September 30, 2026
30 sep 3
  • 3 यूनिटों पर नजर, सरकार और PTPS प्रशासन से मांगा जवाब

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रिंसिपल बेंच ने पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (PTPS) की यूनिट 6, 7 और 8 में सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन नियमों का उल्लंघन करने के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार और पावर स्टेशन प्रशासन सहित सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

तय सीमा से काफी अधिक हो रहा उत्सर्जन

पर्यावरण प्रेमी वरुण गुलाटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने पाया कि प्रदूषण नियंत्रण की तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद पानीपत थर्मल पावर स्टेशन की ओर से इसे अपनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया कि PTPS की 6, 7 और 8 नंबर यूनिटों से सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन निर्धारित मानक सीमा 600 mg/Nm³ से काफी अधिक हो रहा है, जो वायु गुणवत्ता और आसपास के पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है।

DSI तकनीक लगाने में ढिलाई, समय सीमा पर उठे सवाल

  • नहीं लगी DSI तकनीक: याचिका में आरोप लगाया गया है कि पॉल्यूशन कंट्रोल के लिए आवश्यक ड्राई सोर्बेंट इंजेक्शन (DSI) प्रक्रिया या तकनीक को थर्मल पावर स्टेशन ने अब तक स्थापित नहीं किया है।
  • समय सीमा में काम पूरा न होने की आशंका: हालांकि आवश्यक तकनीक को अपनाने के लिए समय सीमा 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ाई गई है, लेकिन PTPS प्रशासन ने अभी तक प्रक्रिया ही शुरू नहीं की है। ऐसे में निर्धारित समय के भीतर यह कार्य पूरा होना नामुमकिन प्रतीत होता है।

5 जनवरी 2027 को होगी अगली सुनवाई

एनजीटी ने 28 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रतिवादियों को नोटिस की तामील कराए और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले सर्विस का हलफनामा दाखिल करे। ट्रिब्यूनल ने इस मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2027 को तय की है।

देश के टॉप-10 प्रदूषित शहरों में पानीपत छठे स्थान रहा

CREA द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के आधार पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई महीने में पानीपत का औसतन PM 2.5 का स्तर 75 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय मानकों से काफी अधिक है।

देश के सबसे प्रदूषित 10 शहरों में हरियाणा के अकेले 5 शहर शामिल हैं, जिनमें गुरुग्राम (5वां स्थान – 76 PM2.5), पानीपत (6ठा स्थान – 75 PM2.5), सोनीपत (8वां स्थान – 68 PM2.5), चरखी दादरी (9वां स्थान – 67 PM2.5) और बल्लभगढ़ (10वां स्थान – 66 PM2.5) शामिल हैं।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरणविदों के अनुसार औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों की आवाजाही और स्थानीय धूल हवा में जहर घोल रहे हैं।