- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बताया आगे का प्लान, इस्तीफा शुरुआत, देश चलाने का तरीका बदलेगा
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिस्तर से विक्ट्री साइन दिखाते हुए पहला रिएक्शन दिया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया और साफ किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए आगे के सुधारों की शुरुआत है।
गुरुग्राम में मीडिया और अपने सहयोगियों से बातचीत करते हुए वांगचुक ने साफ किया कि यह आंदोलन सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की एक व्यापक शुरुआत है। अब देश को चलाने का तरीका पूरी तरह बदलेगा और अन्याय की जगह सत्य का शासन स्थापित होगा।
एक इस्तीफे से राष्ट्र नहीं बनता
सोनम वांगचुक ने कहा कि एक इस्तीफे से राष्ट्र नहीं बनता है। यह तो केवल व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का पहला कदम है। असली चुनौती तो इसके बाद शुरू होती है, जहां हमें जमीन पर उतरकर बुनियादी सुधार का काम करने की जरूरत है। किसी एक चेहरे के बदलने से व्यवस्था नहीं सुधरती, बल्कि नियमों और नीयत को बदलना जरूरी होता है।
शिक्षा से लेकर शासन तक बदलाव
वांगचुक ने कहा कि देश की शिक्षा में सुधार होना चाहिए। सुधार सिर्फ शिक्षा में नहीं, बल्कि शासन में भी होगा। प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही, नीतियों में पारदर्शिता और जनता की भागीदारी को बढ़ाना उनके आगे के प्लान का मुख्य हिस्सा है।
वांगचुक ने तीन प्वाइंट में बताया अपना प्लान
भय का अंत: व्यवस्था में जहां कहीं भी भय का माहौल है, वह अब बिल्कुल नहीं होगा। छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को अपनी आवाज उठाने के लिए डरने की जरूरत नहीं है। अब देश चलाने का तरीका पूरी तरह बदलेगा।
प्यार-मोहब्बत की ताकत: अब लाठी और बंदिशों के बजाय, प्यार-मोहब्बत से देश को चलाया जाएगा। संवाद और सहिष्णुता ही नए शासन का मुख्य आधार होंगे।
सत्य का मार्ग: किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न होकर, पूरे देश को सत्य के रास्ते पर चलाया जाएगा।
भ्रष्टाचार को हटाने की बात कही
उन्होंने कहा कि व्यवस्था में जहां कहीं भी, जिस रूप में भी भ्रष्टाचार है, उसे हटाया जाएगा। अब देश किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढिलाई या नीतिगत बेईमानी को बर्दाश्त नहीं करेगा। भ्रष्टाचार के हर छोटे-बड़े स्वरूप को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कड़े नियमों, पूर्ण पारदर्शिता और तकनीक का सहारा लिया जाएगा। जनता के हक पर डाका डालने वाले हर रास्ते को बंद करके ही एक न्यायपूर्ण और पारदर्शी राष्ट्र का निर्माण संभव है।
लद्दाख और जम्मू कश्मीर से किए वादों को याद दिलाया
उन्होंने कहा कि लद्दाख के अनूठे पारिस्थितिक तंत्र और पर्यावरण की रक्षा के लिए लद्दाख के पहाड़ों को संरक्षित करने की मांग पूरी की जाए। इन संवेदनशील ग्लेशियरों और पहाड़ों को औद्योगिक शोषण से बचाना देश के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, वहां के नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार देने के लिए जो प्रक्रिया चली है, उसे ईमानदारी से चलाया जाए। स्थानीय जनता को शासन में पूरी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कुछ कोशिशें हो रही हैं, उसे छोड़कर जनता के साथ प्यार-मोहब्बत से मिलकर हम सीमाओं को सुदृढ़ करें। जब तक सीमाओं पर रहने वाले नागरिक सुरक्षित और संतुष्ट महसूस नहीं करेंगे, तब तक देश की सुरक्षा अधूरी रहेगी।
हमारे पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर के लोगों से जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा किया जाए। वहां के नागरिकों को पूर्ण राज्य का दर्जा और लोकतांत्रिक स्थिरता का जो भरोसा दिया गया था, उसे समय पर पूरा करना केंद्र सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। वादों को ईमानदारी से निभाने पर ही दोनों क्षेत्रों में शांति, विश्वास और भाईचारे का एक नया युग शुरू होगा।