- 2 नवंबर को CM सैनी से मीटिंग
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे 10,757 गेस्ट टीचरों ने रेगुलर करने की मांग को लेकर चंडीगढ़ कूच का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। सोमवार दोपहर को अंबाला में कैबिनेट मंत्री अनिल विज का घेराव करने जा रहे टीचरों को उनकी मांगों पर आश्वासन मिला। अनिल विज ने मुख्यमंत्री नायब सैनी के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर को फोन लगाया। उन्होंने दो नवंबर को टीचर्स की मीटिंग CM से कराने की बात कही।
गेस्ट टीचरों की न्याय रैली 21 अक्टूबर को सिरसा से शुरू हुई थी। उनका चंडीगढ़ जाकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम था। सोमवार सुबह 11 बजे जब टीचर शाहाबाद से अंबाला की तरफ जाने लगे, तो पुलिस ने बराड़ा रोड पर बैरिकेडिंग कर दी। वहां वाटर कैनन और आंसू गैस के वाहन भी तैनात किए गए थे।
इसके बावजूद टीचरों ने अपनी रणनीति बदल दी और दूसरे रास्तों से बाइक, कार व बसों में सवार होकर अंबाला के मोहड़ा पहुंच गए। उनके कुछ नेता शाहाबाद में ही बैरिकेडिंग के पास रुककर भाषण देते रहे, जबकि बाकी टीचर आगे बढ़ गए।
जानिए, गेस्ट टीचर्स की क्या हैं मांगें और आगे क्या करेंगे…
2014 की नीति के तहत नियमित करने की मांग
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता कुलदीप झरौली ने कहा कि सरकार 2014 में बनाई गई तीन साल की नियमितीकरण नीति लागू करे। जो शिक्षक इसकी शर्तें पूरी करते हैं, उनकी सेवाएं नियमित की जाएं। शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, इसलिए सरकार को नियमितीकरण पर जल्द फैसला लेना चाहिए। वे जून 2014 से मिलने वाले लाभ भी देने की मांग कर रहे हैं।
विधायकों-मंत्रियों को देंगे ज्ञापन
गेस्ट टीचर्स ने आंदोलन आगे भी जारी रखने की तैयारी की है। आज विधायकों और मंत्रियों को मांगों का ज्ञापन सौंपने की योजना है। इसके बाद 1 नवंबर को गुरुग्राम, कैथल, अंबाला, करनाल, हिसार और रोहतक में रैलियां करने की तैयारी है।
कोर्ट के फैसले के अनुसार 28 मई 2014 से नियमित मानने की मांग
गेस्ट टीचर्स के प्रवक्ता डॉ. अजय लोहान के मुताबिक, उनकी मांग है कि अदालत के फैसलों के अनुसार शिक्षकों को 28 मई 2014 से नियमित माना जाए। उनका कहना है कि नियमितीकरण की तारीख से बकाया राशि पर 6% ब्याज, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य देय लाभ दिए जाएं। शिक्षक नए नियमों में EPF, वेतन बढ़ोतरी, मेडिकल लीव और नियमितीकरण का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने पर भी आपत्ति जता रहे हैं।
23 जून से लघु सचिवालय में धरना जारी
राज्य कार्यकारिणी सदस्य मेवा सिंह पिलानिया, बलजीत सिंह ढिल्लों और कुलदीप कुमार के मुताबिक, नियमितीकरण की मांग को लेकर 23 जून से लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। शिक्षक चाहते हैं कि सरकार नियमितीकरण से जुड़े अदालती आदेशों को लागू करे।
ऐसे शुरू हुआ गेस्ट टीचर्स का पूरा विवाद…
2005-06 में खाली पदों पर हुई थी नियुक्ति
याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह के मुताबिक, 2005-06 में सरकारी स्कूलों के रिक्त पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई थी। इसके लिए विज्ञापन जारी हुआ, चयन समिति बनाई गई और आवेदकों की जांच के बाद मेरिट लिस्ट जारी की गई। इसी प्रक्रिया के तहत गेस्ट फैकल्टी के रूप में नियुक्तियां हुईं। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में करीब 12,700 शिक्षकों को नियुक्त किया गया था। नियुक्ति के बाद से ही शिक्षक नियमित करने की मांग कर रहे थे और मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा।
सरकार ने कहा- नियुक्तियां अस्थायी व्यवस्था के तहत हुईं
हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार ने दलील दी कि शिक्षकों की नियुक्तियां अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थीं। वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए, इसलिए उन्हें स्थायी करने का दावा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उपलब्ध विवरण के मुताबिक, हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने रेगुलर करने के दिए थे आदेश
- 20 साल तक सेवा ली गई: हाईकोर्ट ने मामले में कहा- सरकार खुद मान चुकी है कि स्कूलों में टीचरों की भारी कमी के कारण इन्हें नियुक्त किया गया था। करीब 20 साल तक उनकी सेवाएं ली गईं। इतने लंबे समय तक सेवाएं लेना उन्हें केवल ‘स्टॉप गैप अरेंजमेंट’ बताना पूरी तरह अनुचित है।
- स्पेयर की तरह यूज नहीं कर सकते: कोर्ट ने अपने फैसले में टीचरों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा टीचर समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं। उन्हें मनमाने ढंग से ‘स्पेयर’ की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। 20 वर्षों तक संविदा पर काम लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे।
- नीतियों की वैधता पर विवाद खत्म: हाईकोर्ट ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद खत्म हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं।
परमानेंट होने के बाद ये लाभ मिलेगा
- इन टीचर्स को होगा फायदा : 2005-06 में हुई भर्ती प्रक्रिया में गेस्ट ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT), गेस्ट पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT), लेग्वेज टीचर, ड्राइंग टीचर, कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर (जहां पॉलिसी लागू होगी) भर्ती हुए थे। इसके अलावा उन टीचर्स को भी इसका लाभ मिलेगा, जिन्होंने 2014 की नियमितीकरण नीति की शर्तें पूरी की हैं।
- सरकारी टीचर्स जैसी सुविधाएं मिलेंगी: अगर सरकार इन टीचर्स को परमानेंट करती है तो इन्हें सरकारी टीचर्स की तरह कई सुविधाएं मिलेंगी। इनमें पे स्केल, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), मेडिकल सुविधाएं, अर्न लीव (EL), मातृत्व व पितृत्व हॉलिडे, एनुअल सैलरी इन्क्रीमेंट, पेंशन संबंधी लाभ (सरकारी नियमों अनुसार), सर्विस रूल से प्रमोशन का लाभ जैसी सुविधाएं शामिल हैं।