- नगर निगम चुनाव पर अगली सुनवाई तक होईकोर्ट की रोक
हरियाणा : ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के तीन बड़े नगर निगमों पंचकूला, अंबाला और सोनीपत में चुनाव से पहले हुई वार्डबंदी को चैलेंज करने वाली कांग्रेस की याचिका पर वीरवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट में सरकार की ओर से शपथ पत्र दिया गया। जिसमें अब सोमवार को अगली सुनवाई होगी, तब तक चुनाव घोषणा पर कोर्ट ने रोक लगा दी है।
पंचकूला में नगर निगम चुनावों से पहले वार्डबंदी को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस पार्टी ने सरकार द्वारा तय की गई नई वार्डबंदी के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में म्यूनिसिपल एक्ट-1994 के नियमों की अनदेखी करने और मनमाने ढंग से वार्डों के सीमांकन का गंभीर आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस रविंद्र रावल के अनुसार उन्हाेंने अपनी याचिका में कानूनी प्रावधानों को आधार बनाते हुए कहा कि नियमों के मुताबिक, किसी भी निगम क्षेत्र में वार्डबंदी में बदलाव तभी किया जा सकता है, जब निगम की सीमाओं में कोई नया क्षेत्र जोड़ा गया हो या घटाया गया हो। कांग्रेस का दावा है कि पंचकूला के मामले में ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ, फिर भी वार्डबंदी को बदल दिया गया।
एससी वार्ड कम करने का आरोप
कांग्रेस ने प्रशासन पर एससी की आबादी बढ़ने के बावजूद नई वार्डबंदी में एक एससी वार्ड कम करने का आरोप लगाया है। बिना वार्डों की संख्या घटाए या बढ़ाए एससी का एक वार्ड कम किए जाने का मुद्दा भी कांग्रेस ने अपनी याचिका में उठाया है।
कांग्रेस की आपत्तियों के आधार
भौगोलिक अखंडता
वैधानिक प्रावधानों के अनुसार वार्ड भौगोलिक रूप से सघन और आपस में सटे होने चाहिए, लेकिन वर्तमान वार्डबंदी में इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
जनसंख्या का मानक
नियमों के तहत 10 प्रतिशत के अंतर के साथ जनसंख्या लगभग समान होनी चाहिए, लेकिन याचिका के अनुसार इसे भी दरकिनार कर दिया गया।
प्रशासनिक सीमाएं
प्रशासनिक सीमाओं और सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखे बिना ‘तर्कहीन और खंडित’ वार्ड बनाए गए हैं।
एससी वार्ड कम करने का आरोप
कांग्रेस ने प्रशासन पर एससी की आबादी बढ़ने के बावजूद नई वार्डबंदी में एक एससी वार्ड कम करने का आरोप लगाया है। बिना वार्डों की संख्या घटाए या बढ़ाए एससी का एक वार्ड कम किए जाने का मुद्दा भी कांग्रेस ने अपनी याचिका में उठाया है।
कांग्रेस की आपत्तियों के आधार
भौगोलिक अखंडता
वैधानिक प्रावधानों के अनुसार वार्ड भौगोलिक रूप से सघन और आपस में सटे होने चाहिए, लेकिन वर्तमान वार्डबंदी में इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
जनसंख्या का मानक
नियमों के तहत 10 प्रतिशत के अंतर के साथ जनसंख्या लगभग समान होनी चाहिए, लेकिन याचिका के अनुसार इसे भी दरकिनार कर दिया गया।
प्रशासनिक सीमाएं
प्रशासनिक सीमाओं और सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखे बिना ‘तर्कहीन और खंडित’ वार्ड बनाए गए हैं।