- अनुभव के साथ धार्मिक होना भी जरूरी
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :
अयोध्या के राम मंदिर की व्यवस्थाएं चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन के बाद संभाल लेंगे। देशभर से 5500 लोगों ने CEO पद के लिए ऑनलाइन आवेदन भेजे हैं। चयन समिति बहुत तेजी से सही व्यक्ति की तलाश कर रही है।
चयन कैसे किया जा रहा है? इसका जवाब कमेटी से जुड़े एक सदस्य देते हैं- हम सिर्फ आवेदन करने वाले के अनुभव को आधार नहीं बना रहे। उस व्यक्ति की राम में कितनी आस्था है, यह भी चयन या रिजेक्शन का अहम आधार है।
किस तरह के लोगों के आवेदन इस पद के लिए आए हैं? इस पर वह कहते हैं- रिटायर्ड IAS, IPS, शिक्षाविद्, IT प्रोफेशनल, वकील, पूर्व जज और वित्त एवं लेखा सेवा के जुड़े रिटायर्ड अधिकारी तक ने आवेदन किए हैं। इतने सारे लोगों में सही व्यक्ति का चुनाव आसान नहीं है ,लेकिन अगले 40 दिन में हम यह प्रक्रिया पूरी कर लेंगे।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 13 जुलाई को CEO पद के लिए आवेदन मांगे थे। 18 जुलाई तक आवेदन लिए गए। 3 शर्तें रखी गई थीं-
- आयु सीमा- आवेदक की उम्र 50 से 70 साल के बीच होनी चाहिए।
- कार्यकाल- CEO की नियुक्ति शुरुआती 3 साल के लिए की जाएगी। कामकाज के प्रदर्शन के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा।
- अनुभव- सामान्य प्रशासन, वित्त-लेखा (अकाउंट्स), मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, विधि एवं कानून के क्षेत्र से जुड़े ऐसे लोग आवेदन कर सकते थे, जिन्हें संबंधित क्षेत्र में कम से कम 20 साल के कामकाज का अनुभव हो।
CEO के लिए किस तरह के लोगों ने आवेदन किया है? समिति के सदस्य कहते हैं- देशभर के नामचीन हस्तियों में शामिल लोग आगे आ रहे हैं। ज्यादातर लोग राम मंदिर के CEO के जरिए सेवा करना चाहते हैं। क्योंकि ये मंदिर प्रबंधन का वो स्ट्रक्चर होगा, जो आगे चलकर एक उदाहरण की तरह पेश किया जा सकता है। यही वजह है कि आवेदनों की स्क्रूटनी के लिए भी कठिन मापदंड रखे गए हैं। इसमें पूर्व नौकरशाह और न्यायाधीशों को वरीयता मिल सकती है।
टेलीफोन पर बात, फिर इंटरव्यू के लिए बुला रहे
ऑनलाइन आवेदन आने के बाद उम्मीदवारों से टेलीफोन पर बातचीत की जा रही है। उनके अनुभव को समझा जा रहा है। फिर ट्रस्ट के पैरामीटर पर जो आवेदक ठीक लग रहा, उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया जा रहा है। इंटरव्यू में चयन के लिए पैनल के लोग उनकी योग्यता को देखते हुए सवाल करते हैं। धार्मिक आस्था, प्रबंधन के तौर-तरीकों को लेकर बातचीत होती है।
चूंकि ये पूरी प्रक्रिया तब हो रही है, जब राम मंदिर के चढ़ावा में हेर-फेर किए जाने की घटना सामने आ चुकी है। इसलिए चयन के लिए आए आवेदकों से बड़े फंड के सही प्रबंधन को लेकर भी बातचीत हो रही है। मंदिर में क्या बेहतर हो सकता है, इसकी प्लानिंग भी समझने की कोशिश चयन समिति कर रही है।
पहले फेज में 5000 लोगों की छंटनी हो रही है। फिर बचे हुए 500 लोगों में से सिर्फ 20-30 लोग ही लिस्ट में रखे जाएंगे। दूसरे फेज में चयन के मापदंड पहले से कठिन हो जाएंगे। कमेटी इन सदस्यों का गहन इंटरव्यू लेगी। इस चरण में मुख्य रूप से इन योग्यताओं को आंका जाएगा… चयन समिति के 3 सदस्य इस प्रक्रिया को पूरा करने में आवेदक की इच्छाशक्ति को भी देख रहे हैं। वह पूछ रहे हैं कि आने वाले समय में आप अगर CEO बनाए जाते हैं, तो प्रबंधन कैसे करेंगे? ये पूरी प्रॉसेस चयन समिति के सदस्य अपने घरों से कर रहे हैं। वो अयोध्या में फाइनल चयन के वक्त ही पहुंचेंगे।
केंद्र और RSS की निगरानी में होगा आखिरी सिलेक्शन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा- इस संवेदनशील पद के लिए CEO का आखिरी चयन केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सीधी निगरानी में होगा। CEO की कुर्सी पर वही व्यक्ति बैठेगा, जिस पर सरकार और संघ दोनों की सहमति होगी।
इतना ही नहीं, भविष्य में CEO दफ्तर के स्टाफ के चयन में भी केंद्र और संघ की रजामंदी की अहम भूमिका होगी।
नए सिरे से SIT बनी, जांच दोबारा शुरू होगी
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा SIT बनाने का आदेश दिया है। 20 जुलाई की दोपहर 3:30 बजे सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि नए सिरे से SIT बनाई जाए। सीनियर IPS अधिकारी टीम की अगुआई करें, जिससे जांच किसी निर्णायक स्तर तक पहुंचे।
CJI ने कहा कि जांच निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव होनी चाहिए। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता को यूपी सरकार से SIT के लिए नाम लेकर आने को कहा। अदालत अब 27 जुलाई को अगली सुनवाई करेगी। इसके बाद योगी सरकार ने भी नई SIT गठन का आदेश जारी कर दिया।