October 29, 2026
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  • CM संग मीटिंग से पहले शिक्षा विभाग का आदेश, विज ने आश्वासन दिया था

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हरियाणा में 10,757 गेस्ट टीचर्स को स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने नियमित करने से इनकार कर दिया है। विभाग ने ऑर्डर जारी कर कहा कि गेस्ट टीचर्स की नियुक्तियां भर्ती के नियमों के अनुसार नहीं हुई थीं।

गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। आरोप लगाया कि विभाग ने 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत जांच नहीं की। मोर्चा ने अब डिपार्टमेंट के इस लेटर के बाद फिर न्याय यात्रा निकालने की चेतावनी दी है।

दरअसल, गेस्ट टीचरों की न्याय रैली 21 अक्टूबर को सिरसा से शुरू हुई थी। उनका चंडीगढ़ जाकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम था। 26 अक्टूबर को कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने सीएम नायब सैनी से उनकी बात कराने का आश्वासन दिया था।

मोर्चा के अध्यक्ष कृष्ण धारसूल के अनुसार, विज ने भरोसा दिया था कि यदि गेस्ट टीचरों की मांगों से संबंधित आदेश लागू नहीं होते तो वह खुद उनकी न्याय यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद टीचर्स ने न्याय यात्रा की कॉल वापस ली थी।

3 पॉइंट में पढ़िए, गेस्ट टीचर का नियमतीकरण विवाद क्या है:-

  • 2005-06 में हुई थी नियुक्ति: याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह के मुताबिक, 2005-06 में सरकारी स्कूलों के रिक्त पदों पर विज्ञापन, चयन समिति और मेरिट लिस्ट की प्रक्रिया के तहत करीब 12,700 गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। नियमित करने की मांग पर मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा।
  • करीब 20 साल की सेवा का तर्क: सरकार ने नियुक्तियों को अस्थायी व्यवस्था बताया, लेकिन उपलब्ध विवरण के अनुसार, हाईकोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी। अदालत ने करीब 20 साल तक सेवाएं लेने, शिक्षकों को मनमाने ढंग से अस्थायी कर्मचारी मानने और 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता पर टिप्पणी की।
  • रेगुलर होने पर मिल सकते हैं लाभ: सुप्रीम कोर्ट के मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें 2014 की नीतियों की वैधता बरकरार रखी गई थी। नियमित होने पर पात्र शिक्षकों को सरकारी नियमों के अनुसार पे स्केल, DA, HRA, मेडिकल सुविधाएं, छुट्टियां, सालाना वेतन वृद्धि, पेंशन संबंधी लाभ और प्रमोशन जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।

लेटर में क्या बातें की गईं…

24 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ लेटर: हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने सुखविंदर सिंह व अन्य गेस्ट टीचर्स की नियमित करने की मांग पर स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया। विभाग ने 2014 की पॉलिसी के तहत उन्हें नियमित करने से इनकार कर दिया। ये लेटर सभी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर को भेजा गया है।

नियुक्ति को नियमित भर्ती नहीं माना: विभाग के अनुसार, गेस्ट टीचर्स को 2005 से स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए पीरियड के हिसाब से रखा गया था। यह नियमित नियुक्ति नहीं, बल्कि अस्थायी व्यवस्था थी।

भर्ती प्रक्रिया के नियम पूरे नहीं हुए: विभाग ने कहा कि नियुक्ति के समय नियमित भर्ती की तरह परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन नहीं हुआ था। आरक्षण के नियमों का भी पालन नहीं किया गया था।

लंबे समय तक नौकरी करने से हक नहीं: विभाग ने कहा कि करीब 20 साल तक सेवा देने से नियमित होने का अधिकार नहीं मिल जाता। 2014 की पॉलिसी में तय सभी शर्तें पूरी करना जरूरी है।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी मांग खारिज: विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट-2019 का हवाला देते हुए कहा कि इस कानून में नौकरी जारी रखने की सुरक्षा है, नियमित करने का प्रावधान नहीं। इन आधारों पर विभाग ने नियमित करने की मांग खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने 3 महीने में निर्णय लेने को कहा

गेस्ट टीचर्स की रेगुलराइजेशन की मांग पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 3 महीने के भीतर निर्णय लेने को कहा है। हालांकि, कोर्ट ने रेगुलर करने का कोई सीधा आदेश नहीं दिया है, लेकिन यह जरूर स्पष्ट किया कि शिक्षकों की याचिका को एक विस्तृत रिप्रेजेंटेंशन मानकर अधिकारी उनके पक्ष को सुनें और तर्क सहित आदेश पारित करें।

बता दें कि प्रदीप कुमार, भिवानी और झज्जर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत पीजीटी और टीजीटी ने याचिका में कहा था कि उनकी नियुक्ति 2005 से 2007 के बीच चयन प्रक्रिया के जरिए हुई थी। हरियाणा अतिथि शिक्षक सेवा अधिनियम, 2019 के तहत उन्हें 58 साल की आयु तक नौकरी करने की अनुमति तो है, लेकिन नियमितीकरण का लाभ अब तक नहीं मिला है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षक नियमितीकरण की शर्तों और राहत के पात्र पाए जाते हैं, तो सरकार उन्हें इसका लाभ तत्काल प्रदान करे।

फिर कोर्ट जाएंगे गेस्ट टीचर्स, अंबाला से निकालेंगे न्याय यात्रा

गेस्ट टीचर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रधान कृष्ण धारशूल ने कहा कि वे करीब 21 साल से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। नियमितीकरण से जुड़े शिक्षा विभाग के आदेश के खिलाफ वे दोबारा कोर्ट जाएंगे। हाईकोर्ट ने 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत उनके दावों पर फैसला लेने के निर्देश दिए थे, जिसे सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी थी।

धारशूल ने सरकार से आदेश रद्द कर मामले की नए सिरे से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल्द बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। मांगें नहीं मानी गईं तो अंबाला से न्याय यात्रा शुरू करेंगे।