August 17, 2026
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  • सीएम न बन पाने की खुंदक निकाली

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  गुरुग्राम में विभाजन विभीषिका स्मृति समारोह में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा पंजाबी समुदाय और स्वामी धर्मदेव पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसके विरोध में रविवार देर शाम को न्यू कॉलोनी स्थित गीता भवन में सनातन धर्म मंदिर के चेयरमैन सुरेंद्र खुल्लर की अध्यक्षता में पंजाबी समाज की एक आपात बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र खुल्लर के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर राव इंद्रजीत सिंह की कड़ी निंदा करते हुए कहा:

राव इंद्रजीत सिंह आज जिस मुकाम पर हैं, वह हमारी ही वोटों की बदौलत है। वे हर बार चुनाव के समय हाथ जोड़कर हमारे दरवाजे पर आते हैं, वोट मांगते हैं और जीतने के बाद हमें ही कोसते हैं। अगर पंजाबी समाज अपनी उंगली पीछे खींच ले, तो यहां से न तो कोई सांसद बन सकता है और न ही कोई विधायक। यह एक सरकारी कार्यक्रम था, जहां उन्हें विभाजन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे वहां अपनी राजनीतिक खीज निकालने और पंजाबियों को अपमानित करने पहुंच गए।

पंजाबी समाज के दिल को छलनी किया

उन्होंने ये भी कहा कि राव इंद्रजीत द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा ने न केवल गुरुग्राम, बल्कि पूरे देश के पंजाबी समाज के दिल को छलनी कर दिया है। उन्होंने चेताया कि अगली बार राव इंद्रजीत को पंजाबियों की एक भी वोट नहीं मिलेगी। और जो कोई भी उन्हें वोट देगा, वह खुद को पंजाबी कहलाने का हक खो देगा।

हमारी कौम ‘किंग मेकर’ रही है

सनातन धर्म मंदिर के पूर्व सेक्रेटरी अरविंद गुप्ता ने कहा कि जो व्यक्ति छह बार का सांसद रहा हो, वह किसी सार्वजनिक मंच पर इस तरह का बचकाना और बेवकूफी भरा बयान कैसे दे सकता है? राव साहब को यह याद रखना चाहिए कि हमारी कौम ‘किंग मेकर’ रही है। हम शहीदों की कौम हैं।

1947 में हम अपना सब कुछ, अपनी जमीनें, अपनी हवेलियां और अपनों को खोकर खाली हाथ इस देश में आए थे। हमने किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया, बल्कि अपनी मेहनत और खून-पसीने से खुद को दोबारा खड़ा किया। हम वो कौम हैं जो सब कुछ लुटाकर भी साम्राज्य खड़ा करना जानती है।

समाज से ऊपर उठकर वोट दिया

अरविंद उर्फ बंटू ने कहा कि हमने हमेशा अपनी कौम से ऊपर उठकर देशहित और पार्टी हित में वोट दिया। हमने राज बब्बर को न चुनकर राव इंद्रजीत को चुना, हमने मोहित ग्रोवर को छोड़कर मुकेश शर्मा को जिताया। लेकिन हमें बदले में क्या मिला? अपमान! राव साहब को अगर अपनी राजनीतिक खीज निकालनी है, तो वे भाजपा की आंतरिक बैठकों में निकालें। इस तरह खुले मंच से हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने की कोशिश न करें। जिसने भी अपना वहम निकालना है, वह निकाल ले। अब पंजाबी समाज अपने निजी हितों को छोड़कर अपनी कौम के लिए एकजुट होगा।

पूर्व सैनिक बोले-ये अहंकार है

बैठक में पूर्व सैनिक गौतम शर्मा ने इस विवाद के पीछे के एक और छिपे हुए पहलू को उजागर किया। उन्होंने दावा किया कि राव इंद्रजीत की यह टिप्पणी किसी वैचारिक मतभेद का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत अहंकार और ‘खुंदक’ का नतीजा थी।

राव इंद्रजीत को इस बात की खुंदक थी कि कार्यक्रम के आयोजक उन्हें व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण देने उनके घर क्यों नहीं गए। जबकि यह एक सरकारी कार्यक्रम था और इसका आमंत्रण सरकार की तरफ से भेजा गया था। इसी छोटी सी बात को लेकर वे इतने नाराज थे कि मंच पर आते ही जो उनके मुंह में आया, उन्होंने बोल दिया। वे इस मंच पर अपनी ‘दादागिरी’ दिखाने की कोशिश कर रहे थे।

हम जब भी राव साहब से मिलते थे, तो बड़े आदर से हाथ जोड़ते थे। अपने बच्चों को भी सिखाते थे कि ये हमारे सांसद हैं, इनका सम्मान करो। लेकिन आज हम अपने बच्चों से कहेंगे कि ऐसे दोगले नेताओं से बचकर रहें। राव इंद्रजीत ने संत धर्मदेव का अपमान करके अपनी असलियत दिखा दी है। अगर उस समय स्वामी जी ने उन्हें मंच पर ही करारा जवाब दे दिया होता, तो राव साहब की क्या इज्जत रह जाती?

फुटबॉल बनना बंद करना होगा

पंचनद स्मारक ट्रस्ट के ट्रस्टी मुनीश खुल्लर ने पंजाबी समाज को आत्ममंथन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह समय केवल गुस्सा करने का नहीं है, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत को पहचानने और एकजुट होने का है।स्वामी धर्मदेव हमारे समाज की आत्मा हैं। अब समय आ गया है कि स्वामी जी खुद अगले किसी बड़े कार्यक्रम में समाज को यह दिशा निर्देश दें कि हमें भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल या नेता का समर्थन करने से पहले सौ बार सोचना होगा।

राव इंद्रजीत का मुख्यमंत्री बनने का सपना तो अब सपना ही रह जाएगा, क्योंकि उन्होंने उस समाज से दुश्मनी मोल ले ली है जो सरकारें बनाता और गिराता है। अगर आज भी हम इस अपमान को सहकर चुप बैठ गए और खुद को नहीं झकझोरा, तो कल राव इंद्रजीत जैसे और भी नेता आएंगे और हमें अपमानित करके चले जाएंगे। हमें दूसरों के लिए सीढ़ी बनना बंद करना होगा। अगर हम एकजुट नहीं हुए, तो राजनीतिक दल हमें फुटबॉल की तरह इधर-उधर धकेलते रहेंगे और हम सिर्फ दूसरों को नेता बनाते रह जाएंगे।

अहीरवाल बनाम पंजाबी

हरियाणा की राजनीति पारंपरिक रूप से जातिगत समीकरणों पर टिकी है। राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल के सबसे बड़े नेता हैं। वहीं, गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल, पानीपत, कुरुक्षेत्र और अंबाला जैसे शहरी क्षेत्रों में पंजाबी मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में है। राव इंद्रजीत के इस बयान से भाजपा के भीतर ही अहीर-पंजाबी ध्रुवीकरण का खतरा पैदा हो गया है, जो पार्टी के ‘गैर-जाट’ सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को बिगाड़ सकता है।

भाजपा आलाकमान के लिए सिरदर्द

मनोहर लाल खट्टर खुद पंजाबी समुदाय से आते हैं और वर्तमान में केंद्र में बड़े मंत्री हैं। उनके सामने उनके ही सहयोगी मंत्री द्वारा पंजाबी समाज को निशाना बनाना भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। यदि भाजपा राव इंद्रजीत पर कार्रवाई नहीं करती है, तो पंजाबी समाज में यह संदेश जाएगा कि पार्टी उनके अपमान को मूक सहमति दे रही है। और यदि कार्रवाई करती है, तो अहीरवाल क्षेत्र में राव इंद्रजीत की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। क्या कहा था राव इंद्रजीत

गुरुग्राम में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह शुक्रवार को नाराज हो गए। उनका कहना था कि उन्हें इस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया। इसके लिए उन्होंने पंजाबी समुदाय पर निशाना साधा और कहा कि सिर्फ पंजाबी नाम के ऊपर अगर कोई इलेक्शन लड़ता है तो मदान अकेले 48 हजार वोट ले गए, लेकिन जीते नहीं। आप लोगों ने ऐसे कर दिया, जैसे कि आप ही आप लोग हैं, हमारा कोई योगदान नहीं।