- चाय-मिठाइयों के दाम बढ़े, ग्राहकों ने खरीदारी की मात्रा घटाई
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा में चीनी के बढ़ते दाम अब सीधे आम आदमी की रसोई से लेकर चाय की दुकानों, मिठाई कारोबार और औद्योगिक इकाइयों तक असर डाल रहे हैं। करीब डेढ़ महीने पहले 42 से 45 रुपए किलो मिलने वाली चीनी अब थोक बाजार में करीब 62 रु से 65 रु किलो तक पहुंच गई है। यानी कीमत में करीब 18 से 20 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।
खुदरा बाजार में अलग-अलग गुणवत्ता और खरीद स्तर के हिसाब से भाव 62 से 65 रुपए किलो तक बताए जा रहे हैं। अचानक बढ़े दामों का असर यह है कि 10 रुपए में मिलने वाली चाय अब 15 रुपए की हो गई है, जबकि हलवाई एसोसिएशन मिठाई के दाम 20 से 30 रुपए किलो तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
किराना कारोबारियों के मुताबिक, ग्राहक चीनी खरीद तो रहे हैं, लेकिन पहले के मुकाबले कम मात्रा में कम कर दी है।
चीनी कारोबारी ने बताए ये कारण…
गन्ने की पैदावार घटने से चीनी का उत्पादन कम हुआ
शहर के थोक चीनी व्यापारी पवन गोयल ने बढ़ते दामों के पीछे सबसे बड़ा कारण गन्ने की कम पैदावार और चीनी का कम उत्पादन होना बताया है। उन्होंने कहा कि इस बार कई चीनी मिलों में पिछले साल की तुलना में कम चीनी तैयार हुई है।सोनीपत के अलावा गोहाना, पानीपत, असंध, करनाल समेत हरियाणा के कई क्षेत्रों की चीनी मिलों में भी उत्पादन कम हुआ। हालांकि शुगर मिल के बड़े अधिकारी का कहना है कि यह हालात केवल सोनीपत में नहीं, बल्कि हरियाणा के सभी मिल के हालात हैं। किसान गन्ने की पैदावार कम कर रहा है। जिसका असर उत्पादन पर भी देखने को मिल रहा है।
किसान गन्ने से दूसरी फसलों की ओर जा रहे
पवन गोयल के अनुसार, किसान धीरे-धीरे गन्ने की खेती से दूसरी फसलों की तरफ जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गन्ने की फसल में मेहनत और समय दोनों अधिक लगते हैं और किसानों को भुगतान के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। इस कारण किसान धान जैसी फसलों को महत्व दे रहे हैं।गन्ने का रकबा और उत्पादन कम होने से चीनी का उत्पादन घटा है और बाजार में उपलब्धता कम होने के कारण भाव बढ़ रहे हैं।
त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ी
पवन गोयल ने बताया कि अभी त्योहारी सीजन चल रहा है और अगले करीब दो महीने तक चीनी की मांग अधिक रहने की संभावना है। त्योहारों पर मिठाइयों की खपत बढ़ती है और अधिकांश मिठाइयों में चीनी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में उत्पादन कम और मांग अधिक होने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
पिछले साल की तुलना में कम उत्पादन का दावा
पवन गोयल ने बताया कि बाजार में यह चर्चा है कि इस बार चीनी मिलों में पिछले साल की तुलना में करीब एक से डेढ़ लाख बैग कम चीनी तैयार हुई है। सोनीपत की चीनी मिल में भी पिछले साल के मुकाबले कम चीनी तैयार होने की बात उन्होंने कही। उत्पादन में कमी के कारण बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
मांग बढ़ने के साथ स्टॉक करने से भी दबाव
पवन गोयल के अनुसार जब बाजार में भाव बढ़ने की संभावना बनती है, तो व्यापारी और ग्राहक भविष्य में और महंगी होने की आशंका में स्टॉक करने लगते हैं। इससे बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा और कम हो सकती है और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
शुगर मिल में चीनी उत्पादन के आंकड़ें…
चार साल में एक-तिहाई घट गई गन्ना पेराई
सोनीपत सहकारी चीनी मिल की गन्ना पेराई चार साल में 33.7 प्रतिशत घट गई। 2022-23 में 30.75 लाख क्विंटल गन्ना पेरने वाली मिल 2025-26 में सिर्फ 20.39 लाख क्विंटल तक पहुंच गई। यानी 10.36 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कम हुई।
इसी दौरान चीनी उत्पादन भी 3.08 लाख से घटकर 1.90 लाख क्विंटल रह गया, यानी 1.18 लाख क्विंटल और 38.5 प्रतिशत की गिरावट हुई।
2025-26 सबसे खराब सीजन रहा
इस साल पेराई में एक ही सीजन में 21.60 प्रतिशत की गिरावट आई। चीनी उत्पादन भी 24.12 प्रतिशत घट गया। मिल के बंद रहने का समय 151 से बढ़कर 368 घंटे हो गया।
मिल की क्षमता का उपयोग भी गिरा
2200 टीसीडी क्षमता वाली मिल की क्षमता उपयोग 2024-25 में 88.47 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 70.47 प्रतिशत रह गया। 2026-27 में गन्ने का रकबा 1,053 एकड़ बढ़कर 15 हजार 122 एकड़ हो गया है। अनुमानित गन्ना उपलब्धता भी 32 से बढ़कर 34 लाख क्विंटल है। फसल की स्थिति पिछले साल के सामान्य के मुकाबले इस बार अच्छी बताई गई है।
हालांकि, अगेती फसल का हिस्सा 41 से घटकर 35 प्रतिशत और मध्यम अवधि की किस्मों का हिस्सा 59 से बढ़कर 65 प्रतिशत हुआ है। वहीं एक्सपर्ट का मानना है कि केवल सोनीपत ही नहीं हरियाणा के सभी 14 शुगर मिल में गन्ने की कम पैदावार का असर देखने को मिल रहा है।
थोक बाजार में कितने बढ़े दाम
42-45 रुपए से बढ़कर 62 रुपए किलो हुआ भाव
चीनी कारोबारी पवन गोयल ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले चीनी का थोक भाव 42 से 45 रुपए किलो था। अब यह बढ़कर करीब 62 रुपए किलो यानी 6200 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। उन्होंने कहा कि 50 साल के पुश्तैनी कारोबार में उन्होंने इतनी तेजी से करीब 20 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी।
पवन गोयल ने संभावना जताई कि आने वाले समय में चीनी के दाम और बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगले एक महीने में चीनी का भाव 75 रुपए किलो तक पहुंचना अतिश्योक्ति नहीं होगी।
पवन गोयल ने बताया कि चीनी की खपत केवल घरेलू स्तर पर नहीं है। दवा फैक्ट्रियों, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक और अन्य औद्योगिक उत्पादों में भी बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल होती है। उन्होंने दावा किया कि सोनीपत शहर में करीब 4 हजार क्विंटल चीनी की प्रतिदिन खपत होती है।
उन्होंने दावा किया कि राई इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 1000 चीनी बैग की खपत होती है। स्थानीय उत्पादन से मांग पूरी नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश से भी चीनी मंगानी पड़ती है।
यूपी की चीनी महंगी, गुणवत्ता बेहतर- व्यापारी
पवन गोयल ने बताया कि सोनीपत की चीनी का रेट जीएसटी समेत करीब 6100 रुपए प्रति क्विंटल है। सोनीपत में सिंगल रिफाइंड चीनी मिलती है, जबकि उत्तर प्रदेश में डबल रिफाइंड चीनी उपलब्ध होती है। यूपी की चीनी सोनीपत की चीनी से करीब डेढ़ से दो रुपए प्रति किलो महंगी पड़ती है, लेकिन व्यापारी ने इसकी गुणवत्ता बेहतर बताई।
बढ़े दाम का हर वर्ग पर असर…
10 रुपए की चाय अब 15 रुपए की हुई
चाय विक्रेता कुलदीप ने बताया कि वह करीब 15 साल से चाय का कारोबार कर रहे हैं। पहले उनकी दुकान पर एक कप चाय 10 रुपए में बिकती थी, लेकिन चीनी समेत अन्य सामग्री महंगी होने के कारण अब उन्होंने चाय का भाव बढ़ाकर 15 रुपए कर दिया है।
कुलदीप ने बताया कि केवल चीनी ही महंगी नहीं हुई है। चाय बनाने में इस्तेमाल होने वाली अदरक और इलायची के दाम भी बढ़े हैं। पिछले डेढ़ महीने में लागत बढ़ने के कारण चाय का रेट बढ़ाना पड़ा।
मिठाई के दाम में बढ़ोतरी की तैयारी
सोनीपत श्री कृष्णा पेड़े वाले और हलवाई एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण कुमार ने बताया कि पिछले डेढ़ से दो महीने में चीनी के साथ मैदा, वनस्पति घी और देसी घी के दाम भी बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में हलवाइयों के साथ बैठक कर मिठाई के दाम 20 से 30 रुपए प्रति किलो तक बढ़ाने का निर्णय लिया जाएगा।
कृष्ण कुमार के अनुसार सोनीपत जिले में 1000 से अधिक हलवाई हैं, जबकि पंजीकृत हलवाइयों की संख्या 65 है। चीनी के दाम में करीब 20 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी का असर मिठाई की लागत पर सीधे पड़ रहा है।
ग्राहक ने चीनी की खरीदारी घटाई
सोनीपत किरयाना एसोसिएशन के प्रधान नवीन गर्ग ने बताया कि करीब एक महीने पहले चीनी लगभग 4400 रुपए प्रति क्विंटल मिल रही थी, जबकि अब इसका भाव 6200 से 6500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
नवीन गर्ग के अनुसार ग्राहक चीनी खरीद रहा है, लेकिन पहले की तुलना में कम मात्रा में खरीदारी कर रहा है। कीमत बढ़ने के कारण खरीदारी करते समय ग्राहक सोच रहा है। इसका असर किरयाना दुकानदारों के कारोबार पर भी पड़ रहा है।
आम रसोई पर सीधा असर
चीनी के दाम में डेढ़ महीने के भीतर करीब 18 से 20 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी ने घरेलू बजट को भी प्रभावित किया है। मध्यम और गरीब वर्ग के लोग अब चीनी की खरीद कम मात्रा में कर रहे हैं।
वहीं, चाय की खपत और मिठाइयों की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। इस तरह चीनी की बढ़ी कीमत का असर खेत में गन्ने की पैदावार से शुरू होकर मिल के उत्पादन, थोक बाजार, दुकानदार, चाय विक्रेता, हलवाई और अंत में आम उपभोक्ता की जेब तक पहुंच गया है।