October 15, 2026
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  • गलत जानकारी पर दूर होगी पोस्टिंग

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग में नॉन-टीचिंग कैडर के ऑनलाइन तबादले जल्द होंगे। इसके लिए सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन सभी को ह्यूमैन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS ) पोर्टल पर 31 अक्टूबर से पहले डाटा अपडेट करना होगा।

मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी, 2026 को लेकर शिक्षा निदेशालय ने सभी DDO, DEO को लेटर जारी किया है। इस पॉलिसी में कुछ सख्त नियम भी भी बनाए गए है। यदि किसी कर्मचारी ने गलत जानकारी दी तो उसे ट्रांसफर ड्राइव से बाहर कर राज्य में किसी भी दूरदराज क्षेत्र में भेज दिया जाएगा। कोई भी कर्मचारी ट्रांसफर के लिए राजनीतिक या व्यक्तिगत सिफारिश नहीं करवा सकेगा।

इसके अलावा जिनकी रिटायरमेंट में 1 साल से कम समय बचा है, उन्हें उनकी लिखित सहमति के बिना ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। महिला कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान रखा गया है। प्रदेश में इस कैडर के 8,596 स्वीकृत है, जिस पर केवल 5,168 कर्मचारी ही वर्किंग हैं।

इससे पहले सरकार ने टीचिंग स्टाफ के लिए भी मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी, 2026 जारी की थी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। फिलहाल, कोर्ट की इस पर स्टे है और अगली सुनवाई 11 नवंबर 2026 को होगी।

कर्मचारियों को 31 अक्टूबर तक कौन से काम करने होंगे?

  • सबसे पहले सर्विस वेरिफिकेशन कराना होगा: सभी कर्मचारियों को अपनी सेवा का सत्यापन (Service Verification) 30 अक्टूबर 2026 तक पूरा करवाकर HRMS पोर्टल पर अपडेट कराना अनिवार्य किया गया है।
  • रिकॉर्ड में सुधार कराने का मिलेगा वक्त : कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड में यदि किसी भी प्रकार की गलती, अधूरी जानकारी या विसंगति पाई जाती है, तो उसे सुधारकर 31 अक्टूबर 2026 तक सही डेटा दर्ज कराना होगा।
  • आपत्तियों का निपटारा कराना होगा : यदि किसी कर्मचारी ने अपने सर्विस रिकॉर्ड से जुड़ी कोई आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई है, तो नियमों के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक उसका त्वरित समाधान (Redressal) करना अनिवार्य होगा।
  • DDO की होगी संपूर्ण जिम्मेदारी: शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि HRMS में किए गए किसी भी बदलाव या संशोधन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित DDO की होगी। यदि बिना वेरिफिकेशन के कोई गलत या अनधिकृत प्रविष्टि पाई जाती है, तो जिम्मेदार DDO के खिलाफ सर्विस रूल्स के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कर्मचारियों को किन श्रेणियों में बांटा गया?

  • प्रोटेक्टेड कैटेगरी : रिटायरमेंट में 18 महीने से कम समय वाले कर्मचारी, कैंसर/डायलिसिस/बायपास/ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मरीज, 70% से अधिक दिव्यांग कर्मचारी और 10 साल तक के बच्चे वाली विधवा महिलाओं को ‘सुरक्षित श्रेणी’ में रखा गया है। इन्हें बिना सहमति के सरप्लस के नाम पर नहीं हटाया जाएगा और इन्हें पूरे 120 मेरिट प्वाइंट्स दिए जाएंगे।
  • सरप्लस कैटेगरी : यदि किसी ऑफिस या यूनिट में प्रशासनिक जरूरत से ज्यादा कर्मचारी तैनात हैं, तो सबसे लंबे समय से टिके कर्मचारी को सरप्लस माना जाएगा और उन्हें ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया में भाग लेना अनिवार्य होगा।

क्या पॉलिसी में कड़े प्रावधान भी रखे गए हैं?

  • गलत जानकारी दी तो दूर होगा ट्रांसफर : अगर किसी कर्मचारी ने मेरिट अंक लेने के लिए झूठी या गलत जानकारी दी, तो उसे ट्रांसफर ड्राइव से बाहर कर राज्य में किसी भी दूरदराज क्षेत्र में भेज दिया जाएगा।
  • सिफारिश कराने पर बैन: कोई भी कर्मचारी ट्रांसफर के लिए राजनीतिक या व्यक्तिगत सिफारिश नहीं करवा सकेगा। ऐसा करने पर इसे सेवा नियमों का उल्लंघन मानकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  • रिटायरमेंट से 1 साल पहले राहत: जिनकी रिटायरमेंट में 1 साल से कम समय बचा है, उन्हें उनकी लिखित सहमति के बिना ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।
  • महिला कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान: नीति के लागू न होने की अवधि के दौरान नवविवाहित, विधवा या तलाकशुदा महिला कर्मचारी घटना के 6 महीने के भीतर खाली पद पर प्राथमिकता के आधार पर एक बार पोस्टिंग मांग सकती हैं।

HRMS और MIS डाटा में भिन्नता पर 2 दिन का अल्टीमेटम

इन्हीं कड़े प्रावधानों को देखते हुए विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने आईटी सेल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खास निर्देश भी जारी किए है। बताया गया कि सहायक, लिपिक, उप-अधीक्षक, ड्राइवर, जूनियर लाइब्रेरीयन, लैब अटेंडेंट, आंकड़ा सहायक और स्टेनो टाइपिस्ट के स्वीकृत तथा कार्यरत पदों के आंकड़े HRMS और MIS पोर्टल पर अलग-अलग पाए गए हैं।

इसे गंभीरता से लेते हुए महानिदेशक सेकेंडरी शिक्षा कार्यालय ने SCERT गुरुग्राम, जिला शिक्षा अधिकारियों, डाइट, बाइट और खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 2 दिनों के भीतर अपने अधीनस्थ स्कूलों व कार्यालयों के स्वीकृत व कार्यरत पदों का विवरण अपडेट कर एक्सेल शीट में भिजवाना सुनिश्चित करें।

टीचिंग स्टाफ की वह ट्रांसफर पॉलिसी, जिस पर हाईकोर्ट से रोक

हरियाणा कैबिनेट की करीब चार माह पहले मीटिंग हुर्ह थी। CM नायब सैनी की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में मॉडल आनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी और टीचर्स आनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी की मंजूरी दी गई थी। सीएम ने बताया था कि ये मंजूरी हाईकोर्ट और समय समय पर आने वाली टिप्पणियों के आधार पर बनाई गई है।

हालांकि, हाईकोर्ट के जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की बेंच ने हजारी लाल और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार की वर्तमान शिक्षक ट्रांसफर ड्राइव पर रोक लगाई है। इसकी अगली सुनवाई 11 नवंबर 2026 को तय की गई है। सीएम ने इस पॉलिसी के नियम भी बताए थे।

  • दिव्यांग और सेवानिवृत्ति के करीब शिक्षकों को राहतः 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले शिक्षक संरक्षित श्रेणी में शामिल किए जाएंगे। पहले जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 12 महीने शेष रहते थे, उन्हें छूट मिलती थी। अब यह अवधि बढ़ाकर 18 महीने करने की तैयारी है। यानी सेवानिवृत्ति के अंतिम डेढ़ वर्ष में तबादले का दबाव काफी हद तक कम हो सकेगा।
  • सिंगल पेरेंट का खास लाभ मिलेगाः जो शिक्षक अकेले अपने बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, यानी सिंगल पेरेंट हैं, उन्हें 10 अतिरिक्त अंक मिलेंगे। हालांकि मेल टीचर को नाबालिग बच्चे या अविवाहित बेटियों के आधार पर कोई अतिरिक्त अंक नहीं मिलेगा।
  • विशेष श्रेणी को सबसे ज्यादा वेटेजः लेडी टीचर, विधवा, तलाकशुदा, न्यायिक रूप से अलग रह रही महिलाएं, सिंगल पेरेंट, गंभीर बीमारी से प्रभावित शिक्षक, दिव्यांग शिक्षक, दिव्यांग बच्चों के अभिभावक, सैन्य एवं अर्द्धसैनिक बलों के कर्मियों के जीवनसाथी इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं। इनमें अधिकांश श्रेणियों को 10-10 अंक देने का प्रस्ताव है। विशेष रूप से सिंगल पेरेंट शिक्षकों को अतिरिक्त राहत देने की व्यवस्था की गई है।
  • ऐसे बंटेंगे 120 अंकः कुल 120 अंकों में से अधिकतम 25 प्रतिशत अंक आयु, 25 प्रतिशत अंक कैडर अनुभव और 50 अंक विशेष परिस्थितियों के लिए निर्धारित किए हैं। यानी आधी रैंकिंग विशेष श्रेणी पर आधारित होगी, जबकि शेष अंक उम्र व अनुभव से मिलेंगे। इससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को अधिक संतुलित अवसर मिल सकेंगे।