- बोले- मांगें नहीं मानी तो बढ़ेगा आंदोलन
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर 5 सितंबर को प्रस्तावित चक्का जाम को लेकर शनिवार को सिरसा जिले में रोडवेज यूनियनों की बैठक हुई। बैठक नाथूसरी चौपटा बस स्टैंड पर आयोजित की गई, जिसमें करीब 13 यूनियनों के पदाधिकारी और जिलेभर से चालक, परिचालक व अन्य कर्मचारी शामिल हुए।
हालांकि बैठक में सभी यूनियनों को एक मंच पर लाने और संयुक्त मोर्चे के नाम को लेकर पूरी सहमति नहीं बन सकी। इसके बावजूद यूनियन पदाधिकारियों ने 5 और 6 सितंबर को रोडवेज बसों का चक्का जाम करने का ऐलान किया है।
सभी यूनियनों को एकजुट करने पर हुई चर्चा
बैठक का मुख्य उद्देश्य 5 सितंबर के चक्का जाम को लेकर सभी रोडवेज यूनियनों को एकजुट करना था। सिरसा की विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों ने बैठक की अध्यक्षता की और प्रदेश की अन्य यूनियनों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल होने के लिए बुलाया था।
बैठक के दौरान चक्का जाम और यूनियन मोर्चे को लेकर कुछ पदाधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद दोबारा बैठक कर सभी यूनियनों के बीच तालमेल बनाने पर चर्चा हुई। एसकेएस सहित कुछ यूनियनों के पदाधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुए। मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि अनुपस्थित यूनियनों से बातचीत कर उन्हें भी आंदोलन में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
5 और 6 सितंबर को चक्का जाम का दावा
हरियाणा रोडवेज बीसी यूनियन के स्टेट प्रधान सुभाष चौहान ने कहा कि 5 और 6 सितंबर को चक्का जाम को लेकर यूनियनों के बीच सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि शनिवार की बैठक में कई यूनियनों के पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। एसकेएस के कुछ नेताओं के बैठक में पहुंचने की बात भी उन्होंने कही और बताया कि अन्य यूनियनों से भी बातचीत जारी है।
बैठक के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार और परिवहन विभाग की ओर से मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण चक्का जाम का फैसला लिया गया है।
ये हैं रोडवेज कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
यूनियन की ओर से चालक और परिचालक का पे ग्रेड बढ़ाने, परिचालकों को तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने और जोखिम भत्ता लागू करने की मांग की जा रही है। इसके अलावा 10 साल के बकाया बोनस का भुगतान, अर्जित अवकाश की पुरानी व्यवस्था बहाल करने और विभाग में पक्की भर्ती करने की मांग भी शामिल है।
यूनियनों की मांग है कि इलेक्ट्रिक बसों को परिवहन विभाग के अंतर्गत लिया जाए। वर्कशॉप में कर्मचारियों की भर्ती करने और लंबित प्रमोशन करने की मांग भी रखी गई है।
25 जुलाई को किया था मंत्री के आवास का घेराव
इससे पहले सिरसा की रोडवेज सांझा मोर्चा यूनियन ने 25 जुलाई को कर्मचारियों की मांगों को लेकर परिवहन मंत्री अनिल विज के अंबाला स्थित आवास का घेराव किया था। इस दौरान कर्मचारियों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन और नारेबाजी की थी।
इसके बाद मंत्री ने यूनियन पदाधिकारियों को बातचीत के लिए बुलाया था। यूनियन नेताओं ने मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा था। बातचीत के दौरान मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद यूनियन ने सरकार को 3 सितंबर तक का समय दिया था।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो बढ़ेगा आंदोलन
यूनियन नेताओं का कहना है कि तय समय सीमा तक सरकार की ओर से मांगों को लेकर ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो 5 सितंबर से चक्का जाम किया जाएगा। बैठक में सभी यूनियनों को आंदोलन में शामिल करने को लेकर बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है।
फिलहाल 5 और 6 सितंबर को चक्का जाम के ऐलान के बाद रोडवेज विभाग की बस सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत से आंदोलन को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।