसे खत्म किया जाए। दूसरा, उन कानूनों और सामाजिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जाए जिनका सीधा असर समाज और परिवार पर पड़ रहा है।
समाज को तोड़ रहा लिव-इन रिलेशनशिप
बैठक में खाप प्रतिनिधियों ने लिव-इन रिलेशनशिप को प्रमुख मुद्दा बताया। लिव-इन रिलेशन समाज को तोड़ रहा है। इससे एक नहीं बल्कि रिलेशन में रहने वालों के परिवार भी खराब हो जाते हैं। ये परिवारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। परिवार समाज की सबसे छोटी, लेकिन सबसे मजबूत इकाई है।
एक गांव-एक गोत्र विवाह पर मंथन
श्योकंद ने कहा कि शिविर में एक गांव और समगोत्र विवाह के मुद्दे पर भी चर्चा होगी। इस विषय पर सामाजिक और वैज्ञानिक दोनों पहलुओं को लोगों के सामने रखा जाएगा। इसके लिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि लोगों तक तथ्यों के आधार पर जानकारी पहुंचाई जा सके।
36 बिरादरी के लोगों से शामिल होने की अपील
कृष्ण श्योकंद ने कुरुक्षेत्र की धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के पदाधिकारियों से चिंतन शिविर में शामिल होने की अपील की। यह किसी एक समाज का नहीं बल्कि 36 बिरादरी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा अभियान है। कल दूसरे दिन 200 के आसपास खापें शिविर में पहुंचेंगी।
वर्षों से कानून में बदलाव की मांग उठा रही खाप: संजय देशवाल
देशवाल खाप के प्रधान संजय देशवाल ने कहा कि एक गांव-एक गोत्र विवाह और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर खाप पंचायतें लंबे समय से सरकारों के सामने अपनी बात रखती रही हैं। दावा किया कि वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को ज्ञापन दिया गया था।
लव मैरिज से एतराज नहीं
देशवाल बोले कि लव-मैरिज से कोई एतराज नहीं है, लेकिन उसमें मां-बाप की सहमति जरूरी है। अगर बच्चा अपने मां-बाप का विरोध करके उनको छोड़कर चला जाए, तो सबसे ज्यादा दुख उनको होता है। इसलिए यह कानून जरूर होना चाहिए।
कानून मंत्री से भी मिल चुकी खापें
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मनोहर लाल खट्टर को भी कई बार सुझाव दिए गए। कानून मंत्री से भी मुलाकात कर इन विषयों पर चर्चा की गई, लेकिन अब तक अपेक्षित स्तर पर समाधान नहीं निकल पाया। अभी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने भी यह विषय रखें जाएंगे।
रणनीति बनाकर जाएंगे सरकार के पास
शिविर का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। इस बार खाप पंचायतें सामाजिक और कानूनी दोनों पहलुओं पर विस्तृत मंथन कर आगे की रणनीति तय करें