August 12, 2026
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  • सजा देने का कोर्ट को अधिकार

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : कांग्रेस नेता एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह राठौर ने करनाल में हाल में हुए एनकाउंटरों को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी तीन पीढ़ियां 1968 से 2026 तक वकालत और फौजदारी मामलों से जुड़ी रही हैं। इस दौरान हत्या से लेकर एनकाउंटर तक हर तरह के मुकदमे देखे, लेकिन बीते छह महीनों में जिस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, वे पहले कभी देखने को नहीं मिलीं।

राठौर ने कहा कि अपराधी को सजा देने का अधिकार कोर्ट को है, जबकि पुलिस का काम आरोपी को गिरफ्तार कर 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश करना है।

पुलिस को कानून के हिसाब से कार्रवाई करनी होगी

वीरेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि किसी भी अपराध में दोषी को सजा देने का अधिकार कोर्ट के पास है। यदि कोई व्यक्ति हत्या जैसा अपराध करता है, तो पुलिस की जिम्मेदारी है कि उसे गिरफ्तार कर कोर्ट के सामने पेश करे। इसके बाद उपलब्ध सबूतों के आधार पर कोर्ट आरोपी को दोषी या निर्दोष तय करती है। हत्या के मामले में कानून के तहत उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन सजा सुनाने का अधिकार पुलिस के पास नहीं है।

पहली बार खुलेआम एनकाउंटर की मांग

कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी बड़ी वारदात के बाद समाज या बिरादरी में रोष होना स्वाभाविक है। लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर सकते हैं, लेकिन अब पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि खुलेआम मांगपत्रों में एनकाउंटर की मांग की जा रही है। उन्होंने करनाल के पुलिस कप्तान से सवाल करते हुए कहा कि मीडिया के सामने पुलिस को दिए जाने वाले मांगपत्रों में एनकाउंटर की मांग की जा रही है और पुलिस अधिकारी भी ऐसी मांग पूरी करने की बात कहते हैं।

राठौर ने कहा कि समाज अपनी तरफ से कोई भी मांग रख सकता है, लेकिन पुलिस अधिकारियों को कानून की जानकारी दी जाती है। ऐसे में यह समझ से बाहर है कि पुलिस अधिकारी कैसे कह सकते हैं कि मांगपत्र में लिखी एनकाउंटर की मांग भी पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद जब किसी आरोपी के एनकाउंटर की खबर सामने आती है और उसके परिजन यह कहते दिखाई देते हैं कि वे आरोपी को थाने में छोड़कर आए थे, तो कई सवाल खड़े होते हैं।

राठौर ने स्पष्ट किया कि वह किसी दावे को सही या गलत नहीं बता रहे, लेकिन इन घटनाओं को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब पुलिस को देना होगा।

बचाव का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा

राठौर ने एनकाउंटर की स्थिति को समझाते हुए कहा कि पुलिस किसी अपराधी को पकड़ने जाती है और उस दौरान अपराधी पुलिस पर हमला करता है या फायरिंग करता है। ऐसी स्थिति में यदि पुलिस अधिकारी को लगता है कि उसके पास अपने बचाव के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा, तो वह आत्मरक्षा में गोली चला सकता है। इस दौरान आरोपी की मौत हो जाए, तो उसे एनकाउंटर कहा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि पहले कोई मांगपत्र पुलिस को दिया जाए, उसमें एनकाउंटर की मांग हो, मीडिया में भी एनकाउंटर की बात रखी जाए और उसी दिन शाम को एनकाउंटर होने की सूचना सामने आ जाए। उनके अनुसार, ऐसी घटनाओं पर कानून के हिसाब से गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

नेताओं को कानून संगत बयान देने की नसीहत

वीरेंद्र सिंह राठौर ने कुछ नेताओं के बयानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता कानून की बात करने के बजाय ऐसे बयान दे देते हैं, जो कानून के अनुरूप नहीं होते। उन्होंने नेताओं से अपील की कि इस तरह के बयान देने से बचें।

राठौर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि किसी मामले में यह साबित हो गया कि कोई आरोपी पुलिस हिरासत में था और बाद में उसका एनकाउंटर हो गया, तो इसमें शामिल लोगों के लिए गंभीर कानूनी मुश्किल खड़ी हो सकती है। उन्होंने करनाल के पुलिस कप्तान से भी इन मामलों को गहराई से समझने और कानून के दायरे में कार्रवाई करने की अपील की।

बोले- अपराध रोकना प्रभावी पुलिसिंग, ढेर करना नहीं

राठौर ने कहा कि कानून का राज देश की व्यवस्था का आधार है। उन्होंने कहा कि यह कहना आसान है कि अपराध नियंत्रण के दौरान एक अपराधी को ढेर कर दिया गया, लेकिन असली प्रभावी पुलिसिंग वह है जिसमें अपराध होने से पहले उसे रोका जाए। अपराध होने के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करना ही पूरी पुलिसिंग नहीं हो सकती।

उन्होंने हाल की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मामला सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर दो युवकों के बीच विवाद से शुरू हुआ था। यदि दोनों लोग करीब 15 दिन से एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर जान से मारने की बातें कर रहे थे तो पुलिस की प्रभावी निगरानी व्यवस्था को इसे पहले ही पकड़ लेना चाहिए था।

साइबर सेल सक्रिय होता, तो 3 जानें बच सकती थीं

राठौर ने कहा कि पुलिस और साइबर सेल को सोशल मीडिया की लगातार निगरानी करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर किसी दूसरे को मारने या गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है तो पुलिस के पास कानून के तहत कार्रवाई के विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने धारा 107/51 के तहत कार्रवाई की बात कहते हुए कहा कि ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को समय रहते हिरासत में लेकर कार्रवाई की जा सकती थी।

उन्होंने कहा कि यदि साइबर सेल पहले ही सक्रिय होता तो वाल्मीकि समाज के उस युवक की जान बचाई जा सकती थी, जिसकी करीब छह महीने पहले शादी हुई थी। राठौर के अनुसार, एनकाउंटर में मारे गए दोनों युवकों को भी समय रहते कार्रवाई करके बचाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में तीन लोगों की जान गई और इसमें पुलिसिंग की कमी का सवाल उठता है।

हर कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर हो

राठौर ने कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जुड़े मुकदमों की पैरवी भी की है और इसी अनुभव के आधार पर वह यह बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई पुलिस अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम करते हैं, लेकिन पुलिस का काम कानून के अनुसार अपराध पर नियंत्रण करना है। अंत में वीरेंद्र सिंह राठौर ने पुलिस से अपील की कि अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी पुलिसिंग की जाए और हर कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर हो।

उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य अपराध होने के बाद लोगों को ढेर करना नहीं, बल्कि समय रहते अपराध को रोकना और कानून व्यवस्था बनाए रखना होना चाहिए।