August 21, 2026
21 aug 23
  • किसान बोले- गन्ने का रकबा घटा

हरियाणा ब्रेकिंग न्यूज : सोनीपत में भारतीय किसान यूनियन चढूनी हरियाणा ने गन्ना किसानों की बढ़ती लागत और घटते रकबे का हवाला देते हुए गन्ने के भाव में इस वर्ष कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने की मांग की है।

यूनियन ने गोहाना के नायब तसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर गन्ने का उचित भाव तय करने, चीनी का अधिक से अधिक निर्यात करने और 10 लाख क्विंटल कच्ची चीनी के आयात का सौदा रद्द करने की मांग उठाई।

किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से गन्ने के भाव में लागत के अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। डीजल, खाद, बीज, मजदूरी और सिंचाई समेत खेती की लागत लगातार बढ़ने से गन्ने की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। इसका असर अब गन्ने के रकबे पर भी दिखाई दे रहा है और शुगर मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

कई वर्षों से गन्ने के भाव में नहीं हुई पर्याप्त बढ़ोतरी

भारतीय किसान यूनियन चढूनी हरियाणा के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि पिछले कई वर्षों से गन्ने के रेट में बढ़ोतरी न के बराबर हुई है। दूसरी ओर खेती की लागत लगातार बढ़ी है। ऐसे में किसानों को गन्ने की फसल से अपेक्षित आमदनी नहीं मिल रही और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

गन्ने का रकबा लगातार घटने से मिलों पर असर

सत्यवान नरवाल ने कहा कि उचित भाव नहीं मिलने के कारण किसान हर साल गन्ने की खेती कम कर रहे हैं। गन्ने का रकबा घटने का सीधा असर अब चीनी मिलों पर पड़ रहा है। मिलों को पेराई के लिए पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है। यदि किसानों को लागत के अनुसार भाव नहीं मिला तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इस वर्ष 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की मांग

यूनियन ने इस वर्ष गन्ने के भाव में कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वर्तमान समय में खेती की लागत काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में गन्ने का ऐसा भाव निर्धारित किया जाना चाहिए जिससे किसान को उसकी मेहनत और लागत का उचित प्रतिफल मिल सके और वह गन्ने की खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित हो।

पिछले साल भी 500 रुपये बढ़ोतरी की मांग उठाई थी

सत्यवान नरवाल ने कहा कि पिछले वर्ष भी प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर गन्ने के भाव में 500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग की गई थी, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई। इस बार किसानों ने बढ़ती लागत को देखते हुए अपनी मांग बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है।

चीनी निर्यात बढ़ाने और कच्ची चीनी का आयात रद्द करने की मांग

किसानों ने चीनी के निर्यात को अधिक से अधिक बढ़ाने की मांग की। यूनियन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम बेहतर हुए हैं, इसलिए देश के किसानों और चीनी उद्योग को इसका लाभ मिलना चाहिए। किसानों ने चीनी निर्यात पर रोक को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए 10 लाख क्विंटल कच्ची चीनी के आयात के सौदे को रद्द करने की मांग की।

चीनी के भाव में तेजी का लाभ मिले

किसानों ने कहा कि चीनी के भाव में तेजी आने पर बाजार में हाहाकार मचने की बात कही जाती है, लेकिन किसानों की बढ़ी हुई लागत पर ध्यान नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि आज खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई समेत सभी कृषि लागत पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी हैं। ऐसे में चीनी के बेहतर भाव का लाभ किसानों तक भी पहुंचना चाहिए।

किसान और चीनी उद्योग दोनों को बचाने की मांग

भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से गन्ने का लाभकारी भाव तय करने के साथ चीनी उद्योग के हित में नीतिगत फैसले लेने की मांग की। यूनियन का कहना है कि गन्ने का रकबा बढ़ाने और शुगर मिलों को पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने के लिए किसानों को उचित मूल्य देना जरूरी है। इससे किसान और चीनी उद्योग दोनों को राहत मिल सकेगी।