- कॉलेज स्टूडेंट सप्लायर, सरकार को ₹10 करोड़ का नुकसान
हरियाणा से शराब लाकर उत्तराखंड के बड़े कॉलेजों के बच्चों को सप्लाई की जा रही है। आबकारी विभाग ने कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को होम डिलीवरी के जरिए शराब पहुंचाने वाले मुख्य आरोपी गर्वित और उसके दोस्त आदित्य कुमार को गिरफ्तार किया है।
इस मामले में गर्वित की मां को भी गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले 25 अगस्त की रात को दो अन्य तस्करों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। गर्वित उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई कर रहा है। पढ़ाई के दौरान उसने देहरादून के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से संपर्क बनाया।
25 वर्षीय गर्वित दिल्ली और हरियाणा से सस्ती व इंपोर्टेड शराब लाकर पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं को सप्लाई करता था। वह पूरे गिरोह को संचालित कर रहा था और छात्र-छात्राओं को शराब की होम डिलीवरी देता था। इसके लिए बाकायदा एक रेट चार्ट भी बनाया गया था।
शराब की डिलीवरी के लिए उसने आसपास रहने वाले युवाओं को डिलीवरी बॉय के तौर पर लगाया था। इससे अब तक उत्तराखंड सरकार को 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना लगा चुका है।
सिलसिलेवार ढंग से पूरी खबर…
1. 2022 में रखी नेटवर्क की नींव- मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला गर्वित उर्फ विक्रांत साल 2022 में देहरादून की उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में लॉ (LLB) की पढ़ाई करने आया। पढ़ाई के दौरान गर्वित ने दिल्ली और हरियाणा से सस्ती व इंपोर्टेड शराब लाकर बिधौली-प्रेमनगर के पीजी (PG) व हॉस्टलों में रह रहे छात्र-छात्राओं को सप्लाई करना शुरू किया।
गर्वित ने पूरे परिवार को देहरादून बुला लिया और बिधौली क्षेत्र में अपने 3 कैफे भी शुरू कर लिए।
2. वॉट्सऐप ग्रुप से बनाया डिलीवरी बॉय का मॉडल- गर्वित ने आसपास के 18 से 25 साल के युवाओं को 15 हजार रुपए महीने की सैलरी पर रखा और उन्हें टू-व्हीलर (स्कूटी) देकर शराब की होम डिलीवरी का काम सौंपा।
हॉस्टलों और पीजी में शराब का ‘रेट कार्ड’ बंटवाया जाता था। ऑर्डर लेने के लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें डिलीवरी बॉय को सुबह-शाम हाजिरी के तौर पर अपनी सेल्फी डालनी पड़ती थी। इसी ग्रुप में लोकेशन और पैसों के लेनदेन की जानकारी तय होती थी।
3. नेटवर्क का पहला पर्दाफाश और मां की गिरफ्तारी- 25 अगस्त की रात आबकारी निरीक्षक दिवाकर चौधरी की टीम ने बिधौली क्षेत्र से एक कार और 2 स्कूटी जब्त कर 2 तस्करों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में गिरफ्तार तस्करों ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट गर्वित है।
तस्करों की निशानदेही पर जब आबकारी टीम ने एक घर में छापेमारी की, तो वहां से शराब के जखीरे के साथ गर्वित की मां को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि गर्वित फरार हो गया।
4. फरार गर्वित ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत का प्रयास किया- आबकारी विभाग ने गर्वित पर आबकारी अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं 63/72 में मुकदमा दर्ज किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए गर्वित ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, लेकिन उसे कोर्ट से राहत नहीं मिली।
5. कोर्ट में सरेंडर (7 अक्टूबर 2026, बुधवार)- चारों तरफ से शिकंजा कसने के बाद बुधवार (7 अक्टूबर) को गर्वित उर्फ विक्रांत ने सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट से उसे सीधे जेल भेज दिया गया।
6. सहयोगी आदित्य की गिरफ्तारी (8 अक्टूबर 2026, गुरुवार तड़के)- गर्वित के नेटवर्क से जुड़े आदित्य कुमार के बिधौली स्थित किराए के कमरे पर आबकारी टीम ने गुरुवार तड़के छापा मारा। कमरे से करीब 10 पेटी इंपोर्टेड शराब बरामद हुई। आबकारी टीम ने शराब जब्त कर आदित्य को गिरफ्तार कर लिया।
कॉलेज छात्रों तक होम डिलीवरी से पहुंचाता था अवैध शराब
आबकारी निरीक्षक मसूरी क्षेत्र दिवाकर चौधरी ने बताया कि गर्वित उर्फ विक्रांत 2022-23 में देहरादून के बिधौली क्षेत्र में आया और वहां कैफे शुरू करने के साथ एक कॉलेज में दाखिला लिया। आरोप है कि वह हरियाणा और चंडीगढ़ से सस्ती शराब लाकर बिधौली क्षेत्र में छात्र-छात्राओं को सप्लाई करता था। इसके लिए पैम्फलेट छपवाकर शराब की रेट लिस्ट दी जाती थी और अन्य युवाओं को डिलीवरी के लिए लगाया गया था।
चौधरी के अनुसार, कुछ शराब की बोतलों पर अधिकृत होलोग्राम भी नहीं मिले हैं। आरोपी छोटे पैसों का लालच देकर युवाओं से शराब की डिलीवरी करवाता था। आबकारी विभाग ने इस नेटवर्क से जुड़े आदित्य कुमार को उसके घर पर दबिश देकर अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया है।
उन्होंने बताया कि हॉस्टल में पैम्फलेट बांटे जाते थे, जिनमें शराब की रेट लिस्ट होती थी। कैफे के खाने के साथ शराब की भी रातभर होम डिलीवरी की जाती थी। विभाग के अनुसार, आरोपी रोजाना करीब 20 से 25 पेटी इंपोर्टेड शराब बेचता था। इससे उत्तराखंड सरकार को सालाना करीब 5 से 10 करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का अनुमान है। चौधरी ने बताया कि आरोपी के परिवार के लोग भी देहरादून में कैफे संचालित कर रहे हैं।