- श्रावण से पहले 1 लाख श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन,20 दिन की वेटिंग
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा में ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय ने श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पूजा बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी गई है। मंदिर प्रबंधन ने दावा किया कि यह हरियाणा का पहला मंदिर है, जहां श्रद्धालु निशुल्क ऑनलाइन पूजा बुक कर सकते हैं। यह व्यवस्था उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर शुरू की गई है।
खास बात यह है कि आज गुरुवार को श्रावण मास शुरू होने से पहले ही इस सुविधा के जरिए 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालु ऑनलाइन पूजा के लिए बुकिंग करा चुके हैं। अब बुकिंग के लिए 20 दिन से ज्यादा वेटिंग शुरू होने लगी है। इसमें हरियाणा-पंजाब के श्रद्धालु शामिल है। हालांकि पूजा के दौरान दूसरे श्रद्धालु जल चढ़ा सकेंगे।
अब तक श्रद्धालुओं को पूजा के लिए मंदिर पहुंचकर घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार पूरा दिन लाइन में निकल जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु अपनी तय बुकिंग के अनुसार करीब दो घंटे पहले मंदिर पहुंचेंगे और बिना लंबी लाइन में लगे पूजा कर सकेंगे।
मंदिर की साइट पर पूरी जानकारी
संगमेश्वर सेवा दल के प्रधान भूषण गौतम ने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने से श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। बुकिंग के समय ही उन्हें पूजा से जुड़ी पूरी जानकारी दी जा रही है। मंदिर प्रबंधन की ओर से सेवादल का एक सदस्य श्रद्धालु के साथ रहेगा और पूजा सामग्री उपलब्ध कराने में भी मदद करेगा।
चार तरह की पूजा की ऑनलाइन बुकिंग
मंदिर में फिलहाल बेलपत्र पूजा, श्रृंगार पूजा, रुद्राभिषेक पूजा और अखंड रुद्राभिषेक पूजा की ऑनलाइन बुकिंग की जा रही है। इन सभी पूजाओं को मंदिर के पुजारी ही संपन्न कराएंगे। वहीं कालसर्प दोष पूजा केवल नागपंचमी के दिन होगी, जिसकी बुकिंग मंदिर के पंडित खुद करते हैं।
श्रावण में 20 दिन की वेटिंग
श्रावण मास शुरू होते ही श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ गई है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार पूजा के लिए अभी करीब 20 दिन की वेटिंग चल रही है। लगातार बुकिंग होने के कारण आने वाले दिनों में इंतजार और बढ़ सकता है। मंदिर में हर त्रयोदशी को होने वाले भंडारे की बुकिंग वर्ष 2027 तक पूरी हो चुकी है।
पंचकूला में सुविधा, लेकिन व्यवस्था अलग
हरियाणा में इससे पहले पंचकूला स्थित श्री माता मनसा देवी मंदिर में श्राइन बोर्ड की ओर से ऑनलाइन दर्शन टोकन, चोला बुकिंग और ऑनलाइन दान की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि संगमेश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्था इससे अलग है। यहां निशुल्क ऑनलाइन बुकिंग केवल पूजा कराने के लिए शुरू की गई है।
12 ज्योतिर्लिंगों की होगी स्थापना
मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि 13 अगस्त को 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की जाएगी। मंदिर परिसर में स्थापित किए जाने वाले सभी ज्योतिर्लिंग देश के मूल 12 ज्योतिर्लिंगों के स्पर्श (टच) से जुड़े हुए हैं और उनका आकार और स्वरूप भी मूल ज्योतिर्लिंगों के समान होगा।
इस तरह होगी बुकिंग
पूजा बुक करने के लिए सबसे पहले www.sangameshwardham.com पर लॉगिन करें। उसके बाद ऊपर Menu पर क्लिक करें। मेनू के बाद Home पर क्लिक करें। Home पर क्लिक करते ही “श्रावण मास प्रतिदिन अभिषेक और पूजा के लिए यहां क्लिक करें” का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करते ही एक डिजिटल फॉर्म ओपन होगा। जिसमें श्रद्धालु को अपना नाम, मोबाइल नंबर, पता और किस पंडित से पूजा करवानी है उस पंडित का नाम चूज करने का ऑप्शन मिलेगा।
यानी अपनी मनपसंद के पंडित से भी पूजा करवा सकते हैं। लेकिन इनमें से ब्राह्मण का नाम वही सिलेक्ट होगा जो मंदिर की लिस्ट में है। इसके बाद अपनी पूजा की बुकिंग तिथि और समय सिलेक्ट करने के बाद इसे सेव करने पर रजिस्ट्रेशन होते ही हरा बटन से सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद फाइनल बुकिंग हो जाएगी और मोबाइल पर सारी अपडेट मिलती रहेंगी। QR को स्कैन करके भी मंदिर की वेवसाइट पर आ सकते हैं।
दीमक के ढेर में मिला था दिव्य शिवलिंग, लिपटा मिला नाग
संगमेश्वर महादेव धाम से जुड़ी मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में महात्मा गणेश गिरि को झाड़ियों और दीमक के ढेर के बीच एक दिव्य शिवलिंग मिला था। जब उन्होंने शिवलिंग को दूसरे स्थान पर स्थापित करने का प्रयास किया तो उसका अंतिम छोर नहीं मिला। उसी रात भगवान शिव ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर शिवलिंग को उसी स्थान पर स्थापित करने और मंदिर निर्माण का निर्देश दिया।
अगले दिन शिवलिंग पर एक काला नाग लिपटा मिला, जिसके बाद वहीं मंदिर बनाने का संकल्प लिया गया। बाद में वर्ष 1946 में महंत गिरधर नारायण पुरी और बाबा शरण पुरी के प्रयासों से वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया। यह धाम सरस्वती और अरुणा नदी के संगम स्थल पर स्थित है और धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
कालसर्प दोष से मुक्ति की मान्यता
संगमेश्वर महादेव धाम से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले यहां पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा की थी। कहा जाता है कि उन्होंने बालू की मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया था। यही शिवलिंग आगे चलकर संगमेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मान्यता है कि कालसर्प दोष से प्रभावित श्रद्धालु यहां पार्थेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे उन्हें इस दोष से मुक्ति मिलती है।
दूध से मक्खन न निकलने की मान्यता
मंदिर से जुड़ी कई अनोखी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में दूध को बिलोकर उससे मक्खन नहीं निकाला जा सकता। यदि कोई ऐसा प्रयास करता है तो दूध खराब हो जाता है। इसके अलावा परिसर में चारपाई या खाट का उपयोग भी नहीं किया जाता। एक अन्य मान्यता के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का बुखार लंबे समय तक ठीक न हो रहा हो तो मंदिर के भंडारे में लगातार दो दिन भोजन करने से उसे राहत मिलती है।
महानिर्वाणी अखाड़ा संभालता है मंदिर की व्यवस्था
संगमेश्वर महादेव मंदिर का संचालन और व्यवस्थाएं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी द्वारा संभाली जाती हैं। अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी और मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी इसके व्यवस्थापक हैं। श्रावण मास के दौरान प्रत्येक सोमवार को भगवान संगमेश्वर महादेव का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस अवसर पर फल, फूल, अनाज, ड्राई फ्रूट, रंग-गुलाल और विभिन्न प्रकार की सब्जियों से शिवलिंग और मंदिर को सजाया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।