हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : बदलते मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव तथा अनियमित वर्षा के बीच प्याज की फसल में रोगों की निगरानी करना किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (NHRDF) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, करनाल में खरीफ मौसम की प्याज की फसल में ट्विस्टर रोग (Twister Disease) देखा गया है। इस संबंध में केंद्र प्रमुख डॉ. आलोक कुमार सिंह एवं पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने किसानों को रोग के लक्षणों की समय पर पहचान करने तथा वैज्ञानिक प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी है। हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिम भारत के प्याज उत्पादक राज्यों के किसानों को भी आगामी फसल के दौरान सतर्क रहने और फसल की शुरुआती अवस्था से ही नियमित निगरानी करने की आवश्यकता है। मौसम में लगातार बदलाव, तापमान एवं आर्द्रता में उतार-चढ़ाव और अनियमित वर्षा फसलों में विभिन्न रोगों के विकास एवं प्रसार को प्रभावित कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों के स्वास्थ्य और रोग प्रबंधन को प्रभावित कर रहे हैं
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के स्वरूप में होने वाले बदलाव भी फसलों के स्वास्थ्य और रोग प्रबंधन को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में किसानों के लिए आवश्यक है कि वे मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलों की नियमित निगरानी करें और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उचित कदम उठाएँ। ट्विस्टर रोग से प्रभावित प्याज के पौधों में पत्तियाँ मुड़ने, ऐंठने, असामान्य रूप से लंबी होने तथा गर्दन का असामान्य विकास (Neck Elongation) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। रोग का प्रकोप बढ़ने पर पौधों की सामान्य वृद्धि प्रभावित हो सकती है, जिससे बल्ब के विकास, गुणवत्ता एवं उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे प्याज की फसल का नियमित निरीक्षण करें तथा रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रभावित पौधों को चिह्नित करें। शुरुआती अवस्था में रोगग्रस्त पौधों को सावधानीपूर्वक निकालकर खेत से बाहर उचित तरीके से नष्ट करें और रोपाई के लिए केवल स्वस्थ एवं सामान्य वृद्धि वाले पौधों का चयन करें।
खेत में जलभराव न होने दें तथा सिंचाई मिट्टी की नमी और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार करें
खेत में जलभराव न होने दें तथा सिंचाई मिट्टी की नमी और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार करें। प्याज की फसल में थ्रिप्स सहित अन्य कीटों की नियमित निगरानी करें और कीटों का प्रकोप पाए जाने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपयुक्त एवं पंजीकृत कीटनाशक का प्रयोग करें। बिना उचित निदान के फफूंदनाशी या अन्य रसायनों का अनावश्यक छिड़काव न करें। केंद्र प्रमुख डॉ. आलोक कुमार सिंह एवं पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने किसानों से अपील की है कि वे बदलते मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्याज की फसल की नियमित निगरानी करें और ट्विस्टर रोग के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञों से परामर्श लें। हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिम भारत के प्याज उत्पादक राज्यों के किसान आगामी मौसम में रोपाई से लेकर फसल की बढ़वार तक विशेष सतर्कता बरतें। रोग की पहचान, प्रबंधन एवं अन्य तकनीकी जानकारी के लिए किसान डॉ. मनोज कुमार पांडेय, पादप रोग विशेषज्ञ (Plant Pathologist), RRS, NHRDF, करनाल, हरियाणा से संपर्क कर सकते हैं।