- पैसों के अभाव से जूझ रहे, श्रीलंका जाने के लिए स्पोंसर की जरूरत
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : फतेहाबाद के गांव दैयड़ निवासी व्हीलचेयर क्रिकेटर राजेश वर्मा का श्रीलंका में होने वाली इंटरनेशनल चैंपियनशिप में चयन हुआ है। मगर पैसों के अभाव में राजेश का श्रीलंका में खेलने का सपना अधर में लटक गया है। राजेश को अभी तक कोई स्पोंसर नहीं मिल पाया है। आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं होने के कारण राजेश को स्पोंसर की जरूरत है।
ऐसे में राजेश ने अब मदद की गुहार लगाई है ताकि वह श्रीलंका जाकर खेल सके।
26 से 28 मई तक कोलंबो में होगी चैंपियनशिप
श्रीलंका के कोलंबो में इंडिया-श्रीलंका इंटरनेशनल व्हीलचेयर क्रिकेट टी-20 चैंपियनशिप करवाई जाएगी। इसमें भाग लेने वाली इंडियन व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में राजेश वर्मा का भी चयन हुआ है। इस चैंपियनशिप की होस्ट कंट्री श्रीलंका ही है। यह टूर्नामेंट 26 से 28 मई तक होगा। 25 को चेन्नई एयरपोर्ट से टीम श्रीलंका के लिए रवाना होगी।
9 मई को आया लेटर
राजेश बताते हैं कि उनके पास व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से 9 मई को लेटर आया था। तब से वह स्पोंसर ढूंढ रहे हैं। अभी एसोसिएशन के जरिए ही सभी खिलाड़ी खेलने जाएंगे। इसलिए हर खिलाड़ी को स्पोंसर की जरूरत है। मगर अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है। आज (मंगलवार) शाम तक टिकट रिजर्व होनी है।
25 मई को चेन्नई एयरपोर्ट पर रिपोर्टिंग करनी है। वहां से पूरी टीम श्रीलंका जाएगी। श्रीलंका में 26, 27 व 28 मई को मैच खेले जाएंगे।
स्टेट और नेशनल लेवल पर कई बार खेल चुके
राजेश वर्मा चंडीगढ़ और हरियाणा के दिव्यांग क्रिकेटरों में स्टार क्रिकेटर के तौर पर पहचान रखते हैं। फतेहाबाद के राजस्थान बॉर्डर के पास भट्टू ब्लॉक स्थित गांव दैयड़ निवासी राजेश बेहद साधारण परिवार से हैं। 27 वर्षीय राजेश अब तक 43 से ज्यादा मैच खेल चुके हैं। जिनमें 78 से ज्यादा विकेट ले चुके हैं। 13 रन देकर 5 विकेट उनका हाई स्कोर है।
राजेश वर्मा फरवरी 2025 में ग्वालियर में हुए देशभर की 18स्टेट की टीमों के नेशनल टूर्नामेंट में टॉप थ्री गेंदबाजों में स्थान पाया था।
जानिए… दिव्यांग क्रिकेटर राजेश का सफर
डेढ़ साल के थे, तब पोलियो हो गया राजेश वर्मा के परिवार में माता और वह दो भाई हैं। पिता का फरवरी 2025 में निधन हो गया था। अब परिवार में उनके साथ मां कमला देवी, भाई जगदीश हैं। भाई जगदीश टैक्सी चलाते हैं। राजेश बताते हैं कि जब उनकी उम्र मात्र डेढ़ साल थी, तब उनको पोलियो हो गया था। वह दोनों पैरों से चल नहीं पाते हैं।
मुश्किलें झेली, लेकिन हौसला बनाए रखा राजेश कहते हैं कि दिव्यांगता के कारण बचपन में काफी मुश्किलें झेलनी पड़ी। सामान्य बच्चों की तरह न खेल पाते थे और न ही अन्य दिनचर्या पूरी कर पाते थे। मगर परिवार का पूरा साथ व सहयोग रहा। पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है।
गाड़ी मोडिफाई करवाने गए तो मिली प्रेरणा राजेश अपने क्रिकेट खेलने की शुरुआत के बारे में बताते हैं कि साल 2020 में वह गाड़ी मोडिफाई करवाने के लिए सिरसा जिले के डिंग मंडी में गए थे। वहां उन्हें सुखवंत मिले, जिन्होंने उसे व्हीलचेयर क्रिकेट के बारे में बताया। वहीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने उसी समय से खेलना शुरू किया। पहले गांव में ही प्रेक्टिस शुरू की। इसके बाद पहले जिला, फिर स्टेट और उसके बाद नेशनल लेवल पर खेलना शुरू किया।