July 31, 2026
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  • साथ में पढ़ाई की, एक ही दिन शादी, सिरसा में कर्मचारियों ने किया सम्मानित

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज :  सिरसा जिले में जुड़वा भाई रोहताश कुमार और रघुवीर सिंह गुरुवार को शिक्षा विभाग से एक ही दिन रिटायर हो गए। दोनों भाई गणित अध्यापक के पद पर कार्यरत थे। उनकी कहानी अनोखी है, क्योंकि वे एक साथ जन्मे, एक साथ पढ़े, नौकरी भी करीब एक साथ ही लगी और अब एक साथ ही रिटायर भी हुए। दोनों की एक ही दिन शादी हुई और दोनों की पत्नी भी सगी बहनें हैं।

जानकारी के अनुसार, ये नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव नाथूसरी कलां के रहने वाले हैं। रघुवीर सिंह ने शहीद कृष्ण कुमार राजकीय माध्यमिक विद्यालय तरकांवाली से और रोहताश सिंह ने राजकीय माध्यमिक विद्यालय रूपाणा बिशनोईया से 37 साल की सेवा के बाद रिटायरमेंट ली। दोनों विद्यालयों में स्टाफ और ग्रामीणों द्वारा विदाई समारोह आयोजित किए गए। बीईओ सतबीर सिंह ढढ़िारिया इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

बीईओ सतबीर सिंह ने रघुवीर सिंह के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में विद्यालय ने कई उपलब्धियां हासिल कीं। पिछले सत्र में विभाग द्वारा आयोजित इंस्पायर मानक अवॉर्ड में 2 छात्रों का चयन हुआ, जिन्हें 10-10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि मिली।

बीए और बीएड की डिग्री सिरसा और हिसार कालेज से ली

रोहताश और रघुवीर सिंह का जन्म 9 जुलाई 1968 को हुआ था। उन्होंने नाथूसरी चौपटा के राजकीय स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद राजकीय नेशनल कॉलेज सिरसा से बीए और हिसार के साधु राम कॉलेज से बीएड की डिग्री हासिल की।

रोहताश ने एक साल पहले संभाला कार्यभार

रोहताश कुमार ने 28 जुलाई 1994 को चौपटा के राजकीय स्कूल में अध्यापक के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने तरकांवाली और शक्करमंदोरी के राजकीय स्कूलों में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2021 में उन्हें मुख्य अध्यापक के पद पर पदोन्नत किया गया और उन्होंने रूपाना बिश्रोईयां में सेवा दी, जहां से वे रिटायर हुए हैं।

20 साल तक कार्यरत रहे

रघुवीर सिंह ने 16 अगस्त 1995 को गांव लुदेसर के राजकीय स्कूल में गणित अध्यापक के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने वहां 6 साल सेवा दी, जिसके बाद शाहपुरिया गांव के स्कूल में 20 साल तक कार्यरत रहे। वर्ष 2021 में उन्हें मुख्य अध्यापक के पद पर पदोन्नत किया गया। उन्होंने रामपुरा ढिल्लो और तरकांवाली में भी सेवाएं दीं, और तरकांवाली के राजकीय स्कूल से सेवानिवृत्त हुए हैं।