October 31, 2026
31 oct 12
  • मां बोलीं- पहले डर के कारण मैच नहीं देखना चाहती थी

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  जींद की बेटी मनीषा भनवाला ने कजाकिस्तान में चल रही सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। 59 किलोग्राम भार वर्ग के मुकाबले में मनीषा ने अमेरिकी पहलवान एलिबेग एजिलाबेथ नेट्‌ट को 8-6 से हराकर विश्व चैंपियन का खिताब अपने नाम किया।

मुकाबले के दौरान एक समय मनीषा पीछे चल रही थीं, लेकिन आखिरी समय में उन्होंने ऐसा दांव लगाया कि अमेरिकी पहलवान को शिकस्त देकर जीत हासिल कर ली।

मां बोलीं- पहले डर लग रहा था, बेटे

मनीषा की जीत के बाद परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। गांव सिवाह में उनकी उपलब्धि पर दिवाली से पहले ही जश्न मनाया जा रहा है। मां मीना भनवाला ने बेटी का मुकाबला देखने के दौरान हुए अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि डर के कारण वह पहले मैच नहीं देखना चाहती थीं, लेकिन बेटे के हौसला देने पर उन्होंने मुकाबला देखा।

बोलीं- बेटी की जीत पर आंखों में आंसू आ गए

मनीषा की मां मीना भनवाला ने बताया कि मैच से पहले उन्हें काफी घबराहट हो रही थी। उन्होंने बेटे से पूछा कि क्या मनीषा का मैच हो गया है। बेटे ने बताया कि मुकाबला अभी होना है। जब बेटे ने उन्हें मैच देखने के लिए कहा तो उन्होंने डर के कारण मना कर दिया। बाद में बेटे के समझाने पर वह मुकाबला देखने बैठीं।

मीना ने कहा कि शुरुआत में अमेरिकी पहलवान बढ़त बनाए हुए थी, जिससे उन्हें चिंता होने लगी। बेटे ने पहले ही कहा था कि बेबे, अपनी टांग बचाकर रखना, यह टांगों में घुसेगी। हालांकि, आखिरी मौके पर मनीषा ने दांव लगाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। बेटी की जीत देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए।

उन्होंने कहा कि यह केवल मनीषा की नहीं, बल्कि पूरे परिवार, गांव, जिले, प्रदेश और देश की जीत है। उनकी इच्छा है कि बेटी ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीते। उन्हें उम्मीद है कि ओलंपिक की तैयारी में सरकार की ओर से भी पूरा सहयोग मिलेगा।

भाई रिंकू से प्रेरित होकर शुरू की कुश्ती

मनीषा ने अपने भाई रिंकू भनवाला से प्रेरित होकर खेलों में कदम रखा था। रिंकू कबड्डी खिलाड़ी हैं। मनीषा ने वर्ष 2015 में खेल स्कूल निडानी से कुश्ती का अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर से ही उन्होंने मेहनत और लगन के साथ प्रशिक्षण लिया। लगातार अभ्यास के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

मनीषा फिलहाल रोहतक में जूनियर कोच के पद पर कार्यरत हैं और छोटू राम अखाड़े में अभ्यास करती हैं। वह सेफ गेम्स में पदक जीत चुकी हैं और विश्व रैंकिंग की खिलाड़ी हैं। उनके भाई रिंकू ने कहा कि मनीषा ने कठिन परिस्थितियों में भी विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। उनकी जीत बताती है कि मजबूत इरादों और हौसले के साथ मंजिल हासिल की जा सकती है।

चार बार एशियन चैंपियन भी रह चुकी मनीषा

मनीषा वर्ष 2022 से 2025 तक लगातार चार बार सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं। अब विश्व चैंपियनशिप में अमेरिकी पहलवान को हराकर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी सफलता जोड़ ली है।

मनीषा ने अपनी जीत का श्रेय परिवार, कोच और समर्थकों को दिया। उन्होंने कहा कि पिता का एक सपना उन्होंने पूरा कर दिया है। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतकर पिता के दूसरे सपने को पूरा करना है।

4 साल पहले हुई थी पिता की मौत

मनीषा के पिता सुरेश भनवाला का वर्ष 2022 में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। उस समय मनीषा एक कार्यक्रम में शामिल होने गई हुई थीं। वहीं उन्हें पिता के निधन की सूचना मिली। इस मुश्किल दौर के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कुश्ती जारी रखी। परिवार के लिए उनकी यह उपलब्धि पिता के सपने से भी जुड़ी है। उनकी भाभी को भी खेल कोटे से आयकर विभाग में नौकरी मिली है।

घर आने पर पसंद का खाना बनाता है परिवार

परिजनों के अनुसार, मनीषा को खाने में कढ़ी-चावल, टिंडी घी यानी मक्खन और दही-लस्सी पसंद हैं। भाभी के हाथ की बनी चटनी उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। जब भी वह घर आती हैं तो परिवार उनकी पसंद का खाना बनाने की कोशिश करता है। विश्व चैंपियन बनने के बाद अब परिवार के लिए उनकी यह जीत खुशियों का खास मौका बन गई है।