- रेट बढ़ाए सरकार, वीटा पाउडर मिल्क की तैयारी में
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : आने वाले दिनों में हरियाणा के लोगों को दूध की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इसके पीछे वजह है- दूध के रेट बढ़ाने के लिए चल रहीं कोशिशें, जिसके लिए किसान और पशुपालकों की ओर से सरकार को लगातार चेतावनी दी जा रही है। मगर, अभी तक सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई हैं।
इसी को देखते हुए सिरसा में बुलाई गई बैठक में तय हुआ कि 1 से 3 अक्टूबर तक हरियाणा में दूध की सप्लाई बंद रखी जाएगी। यह भी तय किया गया है कि हरियाणा के साथ-साथ यहां से पंजाब और राजस्थान जाने वाले दूध की भी सप्लाई नहीं होगी। किसानों और पशुपालकों के अलावा दूध के कारोबार से जुड़े लोगों ने भी इस निर्णय पर अपनी सहमति जताई है।
यह भी निर्णय हुआ कि इस आंदोलन के दौरान अगर कोई दूध बेचता पाया गया, तो उस पर 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दूध ढोने में इस्तेमाल होने वाले वाहन जब्त किए जाएंगे। पकड़े गए दूध को गरीब बस्तियों में बांटा जाएगा।
इधर, सिरसा स्थित वीटा प्लांट के अधिकारियों को कहना है कि यदि ऐसी स्थिति बनती है, पाउडर की सप्लाई की जाएगी। वहीं, सिरसा जयदेव डेयरी संचालक का कहना है कि 5 रुपए प्रति लीटर दाम बढ़ाकर दूध की नई रेट लिस्ट बनाई है। एक अक्टूबर से नए रेट लागू होंगे। गाय का दूध 55 से 60 और भैंस का दूध 75 से 80 रुपए प्रति लीटर होगा।
हरियाणा में रोजाना सप्लाई होने वाले दूध का लेखा-जोखा…
आंकड़ों की माने तो हरियाणा में प्रतिदिन औसतन 3.4 से 3.5 करोड़ लीटर दूध का कुल उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग 50 से 60 लाख लीटर दूध रोजाना संगठित डेयरी नेटवर्क और ब्रांडेड प्लांट्स के माध्यम से प्रोसेस करके बाजारों में सप्लाई किया जाता है। राज्य में दूध की सप्लाई का मुख्य आधार सहकारी और निजी डेयरी ब्रांड्स हैं।
सरकारी सहकारी ब्रांड वीटा (Vita) के तहत रोहतक में राज्य का सबसे बड़ा मिल्क प्लांट स्थित है, जिसकी क्षमता रोजाना 4.5 लाख लीटर दूध सप्लाई करने की है। इसके अलावा जींद, अम्बाला, सिरसा और बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) स्थित वीटा प्लांट्स से भी रोजाना 1 से 1.5 लाख लीटर दूध की सप्लाई की जाती है।
वहीं, अमूल (Amul) का धारूहेड़ा (रेवाड़ी) स्थित मेगा प्लांट रोजाना करीब 30 लाख लीटर दूध प्रोसेस और सप्लाई करने की क्षमता रखता है, जो हरियाणा के बड़े हिस्से के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर में भी आपूर्ति करता है। मदर डेयरी अपने बल्लभगढ़ और दिल्ली-सीमा से सटे केंद्रों से गुड़गांव, फरीदाबाद और सोनीपत में रोजाना लाखों लीटर दूध पहुंचाती है।
निजी क्षेत्र में सफीदों (जींद) स्थित लक्ष्य डेयरी का प्लांट और नमस्ते इंडिया, नेस्ले तथा कंट्री डिलाइट जैसी कंपनियों के नेटवर्क भी राज्य भर में दूध संग्रह और वितरण का बड़ा काम संभालते हैं। सिरसा वीटा प्लांट की बात करे तो यहां रोजाना औसतन करीब 70 से 75 हजार लीटर दूध आ रहा है, जिसमें भैस और गाय का दूध शामिल है। यहां से लगभग 30 से 35 हजार लीटर दूध डबवाली, फतेहाबाद, रतिया और पंजाब के मलौट और राजस्थान के गंगानगर और राजगढ़ एरिया में सप्लाई के लिए जाता है।
पशुपालकों को क्यों पड़ी सप्लाई बंद करने की जरूरत
चारा और खल-बिनौला सब महंगा, लागत भी पूरी नहीं
पशुपालकों की माने तो इस समय सूखा चारा तुड़ी 1000 से ₹1100 क्विंटल तक भाव है। खल 2600 से 2800 रुपए और बिनौले 2900 से 3200 रुपए प्रति बैग है। एक बैग 48 से 49 किलो में होता है। इस समय गेहूं का भाव भी ढाई हजार रुपए से ऊपर है। एक दुधारू पशु पर दिन में चारा और खल-बिनौला का 400 से 500 रुपए तक प्रतिदिन खर्च होता है।
इस लिहाज से देखे तो एक दुधारू पशु नई बयांत पर शुरू के 6 से 7 महीने तक 10 से 11-12 लीटर दूध देता है। ऐसे में पशुपालक एक पशु पर घर में दूध की लागत के बाद प्रतिदिन तीन से चार किलो दूध ही अधिकतम बेच पाता है, बाकी घर में पीने और लस्सी, दही में लग जाता है। इसी करण पशु का खर्चा भी पूरा नहीं हो पता।
लगातार मांग के बावजूद सरकार ने पांच रुपए ही बढ़ाए
जसबीर सिंह भाटी, मैक्स साहुवाला, गुरी सेखो आदि पशुपालकों का कहना है कि दूध के रेट बढ़ाने की मांग की गई थी, जिस पर सरकार ने संज्ञान लेते हुए दूध के रेट में पांच रूपए की बढ़ोतरी कर दी है। यह रेट इसी 20 सितंबर के बाद लागू हो गए हैं। इन नए रेट के हिसाब से भैंस के दूध अब 85 रुपए प्रति लीटर कर दिया है, जबकि गाय का दूध 68 रुपए प्रति लीटर 72 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
पशुपालकों का कहना है कि लागत से हिसाब से इस बढ़ोत्तरी से वे संतुष्ट नहीं है। इसी को देखते हुए सिरसा ही नहीं प्रदेशभर में दूध के रेट बढ़ाने की मांग को लेकर लगातार मीटिंग हुई है। इस मीटिंग के बाद ही किसान और पशुपालकों ने ये ऐलान किया है, जिससे में एक से तीन अक्टूबर तक दूध की सप्लाई बंद करने पर सहमति बनी है। राज्य स्तरीय मीटिंग भी बुलाई गई है।
पशुपालकों-किसानों की मीटिंग में ये फैसले लिए गए…
दूध बेचता पाए जाने पर 51 हजार जुर्माना, वाहन होगा जब्त : वीटा, वेरका, सरस, अमूल और दूसरी दूध कंपनियों से गांवों और शहरों में दूध की गाड़ियां नहीं भेजने की अपील की है। दूध बेचने वालों से अपील की गई है कि वे 1 से 3 अक्टूबर तक न तो दूध ले और न ही बेचें। इस आंदोलन के दौरान अगर कोई दूध बेचता पाया गया, तो उस पर 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दूध ढोने में इस्तेमाल होने वाले वाहन जब्त किए जाएंगे।
सिरसा में बनाई कमेटी चला रही अभियान : इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए सिरसा में एक जिला कमेटी बनाई गई है। इसमें जसबीर सिंह भाटी, मैक्स साहुवाला, भूपिंदर सिंह नंबरदार, उदय प्रताप सिंह गिल, गुरी सेखों, सोम चंद सरपंच, आकाश कंबोज, अर्जन कंबोज, गोरा बराड़, रोशन लाल, खुशदीप सिंह, बलजिंदर सूच और कुलविंदर सिंह शामिल है। यह कमेटी इस आंदोलन को आगे बढ़ने में जुटी है।
पूरे हरियाणा के पशुपालकों को इस अभियान में जोड़ेंगे : मैक्स साहुवाला का कहना है कि नकली दूध, घी, खोया और पनीर जैसी मिलावट को रोकना बेहद जरूरी है। पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य मिले और उपभोक्ताओं तक शुद्ध दुग्ध उत्पाद पहुंचे। इसके लिए नकली दूध के खिलाफ लड़ाई को पूरे हरियाणा में आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए किसानों, पशुपालकों, मजदूरों, दूध व्यवसाय से जुड़े लोगों और सामाजिक संगठनों से अभियान में सहयोग करने की अपील की।
CEO बोले- सप्लाई बंद नहीं होगी
उधर, वीटा प्लांट सिरसा से सीईओ दिनेश मेहता ने बताया की एक से तीन अक्टूबर तक दूध की सप्लाई बंद किए जाने की सूचना मिली है। हम लगातार दुग्ध उत्पादकों और पशुपालकों से बात कर रहे है। कई पशुपालकों ने दूध देने की बात कही है। अगर सप्लाई बंद रही तो पाउडर से दूध बनाने का काम करेंगे।