August 25, 2026
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  • CMO बोले- मामला मुख्यालय भेजा

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : फरीदाबाद के बीके अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर चल रहा मेडिट्रीना ग्रुप का हार्ट सेंटर एक बार फिर बंद हो गया है। 5 महीने पहले कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के द्वारा इसका शुभारंभ किया गया था। सेंटर बंद होने के बाद वहां रखी मशीनें और अन्य सामान बाहर ले जाने की कोशिश की गई। स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली तो अधिकारियों ने पुलिस को मौके पर बुलाकर सामान ले जाने से रोक दिया। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी है।

दो ट्रकों में सामान ले जाने की कोशिश

बताया गया कि हार्ट सेंटर से चिकित्सा उपकरण और मशीनें दो ट्रकों में लादी जा रही थीं। इसकी सूचना मिलने पर वकील संजय गुप्ता मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों ट्रकों को रुकवा दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि करोड़ों रुपये की महंगी मशीनें बिना विभागीय अनुमति के अस्पताल से बाहर ले जाई जा रही थीं।

कंपनी ने 8.5 करोड़ रुपये बकाया होने का किया दावा

मेडिट्रीना की ओर से जुड़े कर्मचारी मंजीत का कहना है कि कंपनी का करीब 8.5 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। उनका दावा है कि इस संबंध में 21 जुलाई को सीएमओ, डीजीएचएस और अन्य अधिकारियों को पत्र दिया गया था। कंपनी का कहना है कि भुगतान को लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। इसी वजह से सामान को वापस मुख्य कार्यालय भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

स्वास्थ्य विभाग ने बकाया होने से किया इनकार

सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कंपनी के 8.5 करोड़ रुपये बकाया होने के दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार कोई बिल लंबित नहीं है और जो बिल आए थे, उनका भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अनुबंध के तहत अस्पताल से सामान इस तरह बाहर नहीं ले जाया जा सकता।

उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट

सीएमओ ने बताया कि मेडिट्रीना की ओर से एकतरफा तरीके से सामान निकालने की कोशिश की जा रही थी, जिसे पुलिस की मदद से रुकवा दिया गया। मामले की जानकारी मुख्यालय और उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अब वहां से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हार्ट मरीजों की बढ़ी परेशानी

बीके अस्पताल का यह हार्ट सेंटर फरीदाबाद और आसपास के मरीजों के लिए कम खर्च में इलाज का विकल्प माना जाता था। सेंटर में निजी अस्पतालों की तुलना में कम कीमत पर हृदय संबंधी उपचार और स्टेंट जैसी सुविधाएं मिलती थीं। सेंटर बंद होने से मरीजों को अब इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मेडिट्रीना के बीच भुगतान और सामान को लेकर विवाद सामने आया है।