September 11, 2026
10 sep 20
  • विवादों का भी समय पर निपटारा

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  चंडीगढ़ में किराएदारी के नए नियम गुरुवार(10 सितंबर) से लागू हो गए हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के एस्टेट डिपार्टमेंट ने यूटी चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स, 2026 नोटिफाई किए हैं। नए नियमों में किराएदारी एग्रीमेंट की ऑनलाइन जानकारी देना जरूरी किया गया है। इसके लिए एग्रीमेंट होने के 2 महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को जानकारी देनी होगी।

किराया, बिजली-पानी और मेंटेनेंस को लेकर विवाद होने पर भी रेंट अथॉरिटी में आवेदन किया जा सकेगा। नियमों में विवादों के निपटारे और अदालत के आदेशों की पालना के लिए समयसीमा भी तय की गई है। प्रशासन 3 महीने में किराएदारी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार करेगा। इससे किराएदारी से जुड़े रिकॉर्ड ऑनलाइन होंगे और विवादों का जल्द निपटारा किया जा सकेगा।

डिप्टी कमिश्नर एवं एस्टेट ऑफिसर निशांत कुमार यादव ने कहा कि नए नियमों से किराएदारी व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थिरता आएगी।

एग्रीमेंट के 2 महीने में देनी होगी ऑनलाइन जानकारी: नए नियमों के तहत किराएदारी एग्रीमेंट होने के 2 महीने के भीतर मकान मालिक और किराएदार को संयुक्त या अलग-अलग ऑनलाइन रेंट अथॉरिटी को इसकी जानकारी देनी होगी। जानकारी मिलने के 7 दिनों के भीतर रेंट अथॉरिटी की ओर से यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) जारी किया जाएगा। इसकी ई-रसीद मोबाइल नंबर या ईमेल पर भेजी जाएगी।

3 महीने में बनेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म: प्रशासन 3 महीने के भीतर किराएदारी के लिए समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करेगा। इसमें ओटीपी आधारित वेरिफिकेशन की सुविधा होगी और दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे। प्लेटफॉर्म स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध होगा। किराएदारी से जुड़े रिकॉर्ड गोपनीय रखे जाएंगे और इन्हें केवल संबंधित पक्षों और अधिकृत अधिकारियों को ही उपलब्ध कराया जाएगा।

किराया, बिजली-पानी और मेंटेनेंस विवाद भी अथॉरिटी में: किराया, बिजली, पानी या मेंटेनेंस चार्ज को लेकर विवाद होने पर रेंट अथॉरिटी में आवेदन किया जा सकेगा। फैसला लेते समय आसपास के क्षेत्र में चल रहे प्रचलित किराए को भी ध्यान में रखा जाएगा। अगर मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है तो किराएदार 2 महीने तक RTGS, NEFT या चेक के जरिए भुगतान भेज सकेगा। इसके बाद भी किराया स्वीकार नहीं करने पर किराया सीधे रेंट अथॉरिटी में जमा किया जा सकेगा।

अपील पर 60 दिन में फैसला, आदेश का 30 दिन में पालन: नए नियमों में विवादों के निपटारे की समयसीमा भी तय की गई है। नोटिस मिलने के बाद दूसरी पार्टी को 15 से 30 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। रेंट ट्रिब्यूनल को अपील मिलने के 60 दिनों के भीतर फैसला करना होगा। वहीं, रेंट कोर्ट के आदेशों का पालन 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।