September 17, 2026
17 sep 17
  • इंटरस्टेट आवाजाही और पशु मेलों पर प्रतिबंध, प्रतिदिन 4 बजे समीक्षा बैठक

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हरियाणा में लंपी स्किन डिजीज (LSD) का प्रकोप एक बार फिर तेजी से पैर पसार रहा है। राज्य में अब तक कुल 7,577 गायें इस संक्रामक बीमारी की चपेट में आ चुकी हैं, जबकि 70 गायों की मौत हो चुकी है। हाल ही में कुरुक्षेत्र जिले से लिए गए सैंपल में लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (LUVAS), हिसार की शुरुआती जांच में लंपी वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद पशुपालन विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी करते हुए दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कुल संक्रमितों में से 6,135 गायें शहरी व ग्रामीण इलाकों में और 1442 गायें गौशालाओं में बीमार पाई गई हैं। बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए विभाग ने अंतरराज्यीय पशु आवाजाही और पशु मेलों पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए हैं। इससे पहले वर्ष 2022 में लंपी से प्रदेश में 2,937 पशुओं (2,929 गाय और 8 भैंस) की जान जा चुकी है।

सीमाओं पर सख्ती: संक्रमित पशुओं की इंटरस्टेट क्रॉसिंग रोकने के लिए जिला प्रशासन की मदद से बॉर्डर सील और पशुओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है।

आइसोलेशन व क्वारंटाइन: नए पशुओं को झुंड में मिलाने से पहले 15 दिन क्वारंटाइन करना अनिवार्य होगा। बीमारी के लक्षण दिखने पर पशुओं को तुरंत स्वस्थ मवेशियों से अलग रखा जाए।

मच्छर-मक्खियों पर नियंत्रण: वायरस को फैलने से रोकने के लिए शेड में मच्छरदानी, कीटनाशक स्प्रे और फॉगिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

डिसइंफेक्शन व फुटबाथ: गौशालाओं और डेयरियों के प्रवेश द्वार पर सोडियम हाइपोक्लोराइट (2-3 प्रतिशत) या फॉर्मेलिन (1प्रतिशत) के घोल का फुटबाथ इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

संक्रमित शवों का निस्तारण: बीमारी से मृत पशुओं के शवों को गहरे गड्ढे में दबाकर सही तरीके से निस्तारित किया जाएगा।

हर रोज शाम 4 बजे होगी समीक्षा

पशुपालन एवं डेयरी विभाग, हरियाणा के महानिदेशक कार्यालय द्वारा जारी आदेशों में सभी जिला उप-निदेशकों को रोजाना शाम 4 बजे तक पोर्टल पर LSD रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसके बाद हर रोज शाम को हालात की समीक्षा की जाएगी।

अब समझिए क्या है लंपी डिजीज

शरीर पर उभर आती हैं गांठें : लंपी स्किन डिजीज में पशु के शरीर पर गोल-गोल गांठें या उभरे हुए घाव दिखाई देना प्रमुख लक्षण है। इसके साथ तेज बुखार, आंखों और नाक से पानी या स्राव आना, भूख कम होना, कमजोरी, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु को तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए और वेटरनरी डॉक्टर को सूचना देनी चाहिए। इससे संक्रमित पशु के संपर्क में आने वाले दूसरे पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा कम किया जा सकता है।