August 16, 2026
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  • पानीपत डीसी से शिकायत के बाद भी समाधान नहीं

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के पानीपत जिले से सरकारी मशीनरी और फैमिली आईडी (परिवार पहचान पत्र) की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने एक परिवार के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा कर दिया है। शहर के वार्ड नंबर 11, माटा चौक क्षेत्र के रहने वाले प्रदीप कश्यप पिछले कई महीनों से अपने परिवार का राशन कार्ड दोबारा बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

कारण यह है कि नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रीड) और परिवार पहचान पत्र के डेटा में उनकी मात्र डेढ साल की बच्ची की मासिक आय 50 हजार रुपए दर्ज कर दी गई है। इस बड़ी तकनीकी खामी की वजह से सरकार की ओर से मिलने वाला राशन अचानक बंद हो गया है।

दो कमरों का कच्चा मकान, 12 हजार की कमाई पर 50 हजार की काल्पनिक आय

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: प्रदीप कश्यप अपने परिवार के साथ माता चौक पर 22 गज के छोटे से मकान में रहते हैं। इस 22 गज के मकान में कुल तीन हिस्से (पोर्शन) बने हुए हैं, जिनमें से ऊपर की मंजिलों के दो पोर्शन पूरी तरह से कच्चे यानी कड़ियों की छत वाले हैं।
  • परिवार में सदस्य: प्रदीप के परिवार में उनकी पत्नी गुड्डी (जो गृहणी हैं), 7 साल का बेटा मितांश और 1.5 (डेढ) साल की छोटी बेटी शगुन है। बेटा मितांश एक सामाजिक संस्था द्वारा संचालित स्कूल में पढ़ाई करता है, जिसकी महीने की फीस मात्र 100 रुपए है।
  • आजीविका और आय: प्रदीप चद्दरों की कटिंग (कपड़ा कटिंग) का काम करके जैसे-तैसे अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वे महीने में बमुश्किल 12 हजार से 14 हजार रुपए ही कमा पाते हैं।
  • एक ही मकान, अलग-अलग नियम: इसी 22 गज के मकान के ऊपरी हिस्से में प्रदीप का शादीशुदा भाई भी अपने परिवार के साथ रहता है। उनके भाई का राशन कार्ड पूरी तरह सक्रिय है और उन्हें नियमित रूप से सरकारी राशन मिल रहा है। वहीं, उसी मकान में रहने वाले प्रदीप का राशन कार्ड काट दिया गया है।

फरवरी से बंद हुआ राशन, पोर्टल पर दिखा अजीबोगरीब डेटा

प्रदीप के अनुसार, उनका राशन कार्ड पहले बना हुआ था, जिसके तहत मिलने वाले मुफ्त/सस्ते राशन से उनके 4 सदस्यों वाले गरीब परिवार को काफी आर्थिक सहारा मिल जाता था। लेकिन फरवरी के बाद अचानक उन्हें राशन मिलना बंद हो गया। जब राशन डिपो से राशन नहीं मिला, तो प्रदीप ने CSC सेंटर और संबंधित सरकारी विभागों में जाकर अपनी फैमिली ID की जांच कराई।

पोर्टल की जानकारी देखते ही प्रदीप के होश उड़ गए

पोर्टल पर उनकी महज डेढ साल की बेटी शगुन की आय 50 हजार रुपए प्रतिमाह (यानी 6 लाख रुपए सालाना) दिखाई गई थी। इसके अलावा, खुद प्रदीप की वार्षिक आय भी पोर्टल पर बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए दर्ज कर दी गई थी।

एक डेढ़ साल की बच्ची जो अभी ठीक से बोल और चल भी नहीं सकती, उसे सरकारी आंकड़ों में 50 हजार रुपए प्रति माह कमाने वाला दिखाकर परिवार को राशन कार्ड की पात्रता श्रेणी (1.80 लाख रुपए वार्षिक आय सीमा) से बाहर कर दिया गया।

डीसी से लेकर सीएम विंडो तक गुहार, लेकिन सिर्फ कागजी खानापूर्ति

प्रदीप कश्यप इस गंभीर गफलत को ठीक कराने के लिए पिछले कई महीनों से लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी है। प्रदीप ने इस मामले की लिखित शिकायत दो बार पानीपत के DC से की।

उन्होंने डीसी साहब को अपनी वास्तविक स्थिति और मासूम बेटी के नाम दर्ज फर्जी आय के बारे में बताया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला। जब जिला स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़ित ने मुख्यमंत्री शिकायत निवारण पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।

प्रदीप का आरोप है कि सीएम विंडो पर शिकायत जाने के बाद संबंधित अधिकारी मौके पर आए बिना या जमीनी जांच किए बिना ही टेबल पर बैठकर अपनी एकतरफा रिपोर्ट तैयार कर देते हैं और फाइल को बंद कर देते हैं।

गरीब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट

महीने की 12-14 हजार रुपए की सीमित आय में 4 लोगों का पेट पालना, बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्चा चलाना प्रदीप के लिए बेहद कठिन हो गया है। राशन कार्ड कटने के बाद से हर महीने गेहूं और अन्य राशन बाजार से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनका बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि उनकी फैमिली आईडी में सुधार किया जाए, डेढ़ साल की मासूम बेटी के नाम दर्ज गलत आय को तुरंत हटाया जाए और उनका राशन कार्ड बहाल करके उन्हें राहत प्रदान की जाए, ताकि उनके बच्चों को भूखा न सोना पड़े।