June 29, 2026
29 june 3
  • हरियाणा के 6 जिलों में घटेगा वाटर रिचार्ज आज MoU

यमुना जल बंटवारे को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच आज दिल्ली में अहम समझौता (MoU) होने जा रहा है। 32 साल पहले हुए 1994 के यमुना जल समझौते को अब जमीन पर लागू किया जाएगा। समझौते के तहत राजस्थान को उसके हिस्से का पूरा पानी देने की व्यवस्था होगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हरियाणा के छह जिलों में भूजल रिचार्ज प्रभावित हो सकता है। राजस्थान को समझौते के अनुसार 33,379 क्यूसेक पानी मिलेगा, लेकिन यह पानी केवल जुलाई से अक्टूबर के बीच उपलब्ध रहेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक यमुना में क्षमता से अधिक पानी सिर्फ 25 से 30 दिन ही आता है, इसलिए राजस्थान को पूरे चार महीने नियमित पानी मिलना मुश्किल होगा।

हरियाणा के इन 6 जिलों पर असर

यमुना का अतिरिक्त पानी राजस्थान भेजे जाने से यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल में भूजल रिचार्ज कम होने की आशंका है। मानसून के दौरान जो अतिरिक्त पानी इन क्षेत्रों में जमीन के भीतर जाता था, वह अब राजस्थान की ओर मोड़ा जाएगा।

3900 करोड़ की पाइपलाइन परियोजना

राजस्थान तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 300 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी। पाइपलाइन हथिनीकुंड से शुरू होकर राजस्थान तक जाएगी। परियोजना पर करीब 3900 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जमीन अधिग्रहण, पाइपलाइन निर्माण और निगरानी की जिम्मेदारी दोनों राज्यों के बीच तय होगी। पाइपलाइन के रखरखाव और ऑपरेशन का खर्च भी समझौते में स्पष्ट किया जाएगा।

1994 के समझौते में किसे कितना पानी मिला था?

यमुना जल समझौते के तहत पानी का बंटवारा इस प्रकार तय हुआ था कि हरियाणा को 40.6%, उत्तर प्रदेश को 35.1%, राजस्थान को 10.4%, दिल्ली को 6.3% और हिमाचल प्रदेश को 1.7% यमुना का पानी दिया जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राजस्थान को पानी देने से पहले हरियाणा को पंजाब से अपने हिस्से का पूरा पानी सुनिश्चित करना चाहिए। वहीं, कुछ नेताओं ने 1994 के समझौते का पहले भी विरोध किया था और अब भी इस फैसले पर आपत्ति जता रहे हैं।

लंबे समय से चल रही मांग

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन लंबे समय से यमुना जल उपलब्ध कराने की मांग उठाते रहे हैं। क्षेत्र में भूजल के अत्यधिक दोहन और जल स्रोतों के सीमित होने के कारण बाहरी जल स्रोतों पर निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में यमुना जल परियोजना को स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

रिटायर्ड सिंचाई विभाग के अधिकारी और यमुना अभियान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त पानी राजस्थान भेजने से हरियाणा के छह जिलों में वाटर रिचार्ज कम होगा। उनका कहना है कि हरियाणा पहले से ही पानी की कमी झेल रहा है, इसलिए इस पानी का उपयोग राज्य के दक्षिणी हिस्सों में भी किया जा सकता था।