- अब सरकारी नौकरी की तैयारी, 10 अगस्त को गांव पहुंचेगी
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : आस्था जब संकल्प से जुड़ जाए तो कठिन से कठिन राह भी आसान लगने लगती है। इसकी मिसाल झज्जर जिले के जैतपुर गांव की बेटी प्रिया ने पेश की है। प्रिया 16 जुलाई को हरिद्वार से 51 लीटर गंगाजल की डायरी कांवड़ उठाकर पैदल रवाना हुई थीं और अब झज्जर पहुंच चुकी हैं।
उनकी इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ जुट रही है। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है- आखिर एक बेटी 51 लीटर गंगाजल लेकर इतनी लंबी पैदल यात्रा कैसे पूरी कर रही है?
प्रिया 10 अगस्त को अपने गांव जैतपुर पहुंचेंगी। गांव में उनके स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। परिजन और ग्रामीण इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रिया झज्जर शहर के शिविर में देर रात पहुंची हैं।
भोले बाबा से मांगी है मनोकामना
प्रिया ने बताया कि उन्होंने यह कांवड़ पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ उठाई है। यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उनकी आस्था और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने भगवान शिव से अपनी मनोकामना मांगी है और उन्हें पूरा भरोसा है कि भोले बाबा उनकी फरियाद जरूर सुनेंगे !
खिलाड़ी से बनीं प्रतियोगी परीक्षा की अभ्यर्थी
प्रिया पहले हाईजंप की खिलाड़ी रह चुकी हैं। खेलों में लगातार अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया। फिलहाल वह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि जिस तरह खेल में लक्ष्य हासिल करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, उसी तरह जीवन में भी संकल्प और विश्वास जरूरी है।
रास्ते भर लोगों ने बढ़ाया हौसला
हरिद्वार से झज्जर तक की यात्रा के दौरान जहां-जहां प्रिया पहुंचीं, लोग उन्हें देखने के लिए रुकते रहे। कई श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया तो कई लोगों ने उनकी कांवड़ के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। लोगों ने उनके साहस और भक्ति की जमकर सराहना की।
3 भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं प्रिया
प्रिया अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। परिवार का कहना है कि बचपन से ही उनमें मेहनत और अनुशासन की भावना रही है। अब उनकी यह कांवड़ यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
आस्था के साथ हौसले की भी मिसाल
51 लीटर गंगाजल की डायरी कांवड़ लेकर पैदल यात्रा आसान नहीं होती। लेकिन प्रिया ने साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों और मन में आस्था हो तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचा देते हैं। उनकी यात्रा अब झज्जर ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी प्रेरणा का विषय बन गई है।