- बारिश ने बढ़ाई परेशानी, चढूनी बोले- जल्द हटेगी रोक
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : कुरुक्षेत्र में धान की सरकारी खरीद शुरू होने के साथ ही किसानों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। अब एक जिले का किसान दूसरे जिले की मंडी में अपना धान नहीं तुलवा पाएगा। इस पाबंदी को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) चढ़ूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने सरकार को घेरा है। उन्होंने इस पाबंदी को तुरंत हटाने की मांग की।
चढ़ूनी ने कहा कि इस मुद्दे पर आज उच्च अधिकारियों से बात हुई है। अधिकारियों ने इसे जल्द ठीक करने की बात कही है। अगर व्यवस्था ठीक नहीं होती तो किसान दोबारा अपनी समस्या बता सकते हैं। धान की खरीद पहले ही काफी लेट हो चुकी है। ऐसे में किसानों को दूसरे जिले की मंडी में भी फसल बेचने का विकल्प नहीं मिलेगा तो उनकी परेशानी और बढ़ेगी।
खरीद आज से, बारिश ने बढ़ाई चिंता
जिले में धान की सरकारी खरीद आज से शुरू हो रही है। हालांकि 26 सितंबर से 17 प्रतिशत नमी वाले धान के गेट पास कटने शुरू हो गए थे। अब बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश से धान में नमी बढ़ने की आशंका है और 17 प्रतिशत नमी की शर्त के कारण किसानों को फसल बेचने में दिक्कत आ सकती है।
चढ़ूनी ने कहा कि सरकार को बारिश और मंडियों में जमा धान की स्थिति को देखते हुए पहले से इंतजाम करने चाहिए थे। आरोप लगाया कि खरीद शुरू होने में देरी के कारण मंडियों में धान पड़ा है और बारिश के कारण उसका नुकसान हो रहा है।
केंद्र की खरीद का इंतजार
चढ़ूनी ने कहा कि अभी तक केंद्र सरकार की खरीद भी शुरू नहीं हुई है। मंडियों में बड़ी मात्रा में धान पड़ा है। बारिश के कारण खुले में पड़ा धान खराब हो रहा है। सरकार को राइस मिलरों से बात कर धान वहां रखवाना चाहिए था। खरीद एजेंसियों को भी अपने गोदामों और स्टोरेज की व्यवस्था पहले से करनी चाहिए थी।
जितना धान तुल चुका है, उसका बड़ा हिस्सा अभी भी बाहर पड़ा है। अगर यह धान खराब होता है तो इसका नुकसान किसान के साथ-साथ देश को होगा। सरकारी व्यवस्था की कमी के कारण अनाज खराब हो रहा है। यह किसी व्यक्ति का निजी अनाज नहीं, बल्कि देश की संपत्ति है।
जिम्मेदारी तय क्यों नहीं करती सरकार
चढ़ूनी ने कहा कि धान को समय पर नहीं संभालने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरकार को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आगे इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। कार्रवाई नहीं होने से ऐसी व्यवस्था में सुधार कैसे होगा। पोर्टल 30 जुलाई को बंद हो गया था और अब तक उसे क्लियर नहीं किया गया।