October 27, 2026
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  • हरियाणा में एसआईआर को लेकर अब तक 415326 फॉर्म 6 सबमिट हुए हैं

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  वोटों की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर हरियाणा में सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस निरंतर आमने-सामने हैं। कांग्रेस (एसआईआर) को लेकर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ निर धरने व प्रदर्शन रही है तो वहीं अब दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस को घेरने के लिए ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नामक राष्ट्रव्यापी अभियान का आगाज़ किया है। इसी के तहत करनाल में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा दिग्गज और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को शिरकत करेंगे। हरियाणा में भाजपा के तमाम दिग्गज नेताओं की डयूटी इस अभियान में लगाई गई है। भाजपा की इस अभियान के तहत कोशिश है कि जिला मुख्यालयों में मुख्यालयों पर पदयात्राएं एसआईआर और संबंधित मुद्दों पर अपने पक्ष में माहौल बनाए और कांग्रेस को इस मुद्दे पर बैकफुट पर लाए।

वहीं दूसरी तरफ एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 1 नवंबर को रैली का आयोजन कर रही है जिसमें हरियाणा कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेताओं की डयूटी लगाई गई है। भाजपा की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता और कांग्रेस से प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह संगठनात्मक स्तर एक दूसरे के खिलाफ प्रदर्शनों और धरनों की कमान संभाल रहे हैं।

हरियाणा में फार्म 6, 7 और 8 को लेकर आए आवेदन

हरियाणा में अब तक 445132 फॉर्म 6 सबमिट हुए हैं जिनमें से 303724 फॉर्म को स्वीकार किया गया तो वहीं कुल में से 31763 फॉर्म को रिजेक्ट कर दिया गया है। वही फॉर्म 7 की बात करें तो 104858 आवेदन आए हैं जिनमें से 92211 फार्म स्वीकृत हुए हैं तो बाकी 1420 फॉर्म रिजेक्ट कर दिए गए हैं। वही फॉर्म 8 की बात करें तो अब तक 374933 आवेदन आए हैं जिनमें से 269785 स्वीकृत हुए हैं तो बाकी 57431 रिजेक्ट हुए हैं।

जानिए फॉर्म-6 क्या है?

फॉर्म-6 वह आवेदन है जिसके जरिए कोई एलिजिबल भारतीय नागरिक मतदाता सूची में पहली बार अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करता है। अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र पूर कर चुका है और वोटर बनना चाहता है, तो वह फॉर्म-6 भरकर नए वोटर के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकता है।

फॉर्म-6 को लेकर विवाद को जानिए

फॉर्म-6 को लेकर विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के दौरान जोड़े गए एक अतिरिक्त डिक्लेरेशन के चलते है। इस फॉर्म में नए वोटर से यह जानकारी मांगी गई कि उसका नाम या उसके पेरेंट्स अथवा ग्रांड पेरेंटस का नाम पिछली बार हुई एसआईआर वाली वोटर लिस्ट में दर्ज था या नहीं। निर्वाचन आयोग का इसको लेकर कहना है कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि एसआईआर की जरूरत के लिहाज से उसके साथ एक अतिरिक्त डिक्लेरेशन जोड़ा गया।

इसके अतिरिक्त जानकारी को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में भी याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि अगर यह सिर्फ अतिरिक्त घोषणा थी, तो इसे लागू करने का कानूनी और प्रशासनिक फैसला किसने लिया और किस प्रक्रिया के तहत लिया?