October 7, 2026
7 oct 16
  • टोकन और खाद दोनों का इंतजार, बोले- बुवाई प्रभावित होने का डर

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : सिरसा में डीएपी के लिए फिर से किसानों में मारामारी हो रही है। आज बुधवार सुबह से ही मंडी स्थित किसान रेस्ट हाउस में किसानों की भीड़ जुटी हुई है। कभी लाइन में लगते हैं, तो कभी नीचे बैठा लिया जाता है। बावजूद इसके किसानों को न टोकन तो न खाद मिल रही है। सोमवार व मंगलवार को भी किसानों ने खाद न मिलने पर रोड जाम कर प्रदर्शन किया था।

इसे लेकर किसानों में रोष का माहौल है। किसान इस गर्मी में सुबह से लंबी कतार में लगकर टोकन का इंतजार कर रहे हैं। दूसरा, कुछ किसान सिफारिश से टोकन ले लेते हैं या जल्दी नंबर आ जाता है, तो उनमें झगड़ा हो जाता है। ऐसे में किसान विभागीय अफसरों पर ही सवाल उठाते हैं। किसानों का आरोप है कि समय पर खाद नहीं मिल रही है, जिससे बुवाई प्रभावित होगी।

किसान बोले, कुछ दिन बाद सरसों की बुवाई की जानी है। अगर खाद नहीं मिली, तो बुवाई कर पाना मुश्किल होगा। इस समय भूमि पानी से सिंचाई कर जुताई की हुई है और खाद के लिए वे दो से तीन दिन से इधर-उधर चक्कर लगा रहे हैं। किसानों ने सरकार व प्रशासन से डीएपी व यूरिया की उचित व्यवस्था की मांग रखी है। हालांकि, मार्केट कमेटी प्रशासन ने किसानों के लिए गर्मी को देखते हुए तंबू लगाया है।

स्थायी अधिकारी न होने से किसान परेशान

जिले में उप कृषि निदेशक (डीडीए) का फतेहाबाद के डीडीए को अतिरिक्त चार्ज दिया हुआ है। पिछले दो महीनों से डीडीए के पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस पद पर नियमित अधिकारी की तुरंत नियुक्ति करने की मांग को लेकर भारतीय किसान एकता (बीकेई) ने मुख्यमंत्री और डीसी के नाम ज्ञापन सौंपा है।

आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा

यदि सरकार व प्रशासन ने जल्द स्थायी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की, तो भारतीय किसान एकता को विवश होकर जनहित में संघर्ष व आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इस मौके पर बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, मनजीत सिंह भदोल, जगदेव सिंह रघुआणा, हरभेत सिंह शमशाबादपट्टी मौजूद रहे।

दो बड़े जिलों का चार्ज एक पर होने से कार्य प्रभावित

संगठन के प्रदेशाध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने मीडिया को दिए बयान में बताया, भौगोलिक क्षेत्रफल और कृषि भूमि के मामले में सिरसा प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है, जो राज्य की कुल कृषि भूमि का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। इतने बड़े जिले में पिछले लंबे समय से उप कृषि निदेशक (डीडीए) का स्थायी पद खाली पड़ा है। दो बड़े जिलों का जिम्मा एक ही अधिकारी के पास होने से सिरसा जिले के प्रशासनिक व विभागीय कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।