September 19, 2026
29 jan 4
  • कांग्रेस-AAP साथ आते तो चुनाव टाई होता

हरियाणा ब्रे​किंग: न्यूज : चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने मेयर पद के साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद जीत लिया है। सौरभ जोशी चंडीगढ़ के 29वें मेयर बने हैं। सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह और डिप्टी मेयर सुमन शर्मा चुने गए। मेयर चुनाव में भाजपा को 18 वोट मिले हैं। कांग्रेस उम्मीदवार को सात और आप उम्मीदवार को 11 वोट मिले है। वोटिंग से पहले ही कई पार्षदों ने तो भाजपा पार्षद सौरव जोशी को बधाई दे दी थी।

इस जीत में बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) का गठबंधन टूटने से मिला है। बीजेपी को आखिर समय तक आशंका थी कि उन्हें रोकने के लिए दोनों पार्टियों के पार्षद एक साथ आ सकते हैं, लेकिन जैसे ही कांग्रेस के सभी पार्षद और सांसद मनीष तिवारी अपने मेयर पद के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सदन से चले गए। उससे बीजेपी को साफ हो गया था कि अब उनका विजयी रथ रुकने वाला नहीं है।

उधर, AAP-कांग्रेस दोनों ही गठबंधन न होने के पीछे कोई भी तर्क दें, लेकिन इसके पीछे आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव ही हैं। दोनों में से कोई भी यह नहीं चाहता कि उस पर साथ होने का टैग लगे।

 

पंजाब विधानसभा चुनाव AAP-कांग्रेस में दूरी की सबसे बड़ी वजह

दरअसल, मौजूदा समय में अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी साथ आते तो चुनाव टाई हो सकता था। क्योंकि, कांग्रेस के पास 7 और AAP के पास 11 पार्षदों के वोट थे। दोनों साथ आते तो 18 वोट बन जाते। वहीं, भाजपा के पास भी 18 वोट थे। मुकाबला बराबरी का होने पर पर्ची के जरिए मेयर चुना जाता।

लेकिन, दोनों पार्टियों के इस कदम के पीछे साल के अंत में होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव और अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि कांग्रेस विपक्षी दल है। बीजेपी हर बार इस मुद्दे पर दोनों दलों को घेरती रही है कि वे मिले हुए हैं, क्योंकि चंडीगढ़ में 2024 निगम चुनाव और लोकसभा चुनाव में दोनों एक साथ थे।

दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़कर यह संदेश देने की कोशिश की कि वे एकजुट नहीं हैं और साथ ही अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत किया है।

क्रॉस वोटिंग होती तो पता चल जाता गद्दार कौन

चंडीगढ़ नगर निगम की स्थापना 1996 में हुई थी। तब से लेकर अब तक हर साल चुने गए पार्षद सीक्रेट वोटिंग के जरिए मेयर चुनते रहे हैं। लेकिन जब 2024 में मेयर पद का चुनाव सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, उसके बाद इसमें बदलाव की आवाज उठने लगी।

ऐसे में यह फाइनल किया गया कि इस बार सीक्रेट वोटिंग की जगह हाथ दिखाकर या हाथ उठाकर मतदान होगा। साफ था कि अगर कोई पार्षद आखिरी समय में क्रॉस वोटिंग करता है, तो उसका आसानी से पता चल जाएगा। इसके चलते बीजेपी ने इस बार मेयर चुनाव की घोषणा के साथ ही आम आदमी पार्टी के पार्षद तोड़ लिए थे

इसी वजह से वह आसानी से कांग्रेस और आप के पार्षदों के बराबरी तक पहुंच गई थी। जबकि नामांकन के आखिरी दिन भी AAP में बगावत थी। डिप्टी मेयर के राम चंद्र यादव ने आजाद नामांकन भर दिया था। जबकि एक और पार्षदके अलग सुर थे।
ऐसे में कांग्रेस की दलील थी कि इनमें आपस में फूट है। जबकि मेयर की वोटिंग के बाद आप नेता जरनैल सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने बीजेपी का साथ दिया है। इस का जबाव कांग्रेस को जनता देगी।

लाइव प्रसारण के कारण भी पार्षदों ने क्रॉस वोट नहीं किया

पहले जब नगर निगम चुनाव होते थे, तो चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती थी और नगर निगम में लगी स्क्रीनों पर ही वह दिखाई जाती थी। लेकिन अब चंडीगढ़ नगर निगम की पूरी प्रक्रिया यूट्यूब पर ऑनलाइन लाइव दिखाई गई। जिससे सारे लोग चुनाव को लाइव देखते रहे।

राजनीतिक विशलेषक सुमित चौधरी बताते हैं कि पार्षदों को अपनी-अपनी पार्टी के साथ बनाए रखने में यह एक अहम वजह रही। क्योंकि अगर कोई पार्षद दूसरी पार्टी के पक्ष में मतदान करता, तो वह आसानी से पकड़ा जाता और जनता को भी उसके बारे में जानकारी मिल जाती। ऐसे में किसी भी दल ने यह जोखिम नहीं लिया।