- 1 मिनट में बताती है दर्जनों फलों-सब्जियों और देशों के नाम
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : रेवाड़ी जिले के गांव गोठड़ा पाली निवासी 3 वर्षीय परीशा ने कम उम्र में अपनी याददाश्त और लगातार अभ्यास के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है। परीशा को एक मिनट में अलग-अलग श्रेणियों के दर्जनों नाम बताने में महारत हासिल है। उसने 5 अक्टूबर को रिकॉर्ड के लिए आवेदन किया था और 7 अक्टूबर को क्वालीफाई किया। इसके बाद 19 अक्टूबर को प्रमाणपत्र परिवार के पास पहुंचा। अब परिवार बेटी को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए उसे योग और भगवद्गीता के श्लोकों का अभ्यास कराया जा रहा है।
गांव गोठड़ा पाली निवासी परीशा के पिता प्रदीप गोठड़ा प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं, जबकि मां सोनम यादव गृहिणी हैं। सोनम ने बताया कि बेटी की याद रखने और चीजों को पहचानने की क्षमता को देखते हुए उन्होंने करीब डेढ साल की उम्र से ही उसे अभ्यास कराना शुरू कर दिया था। उस समय परीशा ठीक से बोल नहीं पाती थी, लेकिन इशारों के माध्यम से शरीर के 8 से 10 अंगों के नाम बता देती थी। बेटी की इस क्षमता को देखते हुए उन्होंने उसे अलग-अलग चीजों के नाम पहचानने और याद रखने का अभ्यास कराना जारी रखा।
एक मिनट में कई श्रेणियों के दर्जनों नाम बताती है
परिजनों के अनुसार, परीशा एक मिनट में 35 सब्जियों, 35 फलों और 35 देशों के झंडों के नाम बता देती है। इसके अलावा वह 35 जानवरों, 40 पक्षियों, 25 रेप्टाइल यानी रेंगने वाले जीवों और 35 समुद्री जीवों के नाम भी बताती है। इतनी कम उम्र में अलग-अलग श्रेणियों के नाम याद रखना और उन्हें निर्धारित समय में बताना उसकें लगातार अभ्यास का हिस्सा है। परिवार का कहना है कि परीशा को इन नामों का अभ्यास खेल-खेल में कराया गया। मां सोनम उसके साथ नियमित रूप से बैठती थीं और उसे अलग-अलग वस्तुओं, जीव-जंतुओं तथा देशों के झंडों की पहचान कराती थीं। धीरे-धीरे परीशा ने इन नामों को याद करना और बिना देर किए बताना शुरू कर दिया। परिवार ने इसी क्षमता को रिकॉर्ड के लिए आवेदन का आधार बनाया।
संस्कृत में गायत्री मंत्रों का भी करती है उच्चारण
परीशा केवल फल, सब्जियों और जीव-जंतुओं के नाम ही नहीं बताती, बल्कि परिजनों के मुताबिक वह पांच गायत्री मंत्रों का संस्कृत में सही उच्चारण भी कर लेती है। परिवार अब उसकी इस क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए योग और भगवद्गीता के श्लोकों का अभ्यास करा रहा है। उनका प्रयास है कि परीशा आगे भी नई चीजें सीखे और अपनी प्रतिभा के दम पर एक और उपलब्धि हासिल करे।
डेढ़ साल की उम्र से मां ने शुरू कराया था अभ्यास
परीशा की मां सोनम यादव ने बताया कि शुरुआत में बेटी बोल नहीं पाती थी, लेकिन इशारों में शरीर के कई अंगों की पहचान कर लेती थी। इसके बाद उन्होंने उसे लगातार अभ्यास कराना शुरू किया। परिवार ने उसकी रुचि को देखते हुए अलग-अलग श्रेणियों के नाम याद कराने पर ध्यान दिया। इसी अभ्यास के बाद परीशा ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए आवेदन किया और क्वालीफाई किया।
परिवार का दावा- इस फील्ड में प्रदेश की पहली बच्ची है परीशा
परिवार का दावा है कि परीशा इस तरह का रिकॉर्ड बनाने वाली पहली बच्ची है। उनके अनुसार, प्रदेश में भी इस फील्ड में इससे पहले किसी बच्चे ने अपना नाम दर्ज नहीं कराया है। वहीं रेवाड़ी जिले में यह सम्मान हासिल करने वाली पहली बच्ची है। आज से किसी व्यक्ति का रेवाड़ी जिले में इंडिया ऑफ बुक में नाम दर्ज नही हुआ है।
अब बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए प्रयास
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र मिलने के बाद परिवार का उत्साह बढ़ा है। अब वे परीशा को योग और गीता के श्लोक सिखाकर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए तैयार कर रहे हैं। परिजनों का दावा है कि इस तरह की उपलब्धि हासिल करने वाली परीशा पहली बच्ची है और प्रदेश में भी इससे पहले किसी ने इस श्रेणी में नाम दर्ज नहीं कराया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।