September 1, 2026
1 sep 21
  • कानून और अनुशासन सिखाने की जरूरत

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  गुरुग्राम में अपनी सख्त बुलडोजर कार्रवाई और अतिक्रमण के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन के लिए सुर्खियों में रहने वाले नगर निगम के डीटीपी एवं नोडल अधिकारी आर.एस. बाठ पर राज्य सूचना आयोग ने 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। RTI के तहत जानकारी देने में लापरवाही बरतने पर आयोग ने ये आदेश दिया है।

इतना ही नहीं, राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय सुरा ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सिफारिश की है कि आर.एस. बाठ को हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) या किसी अन्य उपयुक्त संस्थान में भेजकर ‘कर्तव्य निर्वहन और कानून’ की स्पेशल ट्रेनिंग दिलाई जाए।

हालांकि, अपनी बुलडोजर कार्रवाई के दौरान आर.एस. बाठ को कुछ लोगों का विरोध झेलना पड़ता है, तो कुछ लोग उनके काम की सराहना करते हैं। कई जगह लोगों से उनकी बहस होती है, तो कहीं पर उनका फूल मालाओं से स्वागत होता है। वे कहते हैं कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना मेरी ड्यूटी है।

अब जानिए…क्या था मामला

यह मामला 4 जनवरी 2022 को दायर की गई एक RTI अर्जी से जुड़ा है। RTI कार्यकर्ता भारत जैन ने नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग से संबंधित विभिन्न नियमों, नीतियों और दिशा-निर्देशों की जानकारी मांगी थी। विशेष रूप से वर्ष 2007 से 2016 के बीच स्वीकृत ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए आंशिक कब्जा या पजेशन सर्टिफिकेशन जारी करने से संबंधित नियमों की प्वाइंटवाइज जानकारी मांगी गई थी।

आयोग ने 13 जुलाई 2023 को ही तत्कालीन जन सूचना अधिकारी को दो सप्ताह में पूरी जानकारी देने का आदेश दिया था, लेकिन विभाग की ओर से लगातार देरी की जाती रही।

डीटीपी का तर्क- “सब कुछ वेबसाइट पर है”

राज्य लोक सूचना अधिकारी के तौर पर आर.एस. बाठ ने आयोग के सामने दलील दी थी कि संबंधित अधिनियम, नियम, नीतियां और हरियाणा भवन संहिता विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, आवेदक को रिकॉर्ड का निरीक्षण करने का अवसर भी दिया गया था।

आयोग ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा:

अगर किसी नागरिक ने विशिष्ट जानकारी मांगी है और वह लोक प्राधिकरण के पास उपलब्ध है, तो जनसूचना अधिकारी को प्रत्येक बिंदु पर कानून के अनुसार स्पष्ट जवाब देना होगा। केवल वेबसाइट या सामान्य नियमों का हवाला देकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।

आयोग की तल्ख टिप्पणी-सरकारी निर्देश सलाह नहीं होते…

सुनवाई के दौरान सामने आया कि आर.एस. बाठ को आयोग द्वारा कई अवसर दिए गए, लेकिन वे बार-बार सुनवाई से नदारद रहे। 30 जुलाई 2026 के आदेश के बाद भी उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभाग के निदेशक को निर्देश देने पड़े थे।

इस पर नाराजगी जताते हुए राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय सुरा ने कहा कि वैधानिक प्राधिकरण के निर्देश कोई ‘सलाह’ नहीं होते, बल्कि उनका पालन करना सरकारी पद से जुड़ा अनिवार्य दायित्व है। बाठ के इस रवैये को देखते हुए ही उन पर जुर्माना लगाया गया है, जिसकी वसूली विभाग को 3 महीने के भीतर सुनिश्चित करनी होगी।

ट्रेनिंग में ये सिखाने की सिफारिश

प्रशिक्षण में कानून के अनुसार ड्यूटी, वैधानिक अथॉर्टी के निर्देशों का पालन, इंस्टीट्यूशनल डिसीपलिन, रिकॉर्ड मैनेजमेंट और जनसेवा से अपेक्षित जवाबदेही जैसे विषय शामिल करने को कहा गया है।

वहीं, आवेदक भारत जैन को संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण करने का अंतिम अवसर दिया गया है। संबंधित जन सूचना अधिकारियों को सात दिन के भीतर निरीक्षण की तारीख, समय और स्थान की सूचना देनी होगी तथा 45 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी।

आरएस बाठ बोले- जानकरी नहीं

इस बारे में डीटीपी और नोडल अधिकारी आरएस बाठ का कहना है कि अभी उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। चेक करने के बाद ही बताया जा सकेगा कि राज्य सूचना आयोग के आदेश में क्या है।