- अभी 2 जिलों 777 करोड़ रेवेन्यू आ रहा
हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध और तेज हो गया है। बुधवार को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की जनसुनवाई में बिजली कर्मचारी संगठनों, पावर इंजीनियरों, किसान संगठनों और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध किया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने जनसुनवाई पूरी कर ली है।
अब इस मामले में जल्द फैसला आने की संभावना है। प्रस्ताव के विरोध में बुधवार को गुरुग्राम और नूंह की सभी बिजली डिवीजनों में कर्मचारियों ने दो घंटे प्रदर्शन भी किया। कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि समानांतर वितरण लाइसेंस के नाम पर हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण की शुरुआत की जा रही है।
इनेलो बोली- बिजली का निजीकरण स्वीकार नहीं
जनसुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री एवं इनेलो नेता संपत सिंह ने आयोग के सामने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि सरकार निजी कंपनियों को बिजली क्षेत्र में लाकर सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर बिजली का निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों का दावा- सार्वजनिक व्यवस्था पर होगा असर
इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (EEFI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा और सुरेश राठी ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देना सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश है। उन्होंने कहा कि इस कदम का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। जनसुनवाई में इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों और अन्य सामाजिक संगठनों ने भी अपना विरोध दर्ज कराया।
इंजीनियरों ने उठाए ये बड़े सवाल
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने आयोग से आवेदन खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि आवेदनकर्ता कंपनी का गठन केवल एक साल पहले हुआ है और उसकी चुकता पूंजी सिर्फ 1 करोड़ रुपए है, जबकि गुरुग्राम और नूंह से हर महीने करीब 777 करोड़ रुपए का बिजली राजस्व प्राप्त होता है। एसोसिएशन ने कहा कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सेवा के लिए मजबूत नेटवर्क, सब-स्टेशन, प्रशिक्षित स्टाफ, एससीएडीए सिस्टम और पर्याप्त वित्तीय क्षमता जरूरी है, लेकिन आवेदनकर्ता कंपनी ने अपनी तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता का पर्याप्त प्रमाण नहीं दिया है।
राजस्व और उपभोक्ताओं पर असर की आशंका
इंजीनियरों का कहना है कि गुरुग्राम और नूंह, डीएचबीवीएनएल के कुल राजस्व का करीब 27.5% हिस्सा देते हैं। यदि लाभकारी उपभोक्ता निजी कंपनी के पास चले गए तो क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होगी और इसका असर आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों के रूप में पड़ सकता है।