August 26, 2026
26 aug 4
  • रिलीज के 48 घंटे बाद हटी फिल्म

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  सोनीपत की माटी में पली-बढ़ी गीतिका विद्या ओहल्यान इन दिनों अभिनेता दिलजीत दोसांझ के साथ फिल्म ‘सतलुज’ में लीड एक्ट्रेस के तौर पर निभाए परमजीत कौर खालरा के किरदार को लेकर चर्चा में हैं।

फिल्म रिलीज होने के करीब 48 घंटे बाद ही इसके प्रदर्शन पर रोक लग गई और इसे ZEE5 से भी हटा दिया गया। गीतिका विद्या ओहल्यान का कहना है कि फिल्म लोगों के जख्मों और एक समुदाय की सच्चाई को सामने रखती है, इसलिए इसे दर्शकों तक नहीं पहुंचने देना उन्हें बेहद आहत करता है।

साल 2022 में बनी इस फिल्म के लिए उन्होंने ढाई घंटे की स्क्रिप्ट सुनने के बाद ही हामी भर दी थी। अभिनय की यह यात्रा उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता खुद अभिनेता बनना चाहते थे और हरियाणवी फिल्म ‘बहू रानी’ में काम कर चुके थे।

कॉलेज के थिएटर से शुरू हुआ यह सफर अब ‘सोनी’, ‘थप्पड़’, ‘द ब्रोकन न्यूज’ और ‘सतलुज’ जैसे प्रोजेक्ट तक पहुंच चुका है। सोनीपत में अपने घर पहुंची गीतिका ने बातचीत की।

 

सतलुज में काम करने वाली कौन हैं गीतिका विद्या

सोनीपत में जन्म हुआ

गीतिका विद्या ओहल्यान का जन्म 28 अगस्त 1991 को सोनीपत में हुआ, जबकि उनका परिवार मूल रूप से गढ़ी सांपला का रहने वाला है। उनकी शुरुआती पढ़ाई सोनीपत के हिंदू विद्यापीठ और लिटिल एंजल्स में हुई। उन्होंने 2007 में दसवीं और 2009 में 12वीं की पढ़ाई जानकीदास कपूर स्कूल से पूरी की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स किया।

आगे उन्होंने इंग्लिश लिटरेचर में मास्टर डिग्री और संस्कृत में डिप्लोमा भी किया। कॉलेज के दिनों में ही थिएटर से उनका रिश्ता जुड़ा। ‘जंगूरा’ सहित कई नाटकों में उन्होंने काम किया और करीब 300 लाइव शो किए। थिएटर ने उनकी अभिनय क्षमता को निखारा और मंच पर मिले अनुभव ने आगे फिल्मों की राह तैयार की।

2019 में ‘सोनी’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर

गीतिका विद्या ओहल्यान ने 2019 में चर्चित फिल्म ‘सोनी’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई। दमदार अभिनय के लिए उन्हें क्रिटिक्स चॉइस फॉर बेस्ट एक्ट्रेस का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला।

इसके बाद 2020 में वह तापसी पन्नू अभिनीत ‘थप्पड़’ में हरियाणा की सुनीता के किरदार में नजर आईं। 2022 में रणदीप हुड्डा के साथ ‘अब तेरा क्या होगा लवली’ में चंद्रावल की भूमिका निभाई। 2023 में ‘दिल्ली डार्क’ में साउथ अफ्रीकन अभिनेता के साथ लीड एक्ट्रेस मानसी का किरदार किया।

2024 में ‘12 बाई 12’ में मानसी की भूमिका निभाई और इसी साल वेब सीरीज ‘द ब्रोकन न्यूज’ का हिस्सा बनीं। 2026 में ‘द पंजाब-95’ नाम से चर्चा में आई फिल्म का टाइटल बाद में ‘सतलुज’ किया गया, जिसमें उन्हें लीड अभिनेत्री के तौर पर काम करने का मौका मिला।

अब जानिए विवादित फिल्म सतलुज का कनेक्शन

ढाई घंटे तक सुनी स्क्रीप्ट

गीतिका विद्या ओहल्यान के मुताबिक जब उन्हें ‘सतलुज’ की स्क्रिप्ट सुनाई गई तो उसे पूरा सुनने में करीब ढाई घंटे लगे। उनका कहना है कि कहानी सुनते ही उन्हें इसकी सच्चाई महसूस हुई और उन्होंने तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी।फिल्म में उन्हें परमजीत कौर खालरा का किरदार मिला। इस भूमिका की तैयारी में उनके अपने पारिवारिक संस्कारों और पंजाब-हरियाणा की साझा संस्कृति ने बड़ी भूमिका निभाई।

गीतिका अपनी मां और नानी के पहनावे, व्यवहार और जीवनशैली को इस किरदार से जोड़ती हैं। यही वजह रही कि बीबी परमजीत के पारंपरिक पहनावे और सिर पर चुन्नी रखने में उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई।

2022 में बनी फिल्म:गीतिका विद्या ओहल्यान के अनुसार ‘सतलुज’ का निर्माण 2022 में हुआ था। इसके बाद करीब चार वर्षों तक फिल्म सेंसर प्रक्रिया में रही। उनका दावा है कि इस दौरान फिल्म में 20 से ज्यादा कट लगाने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि सेंसर बोर्ड की ओर से राज्य और किरदारों के नाम हटाने या बदलने की बातें कही गईं।

गीतिका विद्या ओहल्यान के अनुसार कुछ बदलाव ऐसे थे, जिनसे फिल्म के किरदारों और पूरी कहानी का स्वरूप ही बदल जाता। इसी कारण कई मांगों पर टीम की सहमति नहीं बन सकी। उनका कहना है कि सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया के दौरान टीम को अलग-अलग तरह का दबाव भी महसूस हुआ। फिल्म के नाम और स्वरूप में बदलाव के बाद यह ‘सतलुज’ के नाम से सामने आई।

रिलीज के दो दिन बाद रोक

गीतिका विद्या ओहल्यान के मुताबिक फिल्म रिलीज होने के करीब 48 घंटे बाद इसके प्रदर्शन पर रोक लग गई। उनका कहना है कि फिल्म को ZEE5 से हटाए जाने का कारण भी उन्हें अब तक स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया। वह कहती हैं कि फिल्म बनाने में कलाकारों के साथ सैकड़ों लोगों की मेहनत, समय और उम्मीदें लगी होती हैं।

ऐसे में पूरी फिल्म तैयार होने के बाद दर्शकों तक नहीं पहुंच पाना बेहद दुखद है। गीतिका के मुताबिक फिल्म में एक समुदाय की सच्चाई और लोगों के जख्मों को दिखाने का प्रयास किया गया है।

फिल्म को लेकर विवाद के बावजूद उन्हें दर्शकों से काफी प्रतिक्रिया मिली। कई दर्शक उन्हें गुरमुखी में संदेश भेजते हैं। गीतिका को गुरमुखी पढ़नी नहीं आती, लेकिन वह संदेशों का अनुवाद करवाकर पढ़ती हैं और दर्शकों के प्रेम को अपनी बड़ी उपलब्धि मानती हैं।

परमजीत कौर का किरदार निभाते हुए भावुक हुईं: गीतिका विद्या ओहल्यान के लिए ‘सतलुज’ का सबसे यादगार हिस्सा परमजीत कौर के भावनात्मक दृश्य रहे। वह बताती हैं कि एक सीन में बीबी परमजीत अपने बच्चों के साथ होती हैं। एक मां के दर्द और बच्चों को लेकर भावनाओं वाला यह दृश्य करते समय वह खुद भी बेहद भावुक हो गई थीं।

शूटिंग के बाद तेज बारिश भी हुई। गीतिका के मुताबिक वह अनुभव इतना वास्तविक था कि आज भी उस सीन को देखकर उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। फिल्म में पहली बार इसी दृश्य में परमजीत को रोते हुए दिखाया गया है। उनके लिए यह अभिनय किसी किरदार को निभाने से ज्यादा व्यक्तिगत एहसास जैसा रहा।

पिता भी अभिनेता बनना चाहते थे

गीतिका विद्या ओहल्यान के अभिनय सफर की जड़ें उनके परिवार में भी हैं। उनके पिता सुरेंद्र कुमार खुद अभिनेता बनना चाहते थे और उन्होंने हरियाणवी फिल्म ‘बहू रानी’ में काम किया था। गीतिका जब महज एक साल की थीं, तभी बीमारी के कारण उनके पिता का निधन हो गया। उस समय उनके बड़े भाई कैप्टन बृजेश कुमार करीब चार साल के थे। उनकी भाभी वैज्ञानिक हैं।

इसके बाद उनकी मां विद्या ओहल्यान ने अकेले दोनों बच्चों की परवरिश की। गीतिका अपनी मां के साथ नानी कपूरी देवी और नाना दलीप सिंह को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानती हैं। उनका कहना है कि परिवार में भाई-बहन के बीच कभी अंतर नहीं किया गया और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की पूरी आजादी मिली।

उनके अनुसार उनके परिवार का सर छोटूराम से भी पुराना संबंध रहा है। उनके दादा धर्म सिंह के पिता सर छोटूराम के प्राइवेट सेक्रेटरी थे और ‘जाट गजट’ के वरिष्ठ संपादक रहे थे।

परिवार कुछ और चाहता था, थिएटर ने बदल दी दिशा

गीतिका विद्या ओहल्यान के परिवार के लोग चाहते थे कि वह पढ़ाई पूरी कर किसी दूसरे क्षेत्र में करियर बनाएं। उनकी मां भी उन्हें किरोड़ीमल कॉलेज भेजने को लेकर शुरुआत में चिंतित थीं, क्योंकि उन्हें डर था कि वहां के थिएटर माहौल से गीतिका भी अपने पिता की तरह अभिनय की दुनिया में न चली जाएं।

कॉलेज पहुंचने के बाद थिएटर ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। सैकड़ों लाइव शो करने के बाद अभिनय उनके लिए जुनून बन गया। इसी अनुभव ने उन्हें कैमरे के सामने सहज बनाया और 2019 में ‘सोनी’ से फिल्मी सफर की शुरुआत हुई।