October 20, 2026
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  • 11-पावर को 25 साल का मिला लाइसेंस

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हरियाणा में पहली बार कोई प्राइवेट कंपनी लोगों को बिजली सप्लाई करेगी। बिजली विनियामक आयोग (HERC) ने इसके लिए ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को लाइसेंस जारी कर हरी झंडी दे दी है। फिलहाल यह कंपनी केवल दो जिलों गुरुग्राम और नूंह में ही दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) के साथ विकल्प के तौर पर मौजूद रहेगी।

इसके विरोध में बिजली निगम कर्मियों ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। संयुक्त मोर्चा ने इस फैसले को ‘जन-विरोधी’ और ‘कर्मचारी-विरोधी’ करार देते हुए प्रदेशव्यापी आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।इंजीनियर एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र घणघस के अनुसार 19 अक्टूबर को देर शाम आपात मीटिंग में यह फैसला हुआ है।

उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर से लगातार प्रदर्शन और 22 से 24 अक्टूबर तक 3 दिवसीय पूर्ण हड़ताल का शेड्यूल जारी किया है। उधर, मंत्री विज भी कह चुके हैं कि सरकार इस फैसले के खिलाफ सरकार APTEL (विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण) में अपील करेगी।

कंपनी ग्राहकों तक बिजली कैसे पहुंचाएगी, बिजली के रेट क्या होंगे, उपभोक्ता इस विकल्प को कैसे चुन सकेंगे, क्या प्राइवेट हाथों में जाने से बिजली महंगी होगी और क्यों इंजीनियर्स एसोसिएशन इसे सरकारी कंपनी व ग्राहकों दोनों के लिए कमर तोड़ने वाला फैसला बता रही है?

पहले जानिए कंपनी जमीन पर किस तरह काम करेगी…

  • 33 kV-डोमिनेंट मॉडर्न आर्किटेक्चर: इलेवन पावर पारंपरिक 11 kV की भारी-भरकम और पुरानी लाइनों के बजाय 33 kV प्राइमरी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बिछाएगी। 33 kV केबल 11 kV के मुकाबले 4 गुना ज्यादा लोड संभालने में सक्षम होती है, जिससे बिजली कटौती और तकनीकी फॉल्ट्स न के बराबर होते हैं।
  • गैस-इंसुलेटेड कॉम्पैक्ट सब-स्टेशन : गुरुग्राम जैसे घने और जमीन की कमी वाले शहरों में कंपनी बड़े खुले सब-स्टेशनों के बजाय कारखाने में बने फैक्ट्री-असेंबल्ड GIS कॉम्पैक्ट सब-स्टेशन लगाएगी। ये बहुत कम जगह घेरते हैं और पूरी तरह से कवर्ड होने के कारण मौसम/धूल से खराब नहीं होते।
  • अंडरग्राउंड केबलिंग और कवर्ड कंडक्टर्स : शहर के अंदर दुर्घटनाओं से बचाव के लिए 11 kV और 33 kV की अंडरग्राउंड केबल बिछाई जाएगी। ग्रामीण और बाहरी इलाकों में खुली तारों की जगह मीडियम वोल्टेज कवर्ड कंडक्टर (MVCC) का उपयोग होगा, ताकि आंधी या पेड़ गिरने पर भी करंट न फैले और बिजली न कटे।

नई व्यवस्था उठ रहे सवाल, जो कस्टमर जानना चाहते हैं…

सवाल 1: जब पहले से खंभे गड़े हैं, तो क्या नई लाइन बिछाने से सड़कों की खुदाई की जाएगी? जवाब: नहीं, कंपनी इसके लिए आधुनिक ट्रेंचलैस डिगिंग (बिना सड़क खोदे पाइप बिछाने वाली टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल करेगी। घनी सोसायटिज और सड़कों के नीचे सीधे अंडरग्राउंड केबल बिछाई जाएगी, जिससे आम जनता को खुदाई या ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े।

सवाल 2: मेरे पड़ोस में 10 घर हैं और सिर्फ मैं इलेवन पावर की बिजली लेना चाहता हूं, तो यह कैसे होगा? जवाब: हां, बिल्कुल। कानूनन कंपनी पर यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन (USO) लागू है। यदि किसी क्षेत्र में केवल एक उपभोक्ता भी नया कनेक्शन मांगता है, तो कंपनी को अपनी सर्विस लाइन बढ़ाकर निश्चित समय-सीमा के भीतर कनेक्शन देना अनिवार्य होगा।

सवाल 3: क्या DHBVNL के तार खंभे होंगे यूज ? जवाब: कानूनी शर्तों के अनुसार इलेवन पावर सरकारी DHBVNL के तारों या खंभों का उपयोग नहीं करेगी। उसे अपनी पूरी तरह से समानांतर डिस्ट्रीब्यूशन लाइनें बिछानी होगी। कंपनी राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी (HVPNL) के 220 kV ग्रिड सब-स्टेशनों से अपने नए 33/11 kV सब-स्टेशनों तक सप्लाई के लिए बे-एक्सटेंशन और इन-फीड केबल बिछाएगी।

सवाल 4: उपभोक्ता स्विचओवर प्रक्रिया किस तरह होगी?

जवाब: यदि कोई उपभोक्ता DHBVNL छोड़कर इलेवन पावर पर आना चाहता है, तो उसे पहले DHBVNL के सभी पुराने पेंडिंग बिल, सरचार्ज और एरियर क्लियर करने होंगे। पुराने सरकारी कनेक्शन का मीटर हटने के बाद इलेवन पावर अपना नया स्मार्ट मीटर और सर्विस लाइन लगाकर तुरंत बिजली सप्लाई चालू करेगी।

सवाल 5: बिजली के फॉल्ट आने पर तुरंत रिपेयरिंग कैसे होगी? जवाब: कंपनी का पूरा नेटवर्क स्मार्ट ग्रिड कंट्रोल सिस्टम से लैस होगा। कहीं भी लाइन फॉल्ट होते ही कंट्रोल रूम में स्वचालित अलर्ट चला जाएगा। इसके अलावा मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के जरिए शिकायत दर्ज होते ही लोकल क्विक-रिस्पॉन्स टीम (QRT) मौके पर पहुंचेगी।

सवाल 6: अगर भविष्य में इलेवन पावर कंपनी घाटे में चली जाए या काम बंद कर दे, तो क्या होगा? जवाब: इसके लिए आयोग के नियमों में ‘सप्लायर ऑफ लास्ट रिसॉर्ट’ का प्रावधान रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति, दिवालियापन या लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में सरकारी डिस्कोम (DHBVNL) तुरंत सप्लाई की कमान संभाल लेगा, जिससे किसी भी उपभोक्ता की बिजली एक मिनट के लिए भी बंद नहीं होगी।

सवाल 7: नूंह जैसे दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम किस तरह होगा? जवाब: नूंह जिले के लिए कंपनी ने अलग से लगभग ₹305 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बजट तय किया है। इसमें 5 नए बड़े 33/11 kV सब-स्टेशन, 8 बड़े ट्रांसफॉर्मर, 60 किमी नई 11 kV लाइनें और 800 से अधिक नए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DTR) बिछाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में भी निर्बाध वोल्टेज मिले।

सवाल 8: क्या बिजली के टैरिफ में कोई बदलाव होंगे? जवाब: प्राइवेट कंपनी मनमर्जी से बिजली के रेट नहीं बढ़ा सकती। बिजली का बेस टैरिफ HERC ही तय करेगा। निजी कंपनी अपने आधुनिक आईटी और ओटी इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए 100% सटीक स्मार्ट मीटरिंग, रियल-टाइम कंजम्पशन ट्रैकिंग और डिजिटल पेमेंट की सुविधाएं देगी। इससे गलत बिलिंग और दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।

सवाल 9: उद्योगों और कमर्शियल सेक्टर पर असर होगा? जवाब: मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और डेटा सेंटरों को बिना कट के हाई-वोल्टेज बिजली चाहिए। इलेवन पावर 33 kV आधारित आधुनिक कॉम्पैक्ट सब-स्टेशन और गैस-इन्सुलेटेड (GIS) ग्रिड बिछा रही है, जो कम जगह में हाई-कैपेसिटी लोड संभालने में सक्षम हैं। निर्बाध ग्रिड सप्लाई मिलने से उद्योगों की उत्पादन लागत घटेगी और हरियाणा में नए औद्योगिक निवेश आकर्षित होंगे।

सवाल 10: सरकारी बिजली कंपनियों (DHBVNL/UHBVNL) पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: गुरुग्राम और नूंह से DHBVNL को लगभग 42 प्रतिशत से अधिक राजस्व मिलता है। यदि बड़े औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ता प्राइवेट प्लेयर की तरफ स्विच करते हैं, तो सरकारी डिस्कॉम के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सरकारी कंपनियां बड़े उद्योगों से मिलने वाले ज्यादा टैरिफ से ही किसानों और गरीब परिवारों को सस्ती/मुफ्त बिजली देती हैं। HERC ने निर्देश दिया है कि इस वित्तीय असंतुलन को रोकने के लिए उचित रेगुलेटरी मैकेनिज्म (जैसे क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज) लागू किया जाएगा।