रोहतक में भाजपा के पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर का विधानसभा चुनाव हारने के एक साल बाद दर्द छलका। चारा मंडी में आयोजित एक प्रोग्राम में मनीष ग्रोवर ने कहा कि मैं भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवार में पैदा नहीं हुआ, इसलिए जाट समाज ने उसे ठुकरा दिया। वह पंजाबी समाज में पैदा हुए, इसलिए जाटों ने उन्हें वोट नहीं दी।
मनीष ग्रोवर ने कहा कि 2 बार पार्षद बने और 6 बार विधानसभा का चुनाव लड़ा। जनता ने एक बार उन्हें विधानसभा चुनाव में आशीर्वाद दिया। लेकिन 5 साल में इतना काम किया, जितना वर्तमान का विधायक नहीं करवा सका। 10 साल कांग्रेस सरकार में रहते हुए काम नहीं किया और अब विपक्ष में रहते हुए काम नहीं करवा पाया। लेकिन मेरा काम बोलता है।
मनीष ग्रोवर ने कहा कि 2 बार पार्षद बने और 6 बार विधानसभा का चुनाव लड़ा। जनता ने एक बार उन्हें विधानसभा चुनाव में आशीर्वाद दिया। लेकिन 5 साल में इतना काम किया, जितना वर्तमान का विधायक नहीं करवा सका। 10 साल कांग्रेस सरकार में रहते हुए काम नहीं किया और अब विपक्ष में रहते हुए काम नहीं करवा पाया। लेकिन मेरा काम बोलता है।
मनोहर लाल ने सीएम बनने के बाद राजनीति के मायने ही बदल दिए
मनीष ग्रोवर ने कहा कि पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के घोटाले आज उजागर हो रहे है। जब से भूपेंद्र हुड्डा सीएम बना, तब से उसके खिलाफ पुलिस ने पर्चा दर्ज कर रखा है। लेकिन मनोहर लाल ने सीएम बनने के बाद राजनीति के मायने ही बदल दिए थे। आज लोगों को घर बैठे सुविधाएं मिल रही है।
मनीष ग्रोवर ने कहा कि पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के घोटाले आज उजागर हो रहे है। जब से भूपेंद्र हुड्डा सीएम बना, तब से उसके खिलाफ पुलिस ने पर्चा दर्ज कर रखा है। लेकिन मनोहर लाल ने सीएम बनने के बाद राजनीति के मायने ही बदल दिए थे। आज लोगों को घर बैठे सुविधाएं मिल रही है।
नए साल में जनता तय करे, काम करने वाला कौन
मनीष ग्रोवर ने कहा कि कांग्रेस के समय लोगों की संपत्तियों को खत्म कर दिया। 5 बनाने के लिए लोगों को परेशान किया। लेकिन भाजपा सरकार ने 5 फाटकों को हटाकर रोहतक को फाटक मुक्त कर दिया। नए साल में जनता से सवाल है कि काम करने वाला कौन है। जाति पाती से जनता ना देख, लेकिन काम के हिसाब से आंके।
मनीष ग्रोवर ने कहा कि कांग्रेस के समय लोगों की संपत्तियों को खत्म कर दिया। 5 बनाने के लिए लोगों को परेशान किया। लेकिन भाजपा सरकार ने 5 फाटकों को हटाकर रोहतक को फाटक मुक्त कर दिया। नए साल में जनता से सवाल है कि काम करने वाला कौन है। जाति पाती से जनता ना देख, लेकिन काम के हिसाब से आंके।