August 7, 2026
7 aug 7
  • फसलें खराब होने की आशंका, हिमाचल में बारिश से बढ़ेगा जलस्तर

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  हिमाचल प्रदेश में हुई बारिश का असर एक बार फिर मारकंडा नदी पर दिखा। कल नदी का जलस्तर बढ़कर 10 हजार 786 क्यूसेक पहुंचा तो सबसे पहले कुरुक्षेत्र के शाहाबाद का कठवा गांव इसकी चपेट में आ गया। सुबह के समय गांव की मुख्य सड़क पर पानी बहने लगा और देखते ही देखते पानी खेतों में फैल गया।

इसका असर कठवा के साथ लगते तंगौर गांव तक पहुंचा, जहां धान की फसल में तक पानी पहुंच गया। खेतों में पानी भरा रहने से किसानों को फसल के नुकसान की आशंका है। शाम तक नदी का जलस्तर घट जरूर गया, लेकिन खेतों में भरे पानी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अब पानी उतरने लगा है।

अभी नहीं टला खतरा, अलर्ट

गेज रीडर कश्मीरा के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर जिले में अगले 2 दिन बारिश का अलर्ट जारी है। वहां बूंदाबांदी भी शुरू हो चुकी है। यदि जिले में कहीं भी तेज बारिश होती है तो उसका पानी सीधे मारकंडा नदी में आएगा। ऐसे में आने वाले 48 घंटे में नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है।

मारकंडा में अभी 1300 क्यूसेक पानी

गेज रीडर रविंद्र ने बताया कि अभी शाहाबाद मारकंडा में सिर्फ 1300 क्यूसेक पानी बह रहा है। काला अंब में 5 हजार 500 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया है। अभी घबराने की बात नहीं है, लेकिन खेतों में गया पानी धीरे-धीरे ही उतरेगा। अगर हिमाचल में बारिश हुई, तो मारकंडा में यहां जलस्तर बढ़ेगा।

एक महीने पहले भी गांवों में घुसा था पानी

पिछले महीने जुलाई 11 जुलाई को भी मारकंडा में आए पानी के दौरान कठवा चारों तरफ से पानी से घिर गया था। करीब 380 घरों वाले गांव का शहर से संपर्क टूट गया था। पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया था। लोगों को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से आवाजाही करनी पड़ी, जबकि स्कूली बच्चों और मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ी थी।

पहले जताई थी बाढ़ की आशंका

सिंचाई विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर मारकंडा का जलस्तर 10 से 15 हजार क्यूसेक तक पहुंचा तो कठवा, कलसाना, तंगौर और पट्टी जामड़ा में फिर बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। दो दिन पहले जलस्तर 10 हजार 786 क्यूसेक पहुंचते ही यही स्थिति देखने को मिली। कठवा की सड़क पर पानी बहने लगा और धान की फसल जलभराव की चपेट में आ गई।

कठवा में मजबूत तटबंध बनाने की मांग

मारकंडा का जलस्तर बढ़ते ही सबसे पहले असर कठवा पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पास मजबूत तटबंध नहीं हैं और इलाके की जमीन आसपास के क्षेत्रों से नीची है। इसी वजह से नदी का पानी सड़क पार कर सीधे खेतों में घुस जाता है। इसके बाद पानी धीरे-धीरे तंगौर और आसपास के गांवों तक फैल जाता है।