- हरियाणवी डिस्कस थ्रोअर बोलीं-4 वर्षीय बेटा सबसे बड़ा मोटिवेटर, ट्रेनिंग में कहता है-मां वेरी गुड
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :
मेरा सबसे बड़ा सपोर्टर और मोटिवेटर 4 साल का बेटा रुद्र है। ट्रेनिंग सेशन में मेरे अच्छे थ्रो पर कोच तो ‘हां-हां, ठीक है’ कहते हैं। जबकि बेटा बोलता है- ‘हां मम्मी, बहुत अच्छे, वेरी गुड’। बस यही शब्द मेरे लिए सबसे बड़ा मोटिवेशन बनते हैं। ये कहना है कि स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमन का। सीमा ने तीसरे थ्रो में 58.65 मीटर दूर चक्का फेंक मेडल जीता।गुरुवार देर रात स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में इस इवेंट में जमैका की सामंथा हॉल ने गोल्ड जबकि कनाडा की जूलिया टंक्स ने सिल्वर जीता। सीमा के इस मेडल के साथ भारत के 17 मेडल और टेली में 10वें स्थान हो गया। सीमा का यहां तक सफर आसान नहीं रहा। भिवानी के गांव दिनोद की रहने सीमा की शादी हो गई। प्रेग्नेंसी की वजह से दो सीजन बाहर बैठना पड़ा था। फिर बेटे रुद्र के जन्म के बाद दोबारा मैदान में लौटने की ठानी। पति रविंद्र की कोचिंग में शानदार कमबैक किया। रविंद्र खुद नेशनल लेवल के डिस्कस थ्रोअर हैं।
सीमा ने तीसरे प्रयास में पाई सफलता
डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमन के सामने फाइनल में कड़ी चुनौती थी। फाइनल में उन्हें 6 थ्रो मिले, लेकिन इनमें से 4 थ्रो फाउल रहे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में सीमा ने 57.32 मीटर का थ्रो कर तीसरा स्थान हासिल किया।
इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने 58.65 मीटर का शानदार थ्रो किया, जो आखिरी तक उनके लिए ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाला साबित हुआ। बाद के तीनों थ्रो फाउल रहे, लेकिन कोई भी खिलाड़ी उनके बेस्ट थ्रो को पीछे नहीं छोड़ सका।
बंसीलाल यूनिवर्सिटी की PHD स्कॉलर
हरियाणा के भिवानी में दिनोद गांव की रहने वाली 27 साल सीमा न केवल एक बेहतरीन एथलीट हैं, बल्कि भिवानी की चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी भी कर रही हैं। पढ़ाई और खेल के बीच तालमेल बिठाने के साथ-साथ वह मां की भी जिम्मेदारी निभा रही हैं। 2022 में उनके बेटे रुद्र का जन्म हुआ था।
3 साल का बेटा, 2 सीजन रहीं ग्राउंड से बाहर
बेटे के जन्म की वजह से सीमा को दो सीजन बाहर बैठना पड़ा था। मगर, रुद्र के जन्म के सिर्फ 11 महीने बाद ही सीमा ने कॉम्पिटिटिव ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। अब उनके कोच पति रविंदर हैं। सीमा के लिए वापसी बिल्कुल भी आसान नहीं थी। प्रेग्नेंसी के बाद अपनी ताकत और तकनीक को फिर से हासिल करने के लिए उन्हें काफी स्ट्रगल करना पड़ा।
पति ने निभाई कोच की भूमिका
सीमा कालीरमन की सफलता में उनके पति रविंदर का सबसे बड़ा योगदान रहा। रविंदर नेशनल लेवल के डिस्कस थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं। हालांकि चोट के कारण उनका खेल करियर आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को एक सफल खिलाड़ी बनाने का फैसला किया। कोरोना महामारी के दौरान रविंदर की सलाह पर ही सीमा ने स्पोर्ट्स साइंस में पीएचडी शुरू की। आज उनकी मेहनत और पति के सहयोग का नतीजा अब आया है।
नेशनल इंटर स्टेट मीट में गोल्ड जीतकर पेश की थी दावेदारी
सीमा की मेहनत रंग लाई और उन्होंने भुवनेश्वर में हाल ही में हुई नेशनल इंटर-स्टेट मीट में 59.73 मीटर का अपना अब तक का सबसे बेहतरीन थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीता। इस थ्रो के कारण उन्होंने देश की टॉप डिस्कस थ्रोअर में अपनी जगह मजबूत की। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2026 एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई किया और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई।
इवेंट में जीत के बाद उन्होंने कहा था, ‘मैदान पर वापसी करना बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं ठीक से डिस्कस भी नहीं फेंक पा रही थी। मगर, मुझे लगता है कि मेरे पति से मिले मोटिवेशन और उनकी मेंटरिंग ने मुझे अपनी सामान्य ताकत वापस पाने और फिर उसमें और सुधार करने में मदद की।’
इससे पहले 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहीं सीमा ने 2025 साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था।