August 26, 2026
26 aug 1
  • 6 जिलों में बूंदाबांदी आज, किसानों को सिंचाई रोकने की सलाह

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हरियाणा में मानसून की रफ्तार पर अब थोड़ा ब्रेक लगने जा रहा है। पिछले दिनों दक्षिणी-पूर्वी हिस्सों गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल और यमुनानगर में झमाझम बारिश और जलभराव के बाद अब मानसून की सक्रियता में कमी आने के आसार हैं।

चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार, राज्य में अगले 4 से 5 दिनों के दौरान मानसूनी गतिविधियां धीमी रहेंगी।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून टर्फ की अक्षय रेखा की उत्तरी सीमा इस समय जम्मू, देहरादून, शाहजहांपुर, वाराणसी, दीघा से होती हुई उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक फैली है। हालांकि, उत्तरी हरियाणा पर एक साइक्लोनिक सरकुलेशन बना हुआ है, लेकिन अब मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटियों की तरफ खिसकने की संभावना बन रही है। इसके राज्य में मानसून कमजोर पड़ेगा।

गुरुग्राम में रूक-रुक कर बारिश से हालात बिगड़े

हरियाणा के सोनीपत और गुरुग्राम में मंगलवार को बारिश हुई, जबकि रेवाड़ी में बूंदाबांदी हुई। गुरुग्राम में 2 दिन रूक-रुक कर हुई बारिश से हालत बिगड़े हुए नजर आए। दिल्ली-जयपुर हाईवे के किनारे इफको चौक की सर्विस लेन धंस गई।

सोमवार को स्कूल बसों के कई घंटे तक के जलभराव में फंसने के वीडियो और फोटो वायरल होने पर प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाया है। स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर ट्रैफिक पुलिस ने रियल-टाइम रूट अपडेट देने की तैयारी की है। इसके अलावा स्कूल रूटों पर जल निकासी को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर हरियाणा रोडवेज की अतिरिक्त बसें भी तैयार रहेंगी।

आज कहां-कहां बारिश के आसार

उत्तरी हरियाणा के यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला और एनसीआर/दक्षिण-पूर्वी हिस्सों गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश या छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं, पश्चिमी और मध्य हरियाणा के हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी में मौसम ज्यादातर शुष्क और परिवर्तनशील बना रहेगा।

किसानों के लिए एडवाइजरी जारी

वहीं मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। किसानों से कहा गया है अगले 3-4 दिनों के दौरान फसलों में सिंचाई और किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक के छिड़काव को रोक दें।

हवा में नमी और उमस का स्तर अधिक रहने के कारण फसलों (विशेषकर कपास में सफेद मक्खी/चेपा और धान में जड़ सुंडी) में कीट-रोग का प्रकोप बढ़ सकता है। खेतों का नियमित निरीक्षण करें उमस भरे मौसम के कारण पशुओं और पोल्ट्री शेड में हवा का वेंटिलेशन सही रखें ताकि उन्हें घुटन से बचाया जा सके।