August 9, 2026
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  • बोलीं- मन से साध्वी और कर्म से राइडर बनना चाहती हूं,  झज्जर में जलाभिषेक करेगी

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  झज्जर के बहु गांव की रहने वाली 12 वर्षीय दीक्षा इन दिनों अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा में है। करीब एक साल पहले उज्जैन में दीक्षा ने हरिद्वार से गंगाजल लाकर गांव पहुंचने का संकल्प लिया था। संकल्प पूरा करने के लिए वह 27 जुलाई को हरिद्वार पहुंची और 3 अगस्त की शाम करीब 4 बजे वहां से कांवड़ यात्रा शुरू की।

दीक्षा मिनी बाइक पर पीछे भगवान शिव की प्रतिमा लेकर चल रही है। उसके साथ कार में पिता और चाचा भी चल रहे हैं। ये रोजाना 20 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। 11 अगस्त को वह गांव के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेगी। दीक्षा सातवीं कक्षा में पढ़ती है। उसका कहना है कि वह मन से साध्वी और कर्म से राइडर बनना चाहती है।

पिता पहले ला चुके डाक कांवड़, अब बेटी की बारी

दीक्षा के पिता टिंकू खेतीबाड़ी करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। दीक्षा उनकी इकलौती बेटी है। टिंकू खुद पहले डाक कांवड़ ला चुके हैं। टिंकू का कहना है कि वह अपनी बेटी को आगे चलकर एक अच्छी राइडर बनते देखना चाहते हैं। उनके मुताबिक, बेटी में कुछ अलग करने का जज्बा है और वह अपनी मेहनत से अलग पहचान बनाएगी।

उज्जैन में लिया संकल्प, एक साल बाद किया पूरा

टिंकू के मुताबिक, दीक्षा करीब एक साल पहले उज्जैन गई थी। वहां उसके मन में कांवड़ लाने की इच्छा हुई। उसने उसी समय तय कर लिया था कि अगली बार हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव पहुंचेगी। इस बार दीक्षा ने कांवड़ लाने की बात कही तो उन्होंने उसकी बात मान ली। दीक्षा अपनी बाइक पर निकली है, जबकि वह और भाई रणधीर स्विफ्ट गाड़ी से उसके पीछे आ रहे हैं।

दीक्षा की कांवड़ यात्रा में सबसे खास उसका बाइक से सफर करना है। उसे बाइक चलाने का शौक है। कांवड़, धार्मिक वेशभूषा और उज्जैन से खरीदी गई माला, कपड़े व कुंडल पहनकर जब वह बाइक पर निकलती है तो रास्ते में लोगों का ध्यान उसकी ओर खींचता है।

पिता की दो इच्छाएं- बेटी राइडर बने, गांव का पुराना नाम लौटे

टिंकू के मुताबिक, बेटी को लेकर उनकी दो बड़ी इच्छाएं हैं। पहली, दीक्षा आगे चलकर एक अच्छी राइडर बने और अपनी पहचान बनाए। दूसरी, उनके गांव को दोबारा उसके पुराने नाम भवनगढ़ से पहचान मिले। उनका कहना है कि गांव का पुराना नाम भवनगढ़ था, जबकि वर्तमान में गांव को बहु के नाम से जाना जाता है।

दीक्षा बोली- गाय को मिले राष्ट्र पशु का दर्जा

दीक्षा ने कहा कि वह चाहती है कि गाय को राष्ट्र पशु का दर्जा मिले। वह नॉनवेज नहीं खाती और उसका कहना है कि सभी जीव-जंतुओं के प्रति दया का भाव होना चाहिए। उसे पशु-पक्षियों से खास लगाव है। वह लोगों से जीवों के प्रति दया रखने और शाकाहारी बनने की अपील करती है।

आस्था के साथ राइडिंग का जुनून

टिंकू के मुताबिक, दीक्षा की यह कांवड़ यात्रा उसके एक साल पुराने संकल्प और राइडर बनने के जुनून से जुड़ी है। 12 साल की उम्र में बाइक पर कांवड़ उठाकर और आधा रास्ता पैदल तय करने के कारण उसकी यात्रा चर्चा में है। उसकी कांवड़ यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं।