- स्टाफ की कमी का हवाला नहीं दे पाएंगे, चीफ सेक्रेटरी ने जारी किए निर्देश
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा में सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं को लटकाने वाले अफसरों पर अब नकेल कसने की तैयारी हो चुकी है। अब अधिकारी किसी भी काम या प्रोजेक्ट में देरी होने पर ‘कर्मचारियों की कमी’ (मैनपावर शॉर्टेज) का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकेंगे।
हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुछ विभागों द्वारा काम में देरी का कारण स्टाफ की कमी बताए जाने पर गंभीर चिंता जताई थी। सीएम के कड़े रुख के बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड-निगमों के प्रमुखों, कमिश्नरों और डीसी-एसडीएम को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
3 तरीकों से दूर करें स्टाफ का गैप
निर्देश में कहा कि जहां भी कर्मचारियों की कमी पाए जाए, वहां सरकारी नीतियों के अनुसार 3 तरीकों से कमी पूरी की जाए। जहां ज्यादा स्टाफ है, वहां से कम स्टाफ वाले दफ्तरों में ट्रांसफर/एडजस्टमेंट करें। आउटसोर्सिंग या स्वीकृत अनुबंधित व्यवस्था से भर्ती करके। इसके अलावा आवश्यकता अनुसार तुरंत पक्की भर्तियों की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
पर्सनल असेसमेंट करें अफसर: सभी विभागाध्यक्ष अपने और अपने अधीनस्थ कार्यालयों में मौजूदा कर्मचारियों की संख्या और तैनाती की खुद समीक्षा करें। जहां जरूरत से ज्यादा स्टाफ है, उनका तर्कसंगत समायोजन (Rational Redeployment) करें।
तीन तरीकों से दूर करें कमी: जहां कर्मचारियों की वास्तविक कमी है, वहां सरकार की मौजूदा नीतियों के तहत खाली पदों को भरें। इसके लिए राशनलाइजेशन, स्वीकृत माध्यमों से तैनाती (कंट्रैक्ट/आउटसोर्सिंग) और पक्की भर्तियों (Regular Recruitment) का सहारा लें।
डेडलाइन से समझौता नहीं: स्पष्ट कर दिया गया है कि कर्मचारियों का न होना काम टालने की वजह नहीं बनेगा। हर विभाग एडवांस में अपनी मैनपावर जरूरत का आकलन करे और समय सीमा के भीतर काम पूरा करे।