September 3, 2026
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  • एक्सीडेंट- रीढ़ की हड्‌डी में फ्रैक्चर- 5 माह बेड रेस्ट

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  कभी-कभी समाज के ताने किसी के दो शब्द मनुष्य के जीवन की दिशा को बदल देते हैं। महेंद्रगढ़ के बहाला गांव की बहू डॉ. आशा के जीवन की कहानी कुछ ऐसी है। 2013 में ड्यूटी जाते समय ऑटो ने स्कूटी को टक्कर मारी। एक्सीडेंट में रीढ की हड्‌डी में फ्रैक्चर हो गया। पांच माह बेड पर रही। रीढ़ की हड्‌डी में फ्रैक्चर पर समाज और मिलने वालों ने उठने की उम्मीद छोड़ दी और परिवार पर बोझ बनने के ताने दिए तो आशा ने कुछ कर लेने की ढान ली। अब सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर तिरंगा फहराना है।

2015 अमरनाथ यात्रा पर जाने का मौका मिला। वापसी में वहां तैनात एक फौजी ने पूछा कि दर्शन किए या बीच से ही आ गई। जब आशा ने कहा कि दर्शन करके आई तो फौजी ने कहा कि ऐसी दौड़ से तो माउंट एवरेस्ट चढ़ जाओगी। तभी आशा ने पर्वतारोही बनने की ढान ली। घर आने के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सर्च किया तो दो कोर्स करने का पता चला। अब इसके लिए अपने परिवार विशेषकर पति को मनाना था।

2016 में पूरा किया कोर्स

2016 में आशा ने बेस कोर्स के लिए अप्लाई किया। बैच में 73 लड़कियां थी। बेस कोर्स में प्रदर्शन और रिक्वेस्ट पर उसी साल नवंबर में एडवांस में एडमिशन मिल गया। 2017 में पहले टू पर चीन गई। पहली बार में कैंप 3 पर पहुंची तो खराब मौसम के कारण यात्रा दो बार बीच में रोकनी पड़ी। तीसरी बार परमिशन मिली, खराब मौसम से फिर यात्रा रोकने को कहा गया। आशा ने वापस आने से मना कर दिया। कैंप तीन से निकलकर डेढ जोन में जाने पर एक शव पड़ा मिला। शव उसी अफ्रीकी युवक था तो, जो बेस कैप में आशा के साथ था।

खराब मौसम और परिचित का शव मिलने से मन में वापसी लौटने की सोची। तभी विचार आया, परिवार को खराब मौसम का हवाला दे दूंगा, पर क्या विश्वास कर पाएंगे। इसी विचार के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया। रास्ते में 17 पर्वतारोहियों की डेडबॉडी पड़ी मिली। करीब 40 दिन चले अभियान में 22 मई 2017 को सुबह 9:05 पर पहले प्रयास में माउंट एवरेस्ट फतेह कर बेटी- बचाओ, बेटी- पढ़ाओ का झंडा गाड दिया।

परिवार को दिया समय

आशा ने बताया कि इसके बाद उसने परिवार को समय देने का निर्णय लिया। अंग्रेजी से पीचएडी की। 2022 में एयर पिस्टल का कोर्स शुरू किया। महिला मास्टर 2023 से 2025 के बीच जिला, स्टेट और राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार जीते। अब समय मिला तो 2017 में देखा गया विश्व की पांच चोटियों को फतेह करने के सपने पर आगे बढ़ी। 21 अगस्त को सुबह 9:07 बजे 5,642 मीटर ऊंचे माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर पहुंचकर सफलता हासिल की। अभियान जारी रखते हुए 29 अगस्त को सुबह 5:31 बजे 5,895 मीटर ऊंचे माउंट किलिमंजारो की उहुरू पीक पर तिरंगा फहराया।

मानसिक मजबूती आवश्यक

डॉ. आशा ने कहा कि मानसिक मजबूती और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो उम्र मायने नहीं रखती। उम्र के साथ खान-पान का ध्यान रखने और दैनिक एक्सरसाइज से खुद को पूरी तरह से फीट रखा जा सकता है। मैं भी यही करती हूं। उन्होंने कहा कि इसमें उनके पति और परिवार का खास योगदान रहा है। जब भी वह उदास होती थी, परिवार मजबूती से उसके साथ खड़ा रहा। ताने देनें वालों से खुद लड़े और हर कदम में मेरा हौसला बढ़ाया। यदि परिवार साथ नहीं देता तो शायद रीढ़ की हड्‌डी में फ्रैक्टर के बाद यहां तक पहुंच पाना संभव नहीं था।

राजस्थान की बेटी- हरियाणा की बहू

डॉ. आशा का जन्म राजस्थान के झुझूनू के गांव घरड़ाना खुर्द में हुई। 1988 में महेंद्रगढ़ के गांव बहाला निवासी अजय सिंह के साथ शादी हुई। राजस्थान में नर्सिंग ऑफिसर रही आशा के पति हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर, बेटी डॉक्टर और बेटा इंजीनियर हैं।

रास्ते में थी कई चुनौतियां

डॉ. आशा ने बताया कि रीढ की हड्‌डी में फ्रैक्चर आने के बाद उम्र के उस पड़ाव पर यह रास्ता चुनना आसान नहीं था। पहले परिवार को मनाना और फिर फंड जुटाना सबसे बड़ी चुनौती थी। जब परिवार की सहमति मिलने के बाद हमने अपनी सेविंग के साथ रिश्तेदारों- परिचितों से उधार मांगने के साथ कलाउंट फैंडिंग से पैसे जुटाने का प्रयास किया।

21 और 29 अगस्त को पाई सफलता

रेवाड़ी पुलिस लाइन निवासी डॉ. आशा ने 21 अगस्त को सुबह 9:07 बजे 5,642 मीटर ऊंचे माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर पहुंचकर सफलता हासिल की। अभियान जारी रखते हुए 29 अगस्त को सुबह 5:31 बजे 5,895 मीटर ऊंचे माउंट किलिमंजारो की उहुरू पीक पर तिरंगा फहराया।

डॉ. आशा ने 2017 में 39 वर्ष की उम्र में अपने पहले प्रयास में चीन/तिब्बत की ओर से माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था।

वह पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने अपनी अपनी सफलता का श्रेय परिवार और शुभचितंकों को दिया। उनकी यह उपलब्धि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और मेहनत से उम्र के किसी भी पड़ाव पर अपने सपने पूरा करने का संदेश है।