July 3, 2026
3 july 19
  •  मेंटल हेल्थ प्रोग्राम लागू, मानसिक सेहत पर फोकस

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में अब मानसिक तनाव (स्ट्रेस) से जूझ रहे छात्रों की पहचान कर उन्हें समय रहते काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए सभी सरकारी कॉलेजों में मेंटल हेल्थ एंड वेल-बीइंग ऑफ स्टूडेंट्स कार्यक्रम शुरू किया है।

इसके तहत कॉलेजों के प्रिंसिपल और प्रोफेसरों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे तनावग्रस्त छात्रों की पहचान कर उनकी मदद कर सकें।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (HIPA), गुरुग्राम में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पहले बैच का प्रशिक्षण अब 7 और 8 जुलाई को होगा, जबकि दूसरा बैच 9 और 10 जुलाई को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।

साइकेट्रिस्ट से कराया जाएगा इलाज

यदि किसी छात्र में गंभीर मानसिक तनाव या अवसाद के लक्षण मिलते हैं तो उसे विशेषज्ञ मनोचिकित्सक (साइकेट्रिस्ट) के पास भेजा जाएगा। विभाग का उद्देश्य छात्रों को समय रहते सहायता उपलब्ध कराना और आत्महत्या जैसे गंभीर कदमों की संभावना को रोकना है।

प्रोफेसर अपनाएंगे दोस्ताना रवैया

प्रशिक्षण के दौरान प्रिंसिपल और प्रोफेसरों को यह सिखाया जाएगा कि वे छात्रों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें, उनकी समस्याएं धैर्यपूर्वक सुनें और सकारात्मक माहौल तैयार करें। शिक्षकों को संवाद कौशल, काउंसलिंग की शुरुआती तकनीक और मानसिक तनाव के संकेत पहचानने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

खुद प्रशिक्षण लेकर दूसरे को करेंगे प्रशिक्षित

प्रशिक्षण के बाद मास्टर ट्रेनर अपने-अपने कॉलेजों में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे और मानसिक तनाव से जूझ रहे छात्रों की पहचान कर उन्हें आवश्यक काउंसलिंग और सहायता उपलब्ध कराएंगे। विभाग का मानना है कि समय पर हस्तक्षेप से छात्रों में बढ़ रही नकारात्मक सोच और आत्महत्या की प्रवृत्ति को काफी हद तक रोका जा सकता है।

पढ़ाई और करियर का दबाव बना बड़ी वजह

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में छात्रों में मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके पीछे पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं का तनाव, करियर की चिंता और सामाजिक कारण प्रमुख माने जा रहे हैं। इसी को देखते हुए पहली बार राज्य स्तर पर कॉलेजों के प्रिंसिपलों और प्रोफेसरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।