September 14, 2026
2 sep 15
  • 50 साल के करियर में ऐसा अलोकतांत्रिक रवैया कभी नहीं देखा

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हरियाणा विधानसभा के 3 दिवसीय मानसून सत्र के हंगामेदार समापन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुड्डा ने सत्र के दौरान हुए घटनाक्रम को अपने लंबे राजनीतिक करियर का सबसे अलोकतांत्रिक दौर करार दिया।

हुड्डा ने कहा कि चर्चा शुरू होने से पहले ही मंत्रियों का जवाब आना और जनहित के मुद्दों पर आंकड़ों की हेरफेरी करना यह साबित करता है कि सरकार के पास विपक्ष के तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद कर्मवीर बौद्ध, विधायक गीता भुक्कल, अशोक अरोड़ा, बीबी बत्रा और आफताब अहमद समेत पार्टी के कई प्रमुख विधायक मौजूद रहे।

राजनीतिक जीवन में ऐसा पहली बार देखा: हुड्डा ने कहा, “मेरे पूरे राजनीतिक करियर में विधानसभा के अंदर और बाहर ऐसा माहौल कभी नहीं रहा। विपक्ष की आवाज दबाने और सरकार की पोल खुलने के डर से विधायकों को अलोकतांत्रिक तरीके से रोका गया।”

मुख्यमंत्री का बयान और सरकार का दोहरा रवैया: पूर्व सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस करके विपक्ष के विधायकों को गलत ठहरा रहे हैं। सवाल यह है कि अगर पहले दिन विधायकों को तख्तियां ले जाने से रोका गया, तो दूसरे दिन छूट क्यों दी गई? यह सरकार की विफलता और दोहरे रवैये को साफ दिखाता है।

सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर गोलमोल जवाब: सफाई कर्मियों के ‘काम रोको प्रस्ताव’ पर चर्चा से पहले ही मंत्री का जवाब देना प्रक्रिया के खिलाफ था। मंत्री का दावा है कि पक्का करने की मांग पर राय ली जा रही है, जबकि हमने 2014 में ही इन्हें पक्का करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, जिसमें आरक्षण का भी स्पष्ट प्रावधान था। सरकार केवल गुमराह कर रही है।

HKRN के नाम पर छलावा, व्हाट्सएप पर हो रही छंटनी: हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) पर बोलते हुए हुड्डा ने कहा कि सदन में खुद मुख्यमंत्री ने माना है कि यह सरकारी नौकरी नहीं है। सरकार जॉब सिक्योरिटी के लंबे-चौड़े दावे कर रही है, लेकिन हकीकत यह है कि युवा उनसे आकर मिले हैं, जिन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर नौकरी से निकाला जा रहा है।

सदन और जनता को गुमराह कर रही सरकार: नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि विधानसभा के पटल पर सरकार द्वारा गलत और भ्रामक आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। सदन को गुमराह करने का सीधा मतलब प्रदेश की जनता को धोखा देना है।