गुरबाज सिंह की करीब चार महीने पहले एक अन्य अस्पताल में स्पाइन सर्जरी हुई थी। इसके बावजूद उनकी परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती गई। उन्हें खड़े होने और चलने में दिक्कत होने लगी। दोनों पैरों में कमजोरी के साथ फुट ड्रॉप की समस्या भी विकसित हो गई। इसके बाद उन्हें एडवांस जांच और इलाज के लिए मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग लाया गया।
जांच में सामने आई रीढ़ की गंभीर समस्या
अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान स्पाइनल कॉर्ड पर लगातार दबाव, रीढ़ की अस्थिरता और बढ़ती हुई स्पाइनल डिफॉर्मिटी सामने आई। डॉक्टरों के मुताबिक, स्थिति को देखते हुए दोबारा जटिल सर्जरी कर रीढ़ को स्थिर करना जरूरी था।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के स्पाइन सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. जितेश मंघवानी ने बताया कि पिछली सर्जरी के बाद युवक में न्यूरोलॉजिकल लक्षण लगातार बढ़ रहे थे। सर्जरी का उद्देश्य स्पाइनल कॉर्ड और नसों पर पड़ रहे दबाव को कम करना, रीढ़ की विकृति को ठीक करना और उसकी स्थिरता बहाल करना था।
कई स्तरों पर की गई कॉम्प्लेक्स रिवीजन सर्जरी
मरीज की कॉम्प्लेक्स रिवीजन स्पाइन सर्जरी की गई। इसमें स्पाइनल कॉर्ड और नसों का डिकम्प्रेशन, स्पाइनल डिफॉर्मिटी का करेक्शन तथा रीढ़ की अलाइनमेंट और स्थिरता बहाल करने के लिए स्पाइनल फिक्सेशन एवं फ्यूजन को आगे तक बढ़ाना शामिल था।
सर्जरी के बाद मरीज की लगातार निगरानी की गई और नियमित न्यूरोलॉजिकल असेसमेंट कराया गया। इसके साथ ही रिहैबिलिटेशन और फिजियोथेरेपी पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
पैरों की ताकत में धीरे-धीरे हुआ सुधार
डॉ. मंघवानी के अनुसार, सर्जरी के बाद मरीज की न्यूरोलॉजिकल रिकवरी धीरे-धीरे हुई। दोनों पैरों की ताकत और मूवमेंट में सुधार आया तथा फुट ड्रॉप की समस्या में भी राहत मिली। रिहैबिलिटेशन के बाद मरीज ने सहारे से चलना शुरू किया।
संतोषजनक रिकवरी और स्थिति स्थिर होने के बाद युवक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उसे नियमित फिजियोथेरेपी, सही पोस्चर बनाए रखने, गतिविधियों में आवश्यक बदलाव और समय-समय पर फॉलो-अप की सलाह दी गई है।
अस्पताल के अनुसार, यह मामला जटिल स्पाइनल डिसऑर्डर में समय पर विशेषज्ञ उपचार, सावधानीपूर्वक सर्जिकल प्लानिंग और व्यापक रिहैबिलिटेशन के महत्व को दर्शाता है।