November 5, 2026
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  •  स्काई कैफे  टिकट, एंट्री से लेकर जाने सबकुछ

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के अंबाला में बने 1857 की क्रांति के सबसे बड़े स्मारक का गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह लोकार्पण कर रहे हैं। पब्लिक के लिए यह दिवाली के बाद ही खुलेगा। इसमें एंट्री के लिए टिकट लगेगा। टिकट की कीमत 250 रुपए तक प्रस्तावित है। हालांकि CM नायब सैनी जो म्यूजियम संचालन कमेटी के चेयरमैन भी हैं, खुद टिकट की फाइनल कीमत और पब्लिक एंट्री की तारीख घोषित करेंगे।

करीब 600 करोड़ की लागत से 10 साल में बनकर तैयार हुए स्मारक को पूरा देखने के लिए विजिटर को करीब 5 घंटे का समय देना होगा। इसमें दिन छिपने के बाद होने वाला लाइट एंड साउंड शो का समय शामिल नहीं है। लाइट एंड साउंड शो रोजाना होगा और विजिटर इसके लिए कॉम्बो-पैक ले सकेंगे।

स्मारक के डायरेक्टर डॉ. कुलदीप सैनी ने दावा किया कि निर्माण लागत, कंस्ट्रक्टेड एरिया और थीम बेस के आधार पर यह देश का सबसे बड़ा म्यूजियम है। इसमें दुबई के फ्यूचर म्यूजियम की तरह एलिवेटर गैलरी और इंग्लैंड की तर्ज पर 360 डिग्री गैलरी बनी हैं। टावर के सामने 2 हजार दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर बनाया गया है।

म्यूजियम में एंट्री से लेकर इवनिंग शो तक की जानकारियां..

सवाल: म्यूजियम में आमजन को एंट्री कब से मिलेगी? -गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह लोकार्पण कर रहे हैं, लेकिन आम पब्लिक के लिए म्यूजियम को दिवाली के बाद खोला जाएगा।

सवाल: क्या एंट्री फ्री रहेगी या फीस देनी होगी? -टिकट लगेगा। संचालक कमेटी ने 250 रुपए तक प्रस्तावित किए हैं। हालांकि ये कम या ज्यादा हो सकता है, इस पर सीएम फैसला करेंगे। शाम को लाइट एंड साउंड शो देखने के लिए कॉम्बो-पैक रहेगा।

सवाल: क्या किसी को छूट भी मिलेगी? -स्टूडेंट्स टिकट 10 रुपए रखना प्रस्तावित है। इसके अलावा आर्मी पर्सनल, सीनियर सिटिजन्स समेत कुछ वर्गों को छूट देने का प्रस्ताव है।

सवाल: म्यूजियम देखने में कितना समय लगेगा? -यहां कुल 23 गैलरी बनी हैं। जिन्हें देखने में करीब 5 घंटे लगेंगे। यदि शाम के समय लाइट एंड साउंड शो भी देखना है तो अतिरिक्त समय देना होगा।

सवाल: म्यूजियम की टाइमिंग क्या रहेगी? – अभी यह सुबह 9 बजे से ओपन होगा। हालांकि शाम को एंट्री जल्दी बंद हो जाएगी क्योंकि टिकट लेने से लेकर पूरा घूमने तक में 5 घंटे लगने हैं। ऐसे में आखिरी बैच की एंट्री का समय शाम 3 से 5 के बीच कुछ रह सकता है।

सवाल: क्या खुद ही म्यूजियम घुमना पड़ेगा या गाइड मिलेगा? -गाइड की व्यवस्था रहेगी। 40-40 विजिटर के बैच बनेंगे। विजिटर की संख्या कम रहने की स्थिति में वेट नहीं करना पड़ेगा, बल्कि छोटी टोली चलेगी।

सवाल: सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र क्या रहेगा? -दुबई के फ्यूचर म्यूजियम की तर्ज पर एलिवेटर गैलरी बनी है। जिसमें करीब 40 फीट ऊंची छत रहेगी और एंट्री के बाद भूल-भुलैया जैसा अनुभव होगा। ऐसे ही इंग्लैंड व अन्य देशों की तर्ज पर गैलरी बनी हैं। 360 डिग्री गैलरी में फिल्म दिखेगी जो एक आभासी दुनिया में ले जाएगी।

सवाल: म्यूजियम में 1857 से जुड़ी क्या ऐतिहासिक चीजें दिखेंगी? -1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण बनी इनफील्ड राइफल देखने को मिलेगी। इसमें इस्तेमाल होने वाले चर्बी वाले कारतूसों को भारतीय सैनिकों ने इस्तेमाल करने से मना किया था। इसके अलावा उसी क्रांति के दौर के तलवार व भाले भी देखने को मिलेंगे।

तस्वीरों से जानते हैं म्यूजियम की 8 खास बातें…

1. 65 मीटर ऊंचा टावर, 2 हजार लोगों का ओपन थिएटर

22 एकड़ के कैंपस में प्रवेश करते ही 65 मीटर ऊंचा मेमोरियल टावर नजर आता है। हाई-स्पीड लिफ्ट से इसकी 13वीं मंजिल तक पहुंच सकेंगे। यहां इमर्सिव प्रोजेक्शन शो होगा, जिसमें चारों तरफ चलने वाले दृश्यों के बीच दर्शकों को इतिहास का हिस्सा होने जैसा अनुभव मिलेगा।

म्यूजियम का 80% हिस्सा डिजिटल टेक्नोलॉजी बेस है। लेजर शो, 3D ग्राफिक्स और वर्चुअल रियलिटी (VR) के जरिए इतिहास दिखेगा। टावर के सामने 2 हजार दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर बनाया गया है। यहां खुले आसमान के नीचे लाइट, साउंड और प्रोजेक्शन से 1857 की कहानी दिखाई जाएगी। सबसे ऊपर स्काई कैफे भी आकर्षण का केंद्र होगा।

2. पानी की स्क्रीन पर दिखेगी क्रांति, टावर पर नजर आएंगे शहीद

शाम को होने वाले वाटर शो में पानी के फव्वारों से स्क्रीन बनाई जाएगी। इस पर चलने वाली तस्वीरें और वीडियो 65 मीटर ऊंचे मेमोरियल टावर पर दिखाई देंगे। ग्राफिक्स से ऐसा दृश्य बनेगा, मानो क्रांति से निकला घोड़ा छलांग लगाकर टावर तक पहुंच रहा हो।

म्यूजियम की दीवारों पर प्रोजेक्शन मैपिंग और टावर पर लाइट एंड साउंड शो भी होगा। इसमें इस्तेमाल होने वाले एक प्रोजेक्टर की कीमत करीब 5 करोड़ रुपए बताई गई है।

3. तीन मंजिलों में 22 गैलरी, VR से मिलेगा 1857 का अनुभव

मुख्य म्यूजियम तीन मंजिला है। इसकी 22 गैलरियों में 1857 की क्रांति की घटनाओं को क्रमवार दिखाया गया है।

‘भारत में युद्ध’ गैलरी में 360 डिग्री इमर्सिव प्रोजेक्शन है। इसमें दर्शकों को चारों तरफ इतिहास से जुड़े दृश्य दिखाई देंगे। वहीं, डिजिटल किताब के पन्ने हाथ के इशारों से पलटे जा सकेंगे।

4. हरियाणा के कारीगरों की कला, ‘मूक वृक्ष’ भी बनाया

म्यूजियम में आर्ट एंड क्राफ्ट का काम हरियाणा के स्थानीय कारीगरों ने किया है। इसमें टेराकोटा, जूट और पारंपरिक फुलकारी का इस्तेमाल हुआ है।

आखिर में श्रद्धांजलि गैलरी में ‘मूक वृक्ष’ बनाया गया है। इसके जरिए अंग्रेजी शासन के दौरान क्रांतिकारियों को पेड़ों पर फांसी दिए जाने की घटनाओं को दर्शाया गया है। इसमें विजिटर हाथ से छुएंगे तो लाइट निकलेंगी जिससे पेड़ की शाखाएं जलने लगेंगी।

5. मेरठ से 9 घंटे पहले अंबाला में उठी थी क्रांति की चिंगारी

म्यूजियम का सबसे अहम हिस्सा 1857 की क्रांति की शुरुआत को लेकर अंबाला से जुड़ा ऐतिहासिक दावा है। आमतौर पर 10 मई 1857 को मेरठ में हुए विद्रोह को क्रांति की शुरुआत माना जाता है। लेकिन अंबाला से जुड़े कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर दावा किया जाता है कि यहां विद्रोह की घटनाएं इससे करीब 9 घंटे पहले शुरू हो गई थीं।

इसके लिए म्यूजियम में ‘अंबाला की ओर’ और ‘अंबाला की घटनाएं’ नाम से गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें अंबाला छावनी के महत्व और अंग्रेजी शासन के खिलाफ सैनिकों में बढ़ते असंतोष को दिखाया गया है।

6. क्या है 2012 में मिला टेलीग्राम? जिससे अंबाला का दावा मजबूत हुआ

इस दावे के समर्थन में 2012 में सामने आए एक ऐतिहासिक टेलीग्राम का जिक्र है। इसके मुताबिक, 10 मई की सुबह अंबाला में 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फेंट्री से जुड़ी विद्रोह की घटनाएं हुईं, जबकि मेरठ में उसी दिन शाम को विद्रोह हुआ।

इतिहासकार केसी यादव की पुस्तक ‘रिवॉल्ट ऑफ 1857 इन हरियाणा’ में भी हरियाणा में हुई क्रांतिकारी गतिविधियों का उल्लेख है। हालांकि, कई इतिहासकार आज भी क्रांति की शुरुआत मेरठ से ही मानते हैं।

7. रोटी और कमल के फूल से पहुंचते थे गुप्त संदेश

‘क्रांति की योजना’ गैलरी में विद्रोह की तैयारियों और गुप्त संदेशों के तरीकों को दिखाया गया है। इसके मुताबिक, गांवों तक संदेश पहुंचाने के लिए रोटियों और सैनिक छावनियों में कमल के फूलों का इस्तेमाल संकेत के रूप में किया जाता था। पेड़ों की छाल के जरिए भी संदेश पहुंचाने का उल्लेख है।

इस गैलरी में बताया गया है कि किस तरह अलग-अलग गांवों और छावनियों को जोड़कर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की तैयारी की गई थी।

8. चर्बी वाले कारतूस से लेकर कविता-संगीत तक की कहानी

‘क्रांति के कारण’ गैलरी में चर्बी वाले कारतूसों के विवाद को धातु की कलाकृतियों और होलोग्राफिक शो के जरिए दिखाया गया है।

वहीं, ‘स्वतंत्रता के औजार’ गैलरी में बताया गया है कि आजादी की लड़ाई में तलवार और बंदूक के अलावा साहित्य, कविता, संगीत और जन-आंदोलनों ने भी लोगों को जोड़ने में भूमिका निभाई।