May 27, 2026
27 may 13
  • कहा-बैकडोर एंट्री नहीं थी नियुक्ति

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 20 साल से पढ़ा रहे गेस्ट टीचर और लेक्चरर के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया है कि 2014 की रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत इन शिक्षकों की सेवाएं नियमित की जाएं और उन्हें नौकरी व रिटायरमेंट से जुड़े सभी लाभ दिए जाएं।

कोर्ट ने कहा, गेस्ट टीचरों की नियुक्ति कोई बैकडोर एंट्री नहीं थी। भर्ती विज्ञापन, मेरिट और चयन प्रक्रिया के बाद हुई थी। सरकार ने खुद माना कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी। 20 साल तक काम लेने के बाद उन्हें सिर्फ अस्थायी नहीं कहा जा सकता।

हाई कोर्ट ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं, उन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर बाद में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

2 महीने के भीतर सेवाएं नियमित करे सरकार

यह मामला सुखविंदर सिंह और अन्य गेस्ट टीचरों की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। सरकार को 2 महीने के भीतर सेवाएं नियमित करने और सभी लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में करीब 12,700 गेस्ट टीचर पिछले लगभग 20 साल से सेवाएं दे रहे हैं। संगठन ने फैसले को “सम्मान की जीत” बताया है।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी।

सरकार ने ये रखीं दलील

राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है।

कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से “स्पेयर” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं।